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गुरुग्राम में युवराज मनचंदा मर्डर के आरोपियों पर वसूली और साइबर फ्रॉड के गंभीर आरोपअपराध
20 सित॰ 2026, 9:35 am (47 मिनट पहले)· 1

गुरुग्राम में युवराज मनचंदा मर्डर के आरोपियों पर वसूली और साइबर फ्रॉड के गंभीर आरोप

गुरुग्राम में कारोबारी अधिकारी युवराज मनचंदा की हत्या के आरोपी आन्या वत्स और संयम सचदेवा पर करोड़ों रुपये की ठगी, फर्जी नोटिस और डराने धमकाने के नए खुलासे सामने आए हैं।

हरियाणा के गुरुग्राम में कारोबारी अधिकारी युवराज सिंह मनचंदा की कथित हत्या के मामले की पड़ताल में हर दिन नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। 6 सितंबर को हुई इस सनसनीखेज वारदात के आरोपी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा अब केवल हत्या के शक के दायरे में नहीं हैं, बल्कि उनके संगठित साइबर धोखाधड़ी और जबरन वसूली नेटवर्क की परतों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। जांच अधिकारी इस महत्वपूर्ण पहलू पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि क्या युवराज को इन दोनों आरोपियों के गैरकानूनी कारनामों की भनक लग चुकी थी और इसी राज के सामने आने के डर से उनकी जान ली गई।

स्कूल के पुराने साथी से सवा करोड़ की ठगी और धमकी

पड़ताल के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से उजागर हुई है कि दोनों आरोपी किसी भी हद तक जाकर अपने बेहद करीबी संपर्कों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं हिचकते थे। संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में अगस्त महीने में दर्ज की गई एक प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर सचदेवा के एक पूर्व सहपाठी से सवा करोड़ रुपये से अधिक हड़पने का मामला सामने आया है। पीड़ित व्यक्ति सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक की सहायक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर कार्यरत है।

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शिकायतकर्ता के अनुसार, सितंबर 2024 में उसके मोबाइल पर प्रवर्तन निदेशालय के नाम से तैयार किया गया एक जाली कानूनी नोटिस भेजा गया। इसके बाद सचदेवा और वत्स ने अपनी ऊंची राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच का झूठा दावा करते हुए इस नोटिस से जुड़े मामले को रफा-दफा कराने की पेशकश की। झांसे में लेने के बाद पीड़ितों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम से भी फर्जी दस्तावेज भेजे गए। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग, एनडीपीएस और यूएपीए जैसी बेहद सख्त कानूनी धाराओं के तहत जेल भेजने की धमकी दी गई, जिससे घबराकर पीड़ित ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, निजी कर्ज और पारिवारिक सदस्यों से उधार मांगकर 1.2 करोड़ रुपये से अधिक रकम मुख्य रूप से आन्या वत्स के खाते में भेज दी।

26 करोड़ की अतिरिक्त मांग और अमानवीय दबाव

पीड़ित द्वारा 1.2 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने के बाद भी आरोपियों का लालच शांत नहीं हुआ। वत्स की ओर से कथित रूप से 26 करोड़ रुपये की भारी-भरकम अतिरिक्त धनराशि की मांग रख दी गई। आरोपियों ने झूठा दावा किया कि सरकारी जांच एजेंसियों और शीर्ष अधिकारियों को मामले के निपटारे के लिए पहले ही 13.8 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। जब पीड़ित ने और पैसे जुटाने में असमर्थता जताई, तो उसे व्हाट्सऐप पर एक बेहद आपत्तिजनक और डराने वाला संदेश भेजा गया। उस संदेश में स्पष्ट लिखा था कि चाहे अपनी पत्नी को बेच दो या कुछ भी करो, लेकिन यह बकाया पैसा हर हाल में चुकाना होगा।

संपत्ति विवाद और घरेलू हिंसा के मामले

जांच के दायरे में संयम सचदेवा के पूर्व पारिवारिक विवाद भी आ गए हैं। पुलिस को सचदेवा की अलग रह रही पत्नी से जुड़े एक गंभीर संपत्ति विवाद का पता चला है। ग्रेटर नोएडा में स्थित लगभग 4.5 करोड़ रुपये मूल्य की एक अचल संपत्ति के मामले में भी धोखाधड़ी किए जाने की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, सचदेवा की पत्नी ने उसके खिलाफ पहले से घरेलू हिंसा का औपचारिक मामला भी दर्ज कराया हुआ है, जिससे आरोपी की हिंसक और आपराधिक प्रवृत्ति का पहले का रिकॉर्ड भी रेखांकित होता है।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और भागने का रूट

युवराज हत्याकांड की कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच प्रयोगशाला भेज दिया है। साइबर विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या मर्डर के बाद शव को ठिकाने लगाने के अलग-अलग तरीकों के बारे में आरोपियों ने इंटरनेट पर सर्च किया था। इसके अलावा पुलिस टीम ने एक अवैध आग्नेयास्त्र और युवराज की कार को भी अपने कब्जे में ले लिया है। हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद दोनों उत्तराखंड की ओर फरार हुए थे और रास्ते में उनके वृंदावन में ठहरने के प्रमाण भी जांच का मुख्य हिस्सा बने हुए हैं।

सवाल-जवाब

युवराज मनचंदा की हत्या किस तारीख को हुई थी?
युवराज सिंह मनचंदा की कथित हत्या 6 सितंबर को गुरुग्राम में हुई थी।
हत्याकांड के मुख्य आरोपी कौन हैं?
इस मामले में आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
पीड़ित बैंक अधिकारी से कुल कितनी राशि ठगी गई?
शिकायतकर्ता से विभिन्न मदों और डरा-धमकाकर 1.2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हड़पी गई थी।
आरोपियों ने किन सरकारी एजेंसियों के फर्जी नोटिस भेजे थे?
आरोपियों ने प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम पर जाली नोटिस तैयार कर भेजे थे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया है?
पुलिस ने युवराज की कार, एक अवैध पिस्तौल और दोनों आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
वारदात के बाद आरोपी कहां भागे थे?
हत्या के बाद दोनों आरोपी उत्तराखंड की तरफ भागे थे और रास्ते में वृंदावन में रुके थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

युवराज मनचंदा हत्याकांड की यह परत दर्शाती है कि मामला केवल व्यक्तिगत रंजिश का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय अपराध सिंडिकेट का है। जांच का रुख अब इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि क्या आरोपियों ने साइबर फ्रॉड और जबरन वसूली के जरिए और भी लोगों को निशाना बनाया है। यदि पुलिस वित्तीय लेन-देन और डिजिटल पदचिह्नों की गहराई से फॉरेंसिक जांच करे, तो इस संगठित अपराध नेटवर्क के अन्य छिपे हुए मोहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·10 मिनट पहले

यह सनसनीखेज मामला केवल एक वीभत्स हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित साइबर अपराध और कॉरपोरेट जगत के भीतर चल रहे गहरे वित्तीय घपलों की एक खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करता है। जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इस बात का पता लगाना है कि क्या इस गिरोह को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक तंत्र का मौन संरक्षण प्राप्त था। जिस तरह से फर्जी सरकारी नोटिस और गंभीर कानूनी धाराओं का खौफ दिखाकर करोड़ों रुपये वसूले गए, उससे स्पष्ट है कि यह सिंडिकेट लंबे समय से सुनियोजित तरीके से सक्रिय था और डिजिटल तथा बैंकिंग ट्रेल की गहन फोरेंसिक जांच से ही इसके अन्य छिपे हुए चेहरों और बड़े वित्तीय षड्यंत्रों का पूरी तरह पर्दाफाश हो सकेगा।

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