राजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचफरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारराजस्थान के डीग में पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा, सरपंच प्रत्याशियों के गुटों में पथराव से कई घायलयूडीपी से पाला बदलकर एनपीपी में शामिल हुए दो विधायक, मेघालय में बदला राजनीतिक गणित500 करोड़ के ऑडियो क्लिप मामले पर बोले मनोज जरांगे, जांच न होने पर 29 तारीख को दी सीधे टकराव की चेतावनीइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगा29 अक्टूबर को चंद्रमा का मिथुन राशि में प्रवेश, इन 7 राशियों के खुलेंगे उन्नति के द्वारमैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण
सरयू के प्रमुख घाटों का भव्य कायाकल्प, दीपोत्सव पर राम की पैड़ी से गुप्तार घाट तक दिखेगी त्रेतायुगीन छटाउत्तर प्रदेश
4 अक्तू॰ 2026, 2:25 pm (24 दिन पहले)· 1

सरयू के प्रमुख घाटों का भव्य कायाकल्प, दीपोत्सव पर राम की पैड़ी से गुप्तार घाट तक दिखेगी त्रेतायुगीन छटा

अयोध्या में आगामी दीपोत्सव के मद्देनजर राम की पैड़ी से लेकर गुप्तार घाट तक सरयू तट का व्यापक सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। 7 नवंबर के आयोजन में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए इन घाटों पर पारंपरिक स्थापत्य और आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।

अयोध्या में 7 नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव से पहले सरयू तट के धार्मिक स्थलों को भव्य स्वरूप देने की तैयारियां जोरों पर हैं। राम की पैड़ी सहित नदी के तमाम प्रमुख घाटों के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में पहुंचाया जा रहा है। इस पूरी परियोजना का दायरा दैनिक आरती स्थल से शुरू होकर ऐतिहासिक गुप्तार घाट तक फैला हुआ है। उत्सव के अवसर पर रामनगरी पहुंचने वाले लाखों दर्शनार्थियों और स्थानीय निवासियों के लिए ये संवरे हुए तट आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र साबित होंगे।

पौराणिक पहचान और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय

तटवर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को सुधारते समय अयोध्या के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को केंद्र में रखा गया है। निर्माण कार्य के दौरान घाटों पर पारंपरिक छतरियां, नक्काशीदार जालियां और विशिष्ट स्थापत्य कलाकृतियां स्थापित की जा रही हैं। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि पवित्र नदी में स्नान करने और पूजन अनुष्ठान संपन्न करने आने वाले लोगों को प्राचीन विरासत की सजीव अनुभूति हो सके। विकास योजनाओं को इस ढंग से लागू किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं भी मिलें और क्षेत्र का पौराणिक स्वरूप भी पूरी तरह अक्षुण्ण बना रहे।

ये भी पढ़ें

महापौर ने बताया सांस्कृतिक संरक्षण का रोडमैप

अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी के अनुसार, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान शहर की पारंपरिक संस्कृति को दिव्यता और भव्यता प्रदान करने वाला एक अभूतपूर्व कदम है। उन्होंने जानकारी दी कि घाटों के बुनियादी ढांचे में खूबसूरत छतरियों और जालियों का संयोजन इसी सोच के तहत किया गया है। निर्माण का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल स्नान का अवसर ही न मिले, बल्कि एक अलौकिक और यादगार आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त हो सके।

त्रेतायुग के वैभव को दर्शाती निर्माण शैली

वास्तुकला और डिजाइन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण निर्माण शैली में त्रेतायुगीन अयोध्या की आभा दर्शाने का पूरा प्रयास किया गया है। घाटों का वातावरण ऐसा तैयार किया जा रहा है जिससे श्रद्धालु कदम रखते ही खुद को शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक जड़ों से जुड़ा हुआ महसूस करें। तटों का बदलता हुआ स्वरूप नगरी के समग्र विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है। दीपोत्सव के मुख्य पर्व पर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी भारी तादाद में श्रद्धालु पहुंचेंगे, जिनके स्वागत के लिए ये सुसज्जित घाट पूरी तरह तैयार किए जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

अयोध्या के किन घाटों का कायाकल्प किया जा रहा है?
अयोध्या में राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के आरती स्थल से लेकर गुप्तार घाट तक के प्रमुख तटों का निर्माण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।
दीपोत्सव का आयोजन किस तारीख को होना है?
अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन 7 नवंबर को निर्धारित है।
घाटों के निर्माण में किस विशेष वास्तु शैली का उपयोग किया गया है?
घाटों पर सुंदर छतरियां और जालियां बनाई गई हैं, जिससे त्रेतायुगीन अयोध्या की पौराणिक और आध्यात्मिक संस्कृति की झलक मिलती है।
अयोध्या के महापौर कौन हैं और उन्होंने इस परियोजना पर क्या कहा?
अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्य मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अयोध्या की पौराणिक संस्कृति को दिव्यता और भव्यता की ओर ले जाने का अभूतपूर्व कदम है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·24 दिन पहले

अयोध्या में इस बार दीपोत्सव पर त्रेतायुग की यादें ताजा हो जाएंगी। गुप्तार घाट से राम की पैड़ी तक घाटों का यह नया रूप सचमुच इस सांस्कृतिक आयोजन को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

अयोध्या में इस बार दीपोत्सव पर गुप्तार घाट तक का कायाकल्प वाकई शानदार दिख रहा है, चुनाव के ठीक पहले धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का यह असरदार तरीका है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

अर्जुन भाई, आपकी बात सही है। पिछली बार जब मैं दीपोत्सव पर वहाँ गया था, तो गुप्तार घाट की तरफ काफी भीड़ और इंतज़ाम की कमी थी, इस बार सुधार दिख रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

गुप्तार घाट से राम की पैड़ी तक का पूरा किनारा सचमुच दीपोत्सव पर बहुत खूबसूरत दिखेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रोहन भाई, आपकी बात सौ फीसदी सही है। पिछली बार मैं खुद दीपोत्सव पर वहाँ था, गुप्तार घाट से राम की पैड़ी तक का वो नज़ारा आज भी आँखों में बसा है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp