जमुई में एक युवती के साथ हुई जघन्य वारदात के सामने आने के बाद बिहार में सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल से लेकर सत्ताधारी गठबंधन और अन्य राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। जहां एक ओर विपक्ष ने कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हुए सीधे इस्तीफे की मांग उठाई है, वहीं सत्ता पक्ष ने पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए कड़ा जवाब दिया है। अन्य राजनीतिक मंचों से भी मौजूदा और पिछली दोनों व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव का सरकार पर तीखा हमला और इस्तीफे की मांग
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे बेहद शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की वजह से शासन तंत्र को पूरे देश के सामने लज्जित होना पड़ रहा है। उनका कहना था कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग इस गंभीर मसले पर पर्दा डालने और बचाव करने का प्रयास कर रहे हैं। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि यदि किसी अपने परिवार की महिला के साथ ऐसा कुछ घटता, तो क्या तब भी जिम्मेदार लोग ऐसे ही गैर-जिम्मेदाराना बयान देते? उन्होंने साफ किया कि पीड़ित युवती पूरे प्रदेश की बेटी और बहन जैसी है और उसके साथ हुई दरिंदगी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
तेजस्वी यादव ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के बयानों का हवाला देते हुए मांग की कि मामले में नामजद सभी आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि जमुई के पुलिस अधीक्षक ने सात से आठ लोगों के शामिल होने की बात कही है, इसलिए सभी दोषियों को सीधे फांसी के फंदे पर लटकाया जाना चाहिए। उन्होंने सत्ता पक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रशासन को नैतिक पहरेदारी का पाठ पढ़ाने के बजाय कठोरतम कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में दिए गए एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब यह दावा किया गया था कि पटना से मुंगेर तक सफर के दौरान किसी महिला को छूने की जुर्रत करने पर पद छोड़ दिया जाएगा, तो अब उस वादे पर खरा उतरते हुए इस्तीफा दिया जाना चाहिए।
बीजेपी और हम नेताओं का पलटवार
अपराधियों की कोई जाति नहीं होने संबंधी तेजस्वी यादव के रुख पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता कभी-कभार समझदारी भरा रुख अपनाते हैं। रूडी के मुताबिक, तेजस्वी को इसी तरह परिपक्वता दिखाते हुए शासन और प्रशासन द्वारा उठाए गए सख्त कदमों की सराहना भी करनी चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने विपक्षी खेमे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं और अब किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें अपने करीबियों और समर्थकों को नियंत्रण में रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि इस बार तो पैर में गोली लगी है, लेकिन यदि हालात नहीं सुधरे तो अगली बार पुलिस की गोली सीधे सीने पर भी चल सकती है।
जन सुराज और सत्ता पक्ष का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया और दोनों पक्षों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कानून के राज पर बोलने का नैतिक अधिकार विपक्ष के पास नहीं है, क्योंकि राज्य में अराजकता के दौर की शुरुआत उन्हीं के शासनकाल में हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल दागते हुए कहा कि सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं को यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने बीते दो दशकों के कार्यकाल में जमीनी स्तर पर क्या सुधार किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या जमुई की यह घटना सुशासन के दावों की सच्चाई बयां करती है?
इधर, शासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा गया कि पुलिस बल को कानून तोड़ने वालों के विरुद्ध पूरी छूट दे दी गई है और उसी सख्ती का परिणाम जमुई में देखने को मिला है। सरकार का कहना है कि अपराध के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने की स्पष्ट नीति लागू है। किसी भी गुनहगार की पहचान उसकी जाति या मजहब से तय नहीं होगी, बल्कि जो कोई भी कानून व्यवस्था को चुनौती देगा, पुलिस प्रशासन उसके खिलाफ पूरी ताकत से कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगा।
सांसद अरुण भारती ने दी गिरफ्तारी की जानकारी
जमुई लोकसभा क्षेत्र से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने पूरे मामले पर प्रशासनिक तत्परता का ब्योरा रखा। उन्होंने बताया कि जैसे ही सोशल मीडिया के माध्यम से यह संवेदनशील मामला संज्ञान में आया, वे लगातार पीड़िता के परिजनों और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए थे।
सांसद अरुण भारती ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने जानकारी मिलते ही मामले पर स्वतः संज्ञान लिया और प्राथमिक सूचना दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने जानकारी दी कि अगले ही दिन दोपहर तक तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया था। इसके तुरंत बाद पुलिस ने सघन तलाशी अभियान और छापेमारी जारी रखी, जिसके परिणामस्वरूप बाकी बचे पांच आरोपियों को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस तरह वारदात में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा पूरी तरह कस दिया गया है।



















