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सफेदा की खेती में दोगुनी कमाई के लिए अपनाएं ये आठ कृषि तरीके, वैज्ञानिक डॉ हादी हुसैन ने बताए नियमभारत
20 सित॰ 2026, 10:18 am (18 मिनट पहले)· 0

सफेदा की खेती में दोगुनी कमाई के लिए अपनाएं ये आठ कृषि तरीके, वैज्ञानिक डॉ हादी हुसैन ने बताए नियम

यूकेलिप्टस के पेड़ों की बेहतर लंबाई और मजबूत लकड़ी तैयार करने के लिए खरपतवार नियंत्रण, सही खाद प्रबंधन, जल निकासी और कीटों से सुरक्षा के आठ जरूरी कृषि उपाय साझा किए गए हैं।

सफेदा यानी यूकेलिप्टस की व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के लिए शुरुआती देखभाल पेड़ों के पूरे जीवन चक्र और उपज को तय करती है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ हादी हुसैन के अनुसार यूकेलिप्टस के छोटे पौधों की उचित देखरेख न की जाए तो उनकी बढ़वार थम जाती है और किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पाता। अगर किसान शुरुआती दौर में वैज्ञानिक तौर-तरीकों का पालन करें, तो पेड़ों की मोटाई और लंबाई दोनों में सुधार होता है, जिससे लकड़ी की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में दोगुनी कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

खरपतवार प्रबंधन और थाले की नियमित सफाई

छोटे पौधों के आसपास स्वतः उगने वाली जंगली घास और अवांछित खरपतवार पौधों के मुख्य प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं। यह अनावश्यक वनस्पति जमीन की प्राकृतिक नमी और मिट्टी में मौजूद जरूरी पोषक तत्वों को तेजी से खींच लेती है, जिसके चलते मुख्य पौधे का विकास रुक जाता है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ हादी हुसैन ने सलाह दी है कि यूकेलिप्टस के थान या थाले की नियमित सफाई करते रहना चाहिए। थान साफ रहने से जड़ों तक पर्याप्त धूप और ताजी हवा पहुंचती है। बेहतर परिणाम के लिए महीने में कम से कम दो बार पौधों के चारों तरफ की जगह साफ रखनी चाहिए, जिससे पौधे तेजी से लंबे होते हैं।

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संतुलित खाद और पोषण का सही तरीका

पेड़ों की तेज बढ़वार और तने को ठोस मजबूती देने के लिए पोषक तत्वों का सही संतुलन बेहद जरूरी है। इसके लिए मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक कंपोस्ट मिलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त सीमित मात्रा में एनपीके खाद देने से पौधे का मुख्य तना सख्त और मजबूत बनता है। खाद डालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसे मुख्य तने से थोड़ी दूरी बनाकर ही जड़ों के फैलाव वाले हिस्से में डालें, ताकि खाद की गर्मी से कोमल जड़ें जलने से बच सकें। खाद डालने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना सबसे मुफीद रहता है, जिससे पोषक तत्व घुलकर जड़ों तक सरलता से पहुंच जाते हैं।

जल निकासी और नियंत्रित सिंचाई व्यवस्था

बरसात के दिनों में खेत में अत्यधिक जलभराव यूकेलिप्टस के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। जड़ों के पास पानी ठहरने से फंगल संक्रमण और जड़ गलन की बीमारी पनपने लगती है। इसलिए खेत में वर्षा के अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए उचित जल निकासी प्रबंध होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, यदि बारिश का लंबा अंतराल हो या सूखा पड़े, तो हफ्ते में एक बार हल्की सिंचाई जरूर करनी चाहिए। हल्की नमी बने रहने से पौधे सूखे की मार से बचे रहते हैं और उनकी वृद्धि निरंतर जारी रहती है।

दीमक से बचाव और जैविक कीट नियंत्रण

यूकेलिप्टस के छोटे और नए पौधों पर सबसे बड़ा खतरा भूमिगत कीटों, विशेष रूप से दीमक का होता है। दीमक पौधे की नाजुक जड़ों और तने को अंदर से खोखला कर देती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए पानी में क्लोरपायरीफॉस (Chlorpyrifos) मिलाकर घोल तैयार करें और उसे सीधे पौधों की जड़ों के पास डालें। इसके साथ ही मिट्टी में नीम की खली का प्रयोग करने से हानिकारक कीट दूर रहते हैं। किसान नियमित रूप से पत्तियों का निरीक्षण करते रहें ताकि किसी भी संभावित बीमारी या कीट के हमले का शुरुआत में ही पता लगाकर समय पर रोकथाम की जा सके।

छंटाई और सीधे तने के लिए सहारा

व्यावसायिक रूप से केवल वही पेड़ उपयोगी माने जाते हैं जिनका मुख्य तना बिल्कुल सीधा और गांठ-मुक्त हो। इसके लिए पौधे के निचले हिस्से में निकलने वाली सूखी, कमजोर या बेकार टहनियों की समय पर छंटाई करनी चाहिए। केवल मुख्य तने को ऊपर की तरफ बढ़ने देना चाहिए ताकि भविष्य में पेड़ बढ़िया इमारती और प्लाईवुड लकड़ी के काम आ सके। छंटाई का कार्य हमेशा साफ और धारदार औजार से करना चाहिए ताकि तने पर कोई घाव या संक्रमण न फैले। अगर पौधा हवा के दबाव से झुक रहा हो, तो उसे सीधा रखने के लिए बांस की डंडी का सहारा दिया जा सकता है।

समय पर हल्की गुड़ाई और मिट्टी की गुणवत्ता

पौधों के चारों ओर की मिट्टी में वायु संचार बनाए रखने के लिए समय-समय पर हल्की गुड़ाई आवश्यक होती है। बरसात के बाद जमीन की ऊपरी परत अक्सर सख्त और पपड़ीदार हो जाती है, जिससे जड़ों का विकास रुकने लगता है। गुड़ाई करने से मिट्टी भुरभुरी होती है, हवा का आवागमन सुधरता है और जड़ें गहराई तक फैलती हैं। जमीन में गहरी जड़ें आंधी-तूफान के समय पेड़ों को उखड़ने या गिरने से बचाती हैं और साथ ही पौधे जमीन से पानी और पोषक तत्वों का अवशोषण सुगमता से कर पाते हैं।

मवेशियों से सुरक्षा और तारबंदी

रोपाई के बाद शुरुआती एक वर्ष पौधों के जीवन के लिए सबसे नाजुक माने जाते हैं। इस दौरान आवारा मवेशी और बकरियां नए पौधों की कोमल पत्तियां और टहनियां खा जाते हैं, जिससे पौधे की वानस्पतिक बढ़त पूरी तरह बाधित हो जाती है। इस नुकसान से बचने के लिए खेत के चारों तरफ तारबंदी या बांस का मजबूत घेरा तैयार करना चाहिए। बाहरी जानवरों से सुरक्षित रहने पर पौधे बिना किसी रुकावट के लगातार बढ़ते रहते हैं।

पौधों के बीच अनुकूल दूरी का निर्धारण

खेत में पौधों का सघन रोपण उनकी वृद्धि को प्रभावित करता है। यदि पौधे बहुत पास-पास लगाए जाएं तो उन्हें धूप, प्रकाश और हवा समान रूप से नहीं मिल पाती। यूकेलिप्टस के पेड़ों के बीच मानक दूरी बनाए रखना जरूरी है ताकि शाखाएं और जड़ें खुलकर फैल सकें। अनुकूल दूरी मिलने पर पेड़ मोटाई और लंबाई दोनों में एक समान गति से बढ़ते हैं। यदि खेत में कोई पौधा कमजोर या सूख गया हो, तो उसकी जगह सही दूरी पर तुरंत नया पौधा रोपित करना चाहिए ताकि पूरा बाग एक समान विकसित हो।

सवाल-जवाब

यूकेलिप्टस के पौधों के आसपास खरपतवार निकालना क्यों आवश्यक है?
खरपतवार मिट्टी की नमी और पोषक तत्व खींच लेते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है। महीने में कम से कम दो बार थाले की सफाई करने से जड़ों तक धूप और हवा पहुंचती है।
यूकेलिप्टस में खाद देते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट और एनपीके खाद को हमेशा मुख्य तने से थोड़ी दूरी पर डालना चाहिए ताकि जड़ें न जलें, और इसके तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
बरसात के मौसम में पौधों की जड़ों को सड़ने से कैसे बचाएं?
खेत में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें ताकि पानी न ठहरे, क्योंकि जड़ों में अत्यधिक पानी जमा होने से जड़ गलन की बीमारी हो सकती है।
छोटे यूकेलिप्टस के पौधों को दीमक से बचाने के लिए क्या उपाय करें?
दीमक से बचाव के लिए क्लोरपायरीफॉस को पानी में मिलाकर जड़ों में डालें और मिट्टी में नीम की खली का प्रयोग करें।
पेड़ को सीधा और लकड़ी के काम के लायक बनाने के लिए क्या करें?
निचली सूखी और बेकार टहनियों की साफ औजार से छंटाई करें और केवल मुख्य तने को ऊपर बढ़ने दें, जरूरत पड़ने पर बांस की डंडी का सहारा दें।
बरसात के बाद पौधों के आसपास मिट्टी की गुड़ाई करना क्यों जरूरी है?
बरसात के बाद मिट्टी सख्त हो जाती है, इसलिए गुड़ाई करने से हवा का आवागमन बढ़ता है और जड़ें गहराई तक जाकर पौधे को आंधी-तूफान में गिरने से बचाती हैं।
शुरुआती दौर में पौधों को जानवरों से बचाना क्यों महत्वपूर्ण है?
बकरियां और आवारा मवेशी छोटे पौधों की पत्तियां खा जाते हैं जिससे विकास रुक जाता है, इसलिए खेत में तारबंदी या बांस का घेरा लगाना जरूरी है।
यूकेलिप्टस के पौधों के बीच उचित दूरी क्यों रखनी चाहिए?
उचित दूरी होने से पेड़ों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे पेड़ लंबाई और मोटाई दोनों में तेजी और एक समान रूप से बढ़ते हैं।
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