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सांस लेने में तकलीफ के बाद जीतन राम मांझी दिल्ली एम्स के ICU में भर्तीबिहार
6 सित॰ 2026, 10:09 pm (18 दिन पहले)· 2

सांस लेने में तकलीफ के बाद जीतन राम मांझी दिल्ली एम्स के ICU में भर्ती

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को सांस लेने में तकलीफ और बुखार के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया, हालत बिगड़ने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को रविवार शाम अचानक सांस लेने में तकलीफ और तेज़ बुखार की शिकायत के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक उन्हें शाम करीब 5 बजे इमरजेंसी विभाग में लाया गया था, लेकिन हालत में सुधार न होने पर रात करीब 9 बजे उन्हें ICU में शिफ्ट कर दिया गया।

डॉक्टरों की टीम रख रही नजर

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों की एक विशेष टीम इस समय जीतन राम मांझी की सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनकी जरूरी मेडिकल जांचें भी की जा रही हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि उन्हें डेंगू हो सकता है, हालांकि एम्स प्रशासन की ओर से अभी तक उनकी सेहत को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बताया गया है।

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पिछले कुछ दिनों से बिगड़ रही है तबीयत

यह पहला मौका नहीं है जब जीतन राम मांझी की सेहत को लेकर चिंता बढ़ी हो। इससे पहले 31 अगस्त को भी उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 3 सितंबर को पटना से छुट्टी मिलने के कुछ ही समय बाद उनकी हालत फिर बिगड़ गई थी, जिसके चलते उन्हें व्हीलचेयर पर परिवार के साथ आनन-फानन में दिल्ली रवाना किया गया था। बार-बार बिगड़ती सेहत को देखते हुए अब उन्हें दोबारा एम्स में भर्ती किया गया है।

आगे क्या

फिलहाल जीतन राम मांझी ICU में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। डेंगू की आशंका को लेकर जांच जारी है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिवार और समर्थक उनके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जता रहे हैं।

सवाल-जवाब

जीतन राम मांझी को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया?
सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया।
उन्हें ICU में कब शिफ्ट किया गया?
रात करीब 9 बजे हालत में सुधार न होने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया।
क्या उनकी बीमारी की पुष्टि हो गई है?
नहीं, अस्पताल सूत्रों को डेंगू की आशंका है लेकिन एम्स ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्या यह पहली बार है जब उनकी तबीयत बिगड़ी है?
नहीं, इससे पहले 31 अगस्त को मेदांता अस्पताल में और 3 सितंबर को भी उनकी तबीयत बिगड़ी थी।
3 सितंबर को उन्हें दिल्ली कैसे लाया गया था?
उन्हें व्हीलचेयर पर परिवार के साथ पटना से दिल्ली ले जाया गया था।
फिलहाल उनकी हालत कैसी है?
वे ICU में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बार-बार अस्पताल में भर्ती होना केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य मामला नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में हुए स्वास्थ्य घटनाक्रमों को देखें तो वरिष्ठ नेताओं की मेडिकल फिटनेस और उनकी नियमित कार्यक्षमता पर असर पड़ना तय है। वर्तमान में डेंगू की आशंका के बीच डॉक्टरों की निगरानी और रिपोर्ट का इंतजार है, जिसका सीधा असर उनके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और जिम्मेदारियों पर पड़ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

जीतन राम मांझी का बार-बार स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल जाना और आईसीयू में भर्ती होना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ पर हुआ है। एक केंद्रीय मंत्री और बिहार के कद्दावर दलित नेता के रूप में उनकी सक्रियता एनडीए के राजनीतिक समीकरणों और आगामी प्रशासनिक प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ी है। यदि उनकी रिकवरी में समय लगता है, तो मंत्रालयीन कामकाज के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीतिक तैयारियों पर भी इसका स्पष्ट प्रभाव पड़ना तय है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बार-बार स्वास्थ्य बिगड़ना और आईसीयू में भर्ती होना एक गंभीर चिंता का विषय है, खासकर तब जब देश में डेंगू जैसी मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में अस्पताल में दाखिल होने का उनका यह सिलसिला यह संकेत देता है कि उनकी रिकवरी ठीक से नहीं हो पा रही है। राजनीतिक गलियारों और उनके समर्थकों की नजर अब एम्स के आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन पर टिकी है, क्योंकि उनकी यह स्थिति उनके आगामी राजनीतिक और आधिकारिक कार्यक्रमों को भी प्रभावित कर सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में मेरा मानना है कि एक केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ राजनेता की स्वास्थ्य स्थिति केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं रहता, बल्कि यह प्रशासनिक और सार्वजनिक सुरक्षा के दायरे से भी जुड़ जाता है। बार-बार अस्पताल में भर्ती होने और आईसीयू तक की नौबत आने से उनके मंत्रालयी कामकाज और जनसंपर्क कार्यक्रमों पर सीधा असर पड़ता है। जब तक एम्स प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया जाता, तब तक किसी भी कयास से बचना चाहिए। हालांकि, डेंगू की आशंका और पिछली बार 31 अगस्त तथा 3 सितंबर के मेडिकल घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि उनकी निगरानी बेहद सतर्कता से की जानी चाहिए।

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