छत्तीसगढ़ में वन्यजीव पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने के लिए बिलासपुर स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व के केंवची गेट से 1 नवंबर को बफर सफारी का शुभारंभ किया जा रहा है। इस नई पर्यटन सेवा का उद्घाटन सुबह 11 बजे प्रदेश के वन मंत्री द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। इस सुविधा के शुरू होने से सैलानियों को घने जंगलों, वन्यजीवों और इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का बेहद करीब से अनुभव करने का शानदार मौका मिलेगा।
केंवची गेट पर वाहनों की खास व्यवस्था
इस नई पहल के अंतर्गत केंवची गेट पर पर्यटकों के लिए सफारी के वास्ते दो विशेष वाहनों की पुख्ता व्यवस्था की गई है। इनमें छह सीटों वाली एक जिप्सी के साथ-साथ आठ सीटों वाला एक महारानी वाहन भी शामिल किया गया है। इन दोनों वाहनों के जरिए सैलानियों को तयशुदा मार्ग पर जंगल की रोमांचक सैर कराई जाएगी। इस सुविधा के आने से अचानकमार आने वाले पर्यटकों को घूमने के लिए एक अतिरिक्त और बेहतर विकल्प मिल जाएगा।
अमरकंटक और रतनपुर को जोड़ने वाला सर्किट
अचानकमार टाइगर रिजर्व के केंवची गेट से शुरू होने वाली यह योजना अमरकंटक, अचानकमार और रतनपुर को आपस में पिरोकर एक बड़ा पर्यटन सर्किट बनाने की दिशा में बहुत अहम मानी जा रही है। आरएमकेके रोड के रास्ते इन तमाम क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा देने की पूरी रूपरेखा तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य सैलानियों को एक ही यात्रा में प्राकृतिक खूबसूरती, वन्यजीवों के दर्शन और धार्मिक स्थलों के दर्शन का अनूठा संगम उपलब्ध कराना है।
धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर का अनूठा मेल
इस पूरे प्रस्तावित टूरिस्ट सर्किट में अमरकंटक का स्थान बेहद खास और महत्वपूर्ण है। पवित्र नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के रूप में देश-दुनिया में विख्यात अमरकंटक धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। दूसरी तरफ, ऐतिहासिक रतनपुर में स्थित मां महामाया मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का बड़ा केंद्र है। इन दोनों प्रमुख स्थलों के ठीक बीच में स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और बेहद घने जंगलों के लिए विशेष पहचान रखता है.
समृद्ध जैव विविधता का प्राकृतिक ठिकाना
अचानकमार टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे प्रमुख वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में अपनी खास जगह रखता है। इस इलाके में विशाल साल के पेड़ों के साथ-साथ मिश्रित वन, ऊंची पहाड़ियां, गहरी घाटियां और अत्यंत समृद्ध जैव विविधता देखने को मिलती है। यह पूरा क्षेत्र बाघ समेत कई अन्य वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों का प्राकृतिक और सुरक्षित आवास है। शुरू होने जा रही इस बफर सफारी के माध्यम से प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों को जंगल के अंदरूनी माहौल को करीब से समझने का अवसर प्राप्त होगा।
स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक लाभ
इस बफर सफारी के शुरू हो जाने से पूरे क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भारी गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। अमरकंटक, अचानकमार और रतनपुर को मिलाकर एक संयुक्त पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किए जाने से यहां आने वाले पर्यटकों के रुकने और घूमने की अवधि में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर वाहन संचालन, टूर गाइड सेवा, खानपान और अन्य जरूरी पर्यटन सुविधाओं से जुड़े लोगों को भी प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ मिलने की प्रबल संभावना है।
वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण
हालांकि, जंगलों के भीतर पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक होगा। तय किए गए निर्धारित मार्गों पर ही नियंत्रित तरीके से सफारी का संचालन करने से सैलानियों को जंगल का रोमांच भी मिलेगा और वे पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक भी बन सकेंगे। इसके लिए विभागीय स्तर पर तय किए गए दिशा-निर्देशों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से पालन करना बहुत महत्वपूर्ण रहेगा।
पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद
केंवची गेट से आगामी 1 नवंबर को शुरू होने वाली यह बफर सफारी अचानकमार क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के दायरे को और अधिक विस्तृत करने की दिशा में एक बिल्कुल नई पहल है। अब इस पूरी योजना का भविष्य इसके कुशल संचालन, सैलानियों को मिलने वाली सुविधाओं और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर ही पूरी तरह निर्भर करेगा। बेहतर प्रबंधन के बल पर यह पूरा क्षेत्र आने वाले समय में प्राकृतिक, धार्मिक और वन्यजीव पर्यटन के मानचित्र पर अपनी पहचान को और अधिक मजबूत कर सकता है।
























