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सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ वन्यजीव संरक्षण: एनएचएआई ने 19700 करोड़ रुपये में बनाए 2150 से अधिक सुरक्षित कॉरिडोरभारत
8 अक्तू॰ 2026, 8:19 pm (19 दिन पहले)· 0

सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ वन्यजीव संरक्षण: एनएचएआई ने 19700 करोड़ रुपये में बनाए 2150 से अधिक सुरक्षित कॉरिडोर

देशभर में हाईवे विकास के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों को बचाने के लिए एनएचएआई ने पिछले पांच सालों में 19,700 करोड़ रुपये की लागत से 2,150 से अधिक विशेष क्रॉसिंग तैयार किए हैं।

देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के तेजी से फैलते नेटवर्क ने अंतरराज्यीय यात्रा को काफी सुगम और तेज बना दिया है। इसके साथ ही वन क्षेत्रों और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र से गुजरने वाले मार्गों पर जंगली जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक गंभीर प्राथमिक विषय बन गया है। सघन वन क्षेत्रों के बीच से जब तीव्र गति वाले वाहन गुजरते हैं, तो वन्य जीवों के सड़क हादसों में घायल होने या मारे जाने का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही उनके पीढ़ियों पुराने प्राकृतिक आवागमन गलियारे भी कट जाते हैं। इसी गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने पर्यावरण और अधोसंरचना के बीच संतुलन साधने की दिशा में व्यापक कदम उठाए हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान वन्यजीव सुरक्षा उपायों पर करीब ₹19,700 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसके तहत देशभर की विभिन्न सड़क परियोजनाओं में 2,150 से अधिक विशेष वन्यजीव सुरक्षा स्ट्रक्चर निर्मित किए गए हैं।

जंगलों के बीच विशेष गलियारों और अंडरपास का निर्माण

राजमार्ग निर्माण के दौरान जंगलों के स्वाभाविक स्वरूप को क्षति पहुंचाए बिना जानवरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इंजीनियरिंग के आधुनिक समाधान लागू किए जा रहे हैं। इन संरचनाओं में भूमिगत वाइल्डलाइफ अंडरपास, खुले ओवरपास, ऊंचे एलिवेटेड कॉरिडोर और किनारों पर सुरक्षात्मक फेंसिंग की व्यवस्था शामिल है। इस पूरे बुनियादी ढांचे का प्राथमिक लक्ष्य यह है कि वन क्षेत्रों के वन्यजीव बिना किसी भय या खतरे के सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक आ-जा सकें। जब जानवरों को हाईवे के डामर पर कदम रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती, तो वे वाहनों की चपेट में आने से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं और जंगल के दोनों हिस्सों में उनका प्राकृतिक संपर्क निर्बाध रूप से बना रहता है।

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विकास और पर्यावरण के बीच तालमेल की रणनीति

वर्तमान सड़क नियोजन में अब केवल वाहनों की गति और दूरी कम करने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया जा रहा, बल्कि स्थानीय वन्यजीवों की आदतों और पारिस्थितिक संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र और वन अभयारण्य की विशिष्ट परिस्थितियों का गहन अध्ययन करने के बाद ही सुरक्षा ढांचे का डिजाइन तैयार किया जाता है। इस रणनीति से एक तरफ जहां नागरिकों को तेज और आधुनिक सड़क संपर्क का लाभ मिलता है, वहीं दूसरी तरफ जंगल के वन्य जीवों के प्राकृतिक रहवास और उनके पारंपरिक विचरण क्षेत्रों को भी सुरक्षित रखने में सफलता मिल रही है।

कई वन्यजीव प्रजातियों ने सुरक्षित मार्गों को अपनाया

विभिन्न राजमार्ग परियोजनाओं में निर्मित इन सुरक्षा गलियारों के व्यावहारिक परिणाम काफी सकारात्मक दर्ज किए गए हैं। एकत्र किए गए आंकड़ों और निगरानी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव इन अंडरपास और सुरक्षित मार्गों का नियमित व सहज रूप से उपयोग कर रहे हैं। अलग-अलग प्रजातियों द्वारा इन रास्तों को अपनाना यह प्रमाणित करता है कि यदि आधुनिक इंजीनियरिंग और सटीक पारिस्थितिक योजना का उचित समन्वय किया जाए, तो तीव्र गति वाली हाईवे कनेक्टिविटी और वन्यजीव संरक्षण दोनों लक्ष्यों को एक साथ सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकता है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर प्रभावी नियंत्रण

इन समर्पित स्ट्रक्चरों के निर्माण का एक प्रमुख दीर्घकालिक लाभ मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को न्यूनतम करना है। जब जानवरों के लिए वाहनों की पहुंच से दूर सुरक्षित क्रॉसिंग उपलब्ध होती है, तो उनके आबादी वाले सड़क क्षेत्रों या हाईवे लेन पर भटकने की घटनाएं घट जाती हैं। इससे सड़क पर यात्रा करने वाले नागरिकों की दुर्घटनाओं से रक्षा होती है और वन्य संपदा का भी नुकसान नहीं होता। एनएचएआई का रुख स्पष्ट है कि भविष्य की सभी राष्ट्रीय राजमार्ग योजनाओं में ऐसे स्थायी, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि देश का संपूर्ण हाईवे नेटवर्क अधिक सुरक्षित, हरित और आधुनिक बन सके।

सवाल-जवाब

एनएचएआई ने पिछले पांच वर्षों में वन्यजीव सुरक्षा पर कितना खर्च किया है?
एनएचएआई ने पिछले पांच सालों के दौरान वन्यजीव सुरक्षा और शमन उपायों पर करीब ₹19,700 करोड़ खर्च किए हैं।
देशभर में कुल कितने वन्यजीव सुरक्षा स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं?
देशभर के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2,150 से अधिक वाइल्डलाइफ मिटिगेशन स्ट्रक्चर बनाए जा चुके हैं।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किस प्रकार के निर्माण किए गए हैं?
इनमें विशेष अंडरपास, ओवरपास, एलिवेटेड कॉरिडोर और प्रोटेक्टिव फेंसिंग शामिल हैं ताकि जानवर सड़क पर न आएं।
इन विशेष स्ट्रक्चरों को बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इनका उद्देश्य जानवरों को वाहनों की टक्कर से बचाना, उनके प्राकृतिक रास्तों को सुरक्षित रखना और मानव-वन्यजीव टकराव को कम करना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·18 दिन पहले

सड़कें तो बन गईं और जानवर भी बच रहे हैं, यह देखकर अच्छा लगा। लेकिन क्या इन अंडरपास और फेंसिंग की नियमित देखभाल भी की जा रही है, या बनने के बाद इन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

सड़कों पर जानवरों के लिए 19,700 करोड़ खर्च होना सच में बड़ी राहत की बात है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·18 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने! जैसे फिल्मों में वीएफएक्स से जानवरों को सुरक्षित दिखाया जाता है, वैसे ही असल जिंदगी में ऐसे अंडरपास देखकर बहुत सुकून मिलता है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

यूपी के जंगलों से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे और हाइवे पर भी ऐसे सेफ कॉरिडोर और अंडरपास की सख्त जरूरत है, खासकर दुधवा और तराई बेल्ट में। गाड़ियों की रफ्तार बढ़ने से वन्यजीवों के सड़क पर आने के हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

रोहन भाई, दुधवा की बात सही है, पर क्या सिर्फ पैसे लगाने से ही सारे हादसे रुक जाएंगे? ग्राउंड पर मेंटेनेंस कौन देखेगा?

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