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सांभर और जोबनेर में जल संकट से जंग, गायत्री देवी की इस अनोखी पहल ने बदल दी गांवों की तस्वीरराजस्थान
4 सित॰ 2026, 7:15 am (21 दिन पहले)· 2

सांभर और जोबनेर में जल संकट से जंग, गायत्री देवी की इस अनोखी पहल ने बदल दी गांवों की तस्वीर

जयपुर के सांभर और जोबनेर इलाके में जल संकट और फ्लोराइड युक्त पानी से जूझ रहे गांवों की तस्वीर अब बदल रही है। किसान गायत्री देवी यादव ने वर्षा जल संरक्षण की मुहिम चलाकर 700 से अधिक महिलाओं को जोड़ा और गांवों में खुशहाली लौटाई।

जयपुर जिले के सांभर और जोबनेर इलाके में पानी की किल्लत और फ्लोराइड वाला भूजल लंबे समय से ग्रामीण आबादी के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ था। पीने योग्य पानी की भारी कमी के कारण यहां के लोगों को रोजाना कड़ा संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन अब वर्षा जल संचयन की एक मजबूत पहल ने इस पूरे क्षेत्र की सूरत बदलनी शुरू कर दी है। इस बदलाव की कहानी की नींव एक किसान गायत्री देवी यादव ने रखी थी। करीब 30 साल की उम्र वाली गायत्री देवी ने पानी की इस गंभीर समस्या को केवल एक लाचारी मानकर चुप बैठने के बजाय इसका खुद मुकाबला करने का फैसला किया और बारिश के पानी को बूंद-बूंद सहेजने का बीड़ा उठाया।

शुरुआत अपने खेत से और फिर परिवार को जोड़ा

जब उन्होंने अपने आसपास के इलाकों में गिरते भूजल स्तर और पानी की विकराल होती समस्या को देखा, तो सबसे पहले उन्होंने अपने परिवार के भीतर ही जल संरक्षण की अलख जगाई। उन्होंने अपने पति को राजी किया और अपनी घरेलू व कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए खेत में ही एक तालाब का निर्माण करवाया। उनका यह छोटा सा निजी कदम आगे चलकर एक व्यापक जन अभियान की शक्ल ले लेगा, इसकी शुरुआत उन्होंने खुद से की थी। उन्होंने आसपास के ग्रामीणों को यह समझाना शुरू किया कि आसमान से गिरने वाले बारिश के पानी को बेकार बह जाने देने के बजाय यदि खेतों और घरों में सुरक्षित रख लिया जाए, तो इस सूखे और पानी की कमी की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।

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700 से ज्यादा महिला किसानों को जोड़ा

अपने इस मिशन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने विभिन्न सामाजिक संगठनों और सरकारी योजनाओं का साथ लिया और गांव-गांव जाकर महिलाओं तथा किसानों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना शुरू किया। उनकी इस प्रेरणादायक मुहिम से देखते ही देखते क्षेत्र की 700 से अधिक महिला किसान जुड़ गईं। इन महिलाओं को अपने-अपने खेतों में फार्म पॉन्ड यानी खेत तालाब बनवाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे इलाके में एक नया बदलाव आया। इन तालाबों में जैसे ही बारिश का पानी इकट्ठा होने लगा, उससे न सिर्फ फसलों की सिंचाई का काम आसान हुआ बल्कि भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी बहुत बड़ी मदद मिलने लगी।

फ्लोराइड की समस्या पर वर्षा जल से प्रहार

सांभर और जोबनेर क्षेत्र के कई हिस्सों में भूजल में अत्यधिक फ्लोराइड होना भी स्थानीय लोगों के सामने एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य चुनौती थी, जिससे लोगों को बीमारियां घेरती थीं। ऐसी विकट स्थिति में गायत्री ने वर्षा जल संचयन को केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर पेयजल संकट के समाधान का भी मुख्य हथियार बना लिया। उन्होंने ग्रामीणों को घरों के अंदर पानी के टांके बनवाने और उनमें बरसात का शुद्ध पानी सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित किया। इस आसान तकनीक के बदौलत कई परिवारों को मीठा और पूरी तरह शुद्ध वर्षा जल मिलने लगा। इसके अलावा पानी की तलाश में दूरदराज के इलाकों में भटकने वाली महिलाओं के समय और उनकी शारीरिक मेहनत की भी भारी बचत होने लगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं के जीवन में बदलाव

उनका स्पष्ट तौर पर यह मानना है कि जल संचयन केवल पानी बचाने भर का कोई साधारण अभियान नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं की पूरी जिंदगी को संवारने का एक बड़ा माध्यम है। खेतों में तैयार हुए इन छोटे तालाबों ने किसानों को बारिश के पानी का बेहतरीन उपयोग करने का सुनहरा अवसर दिया है, जिसका सकारात्मक असर अब खेती और ग्रामीण जीवनशैली दोनों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अब महिलाओं को पानी के लिए घंटों तक कड़ा परिश्रम नहीं करना पड़ता, बल्कि उन्हें अपने ही घर और खेत पर आसानी से पानी की उपलब्धता का संबल मिल गया है।

राष्ट्रपति अवार्ड से मिल चुका है सम्मान

उनके इन सराहनीय और उत्कृष्ट प्रयासों को देखते हुए जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें देश के राष्ट्रपति अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके द्वारा शुरू की गई यह छोटी सी व्यक्तिगत पहल अब किसी एक परिवार या गांव की सीमा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सांभरलेक और जोबनेर के पूरे इलाके में खेत तालाब, मिनी तालाब और घरेलू टांकों के माध्यम से वर्षा जल सहेजने का संदेश तेजी से फैल रहा है। एक महिला की दृढ़ इच्छाशक्ति और व्यक्तिगत सोच आज सैकड़ों परिवारों और 700 से अधिक महिला किसानों को एकजुट कर एक बड़े जल संरक्षण आंदोलन का रूप ले चुकी है।

सवाल-जवाब

गायत्री देवी यादव ने जल संरक्षण की शुरुआत कहां से की थी?
गायत्री देवी यादव ने जयपुर के सांभर और जोबनेर क्षेत्र में जल संरक्षण की शुरुआत अपने परिवार और खेत से की थी।
इस मुहिम से कितनी महिला किसानों को जोड़ा गया?
इस वर्षा जल संचयन मुहिम से क्षेत्र की 700 से अधिक महिला किसानों को जोड़ा गया है।
सांभर और जोबनेर में पानी की मुख्य समस्या क्या थी?
इन क्षेत्रों में पानी की कमी और भूजल में फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा होना बहुत बड़ी परेशानी थी।
वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए क्या उपाय किए गए?
खेतों में फार्म पॉन्ड यानी खेत तालाब और घरों में पानी के टांके बनवाकर बारिश के पानी को सुरक्षित किया गया।
गायत्री देवी को उनके किस कार्य के लिए सम्मानित किया गया?
जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि कैसे जमीनी स्तर पर जल प्रबंधन कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्थिरता को सीधे प्रभावित करता है। सांभर और जोबनेर जैसे क्षेत्रों में पानी की कमी और फ्लोराइडयुक्त जल के कारण होने वाले संघर्षों और स्वास्थ्य संकटों को गायत्री देवी की इस पहल ने काफी हद तक कम किया है। यदि ऐसे सामुदायिक प्रयासों को प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर नीतिगत सुरक्षा मिले, तो ग्रामीण अपराधों और जल विवादों में कमी आ सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

यह धरातलीय पहल प्रशासनिक सुस्ती और नीतिगत कमियों पर सीधा प्रहार है। जब ग्रामीण स्तर पर भूजल रिचार्ज और जल सुरक्षा सुनिश्चित होती है, तो यह सीधे तौर पर उन सामाजिक तनावों और अपराधों पर लगाम लगाता है जो संसाधनों की लूट और पानी की किल्लत के कारण पैदा होते हैं। ऐसे में शासन और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे इन सामुदायिक मॉडलों को औपचारिक योजनाओं से जोड़कर जल प्रबंधन को मजबूत करें।

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