भारतीय पुलिस सेवा के 2013 बैच के अधिकारी जगमोहन मीणा का सरकारी सेवा से इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से मंजूर कर लिया गया है। 11 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक परिपत्र के माध्यम से उनके त्यागपत्र को स्वीकृति मिलने का विवरण सामने आया है। इसके साथ ही ओडिशा कैडर में उनकी लगभग 13 साल लंबी प्रशासनिक व पुलिस सेवा का अध्याय विधिवत रूप से समाप्त हो गया है। तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि से निकलकर सिविल सेवा में आने वाले जगमोहन मीणा ने अपने सेवाकाल में राज्य के दुर्गम एवं संवेदनशील जिलों से लेकर राजधानी क्षेत्र तक कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी थीं।
राजस्थान से आईआईटी कानपुर और फिर पुलिस सेवा तक का सफर
मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले जगमोहन मीणा का जन्म वर्ष 1989 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक रुचि तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में रही। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया और वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग शाखा में बीटेक तथा एमटेक की दोहरी डिग्री पूरी की। उच्च तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया।
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित वर्ष 2012 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 848वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ। इसके उपरांत उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित किया गया। 23 दिसंबर 2013 को उन्होंने 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी आधिकारिक सेवाएं शुरू कीं।
मलकानगिरी और गंजाम में पुलिस अधीक्षक के रूप में दायित्व
ओडिशा कैडर में अपने सेवाकाल के दौरान जगमोहन मीणा ने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिसिंग की कमान संभाली। उन्होंने मलकानगिरी और गंजाम जिलों में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्य किया। विशेष रूप से मलकानगिरी जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता रहा है, जहां सुरक्षा बलों का संचालन और कानून व्यवस्था बनाए रखना अत्यधिक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इस संवेदनशील इलाके में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने कई अभियानों का नेतृत्व किया। सेवाकाल के दौरान किए गए उत्कृष्ट एवं साहसिक कार्यों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2019 में पुलिस मेडल फॉर गैलंट्री से सम्मानित किया गया था। जिलों में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद उन्हें राज्य के प्रमुख शहरी केंद्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख का दायित्व सौंपा गया।
कटक और भुवनेश्वर में डीसीपी का कार्यभार और त्यागपत्र का निर्णय
जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारियों के बाद जगमोहन मीणा ने कटक और भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों में पुलिस उपायुक्त के पद पर कार्य किया। भुवनेश्वर में तैनाती के दौरान जुलाई 2026 में उन्होंने एएनआई से बातचीत की थी। उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने अपने परिवारजनों और मित्रों से गहन विचार-विमर्श करने के उपरांत निजी कारणों के चलते अपने पद से इस्तीफा देने का कदम उठाया था। उन्होंने इस पूरे विषय पर अपनी व्यक्तिगत निजता का सम्मान किए जाने का भी अनुरोध किया था।
पद छोड़ने का निर्णय लेने के बाद उन्होंने ओडिशा सरकार और राज्य की जनता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि जनता की सेवा करने का अवसर मिलने और उन पर भरोसा जताने के लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए इस्तीफे की प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लगा और अंततः 11 सितंबर 2026 के परिपत्र में राष्ट्रपति भवन की ओर से उनके इस्तीफे को मंजूरी प्रदान कर दी गई।
आईएएस दिव्या मित्तल और उनके सफर में समानताएं
जगमोहन मीणा के इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रकरण भी चर्चा में आ गया। दोनों ही अधिकारियों का प्रशासनिक सफर काफी हद तक एक जैसे पड़ावों से होकर गुजरा। दोनों ने वर्ष 2012 की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की थी और दोनों ही 2013 बैच के अधिकारी थे। सिविल सेवा परीक्षा 2012 में दिव्या मित्तल ने अखिल भारतीय स्तर पर 69वीं रैंक हासिल की थी और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला था, जबकि जगमोहन मीणा 848वीं रैंक के साथ ओडिशा कैडर के आईपीएस बने थे।
दोनों अधिकारियों ने लगभग 13 साल तक सेवा देने के बाद वर्ष 2026 में ही अपनी इच्छा से सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दिया था और सोशल मीडिया के जरिए यह साझा किया था कि उन्होंने अपनी मर्जी से यह कदम उठाया है। इसके बाद 15 सितंबर को उनके इस्तीफे की मंजूरी की पुष्टि हुई थी। राजनीति में शामिल होने को लेकर चली चर्चाओं पर दिव्या मित्तल ने एनडीटीवी से बात करते हुए स्पष्ट किया था कि उनका राजनीति में प्रवेश करने का कोई विचार नहीं है।
प्रशासनिक व्यवस्था से बाहर नई राहों की ओर
वर्ष 2013 से शुरू हुआ यह सफर वर्ष 2026 में दोनों अधिकारियों के लिए प्रशासनिक सेवाओं से अलग होने के रूप में सामने आया है। जहां दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहा, वहीं जगमोहन मीणा ने भारतीय पुलिस सेवा का दायरा छोड़ दिया। जगमोहन मीणा ने अपने कदम के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है, जबकि दिव्या मित्तल ने भी इसे अपना स्वैच्छिक फैसला बताया था। 13 साल के लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के बाद दोनों अधिकारियों के सरकारी सेवा से हटने के फैसले ने एक बार फिर उच्च प्रशासनिक सेवाओं से स्वैच्छिक विदाई के विषय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

















