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सावन की भीड़ में ऋषिकेश के घाटों पर कूड़े का बढ़ता संकटउत्तराखंड
12 अग॰ 2026, 8:24 pm (41 दिन पहले)· 2

सावन की भीड़ में ऋषिकेश के घाटों पर कूड़े का बढ़ता संकट

सावन के महीने में ऋषिकेश गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ से गुलजार है, लेकिन सड़कों और घाटों पर बढ़ते कूड़े ने सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सावन के महीने में हर साल की तरह इस बार भी ऋषिकेश शिवभक्तों और श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आ रहा है, लेकिन गंगा घाटों और शहर की सड़कों पर बढ़ते कूड़े के ढेर स्थानीय सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

बोल-बम के जयकारों के बीच सड़कों पर कचरे का ढेर

शहर में हर तरफ भोले के जयकारे गूंज रहे हैं और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है. बड़ी संख्या में कांवड़िए और तीर्थयात्री ऋषिकेश पहुंच रहे हैं. सुबह से देर रात तक बाजारों, घाटों और मुख्य सड़कों पर लोगों का तांता लगा रहता है. लेकिन इसी भीड़ के साथ शहर में जमा होने वाला कूड़ा भी लगातार बढ़ रहा है, और कई इलाकों में यह समय पर उठ नहीं पा रहा. सड़क किनारे प्लास्टिक की बोतलें, खाने-पीने के सामान के खाली पैकेट और तरह-तरह का कचरा जमा दिखाई देता है. घाटों के आसपास भी गंदगी फैली नजर आती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऋषिकेश की पहचान ही गंगा और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी है, इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं को जगह-जगह कूड़ा दिखना शहर की छवि के लिए ठीक नहीं है.

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भीड़ बढ़ी, लेकिन सफाई का इंतजाम पुराने ढर्रे पर

स्थानीय निवासी नरेंद्र गिरी ने बताया कि सावन में हर साल इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था उस अनुपात में मजबूत होती नजर नहीं आती. उनके मुताबिक सुबह के वक्त सफाई तो होती है, मगर कुछ ही घंटों में कूड़ा दोबारा जमा हो जाता है. उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का शहर स्वागत करता है, लेकिन इसके साथ ही शहर का साफ बना रहना भी जरूरी है. घाटों और सड़कों पर फैली गंदगी की वजह से स्थानीय निवासियों को भी रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

सिर्फ सफाईकर्मी बढ़ाना काफी नहीं, जागरूकता भी जरूरी

नरेंद्र गिरी के मुताबिक सिर्फ सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ा देने भर से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच भी इस बारे में जागरूकता फैलानी होगी. उनका सुझाव है कि शहर में जगह-जगह पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएं और लोगों को यह समझाया जाए कि कूड़ा सड़क या घाट पर न फेंका जाए. उनका मानना है कि अगर भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगातार और नियमित सफाई की व्यवस्था बनाई जाए, तो हालात काफी हद तक सुधर सकते हैं.

ट्रैफिक और दूसरी व्यवस्थाओं पर भी दबाव

सावन के दौरान ऋषिकेश में भीड़ बढ़ने से सिर्फ सफाई ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक और दूसरी नागरिक व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में प्रशासन के लिए सफाई व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त और ठोस इंतजाम करना जरूरी हो जाता है, ताकि गंगा किनारे उमड़ने वाली आस्था की भीड़ को साफ-सुथरा शहर भी मिल सके.

सवाल-जवाब

ऋषिकेश में इस समय इतनी भीड़ क्यों है?
सावन का महीना चल रहा है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं.
सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की क्या शिकायत है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह सफाई होती है, लेकिन कुछ ही घंटों में घाटों और सड़कों पर कूड़ा फिर जमा हो जाता है.
यह मुद्दा किसने उठाया?
स्थानीय निवासी नरेंद्र गिरी ने सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी.
स्थिति सुधारने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
नरेंद्र गिरी के मुताबिक जगह-जगह पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं, श्रद्धालुओं में जागरूकता फैलाई जाए और भीड़ वाले इलाकों में लगातार सफाई हो.
क्या सिर्फ सफाई कर्मचारी बढ़ाने से समस्या हल हो जाएगी?
नरेंद्र गिरी के अनुसार सिर्फ कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच जागरूकता भी जरूरी है.
क्या भीड़ का असर सिर्फ सफाई पर पड़ रहा है?
नहीं, सफाई के अलावा ट्रैफिक और दूसरी नागरिक व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

ऋषिकेश के घाटों पर सावन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ सिर्फ सफाई का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक मुस्तैदी का गंभीर मामला है। धार्मिक आयोजनों में कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि समय रहते कूड़े के प्रबंधन और ठोस कचरा निस्तारण के कड़े इंतजाम नहीं किए गए, तो यह अव्यवस्था न केवल शहर की छवि को नुकसान पहुँचाएगी, बल्कि तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

ऋषिकेश के घाटों पर सावन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और उससे उपजा कचरे का संकट केवल एक सामान्य नागरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक तैयारियों की एक गंभीर परीक्षा है। कानून-व्यवस्था और लोक सुरक्षा के नजरिए से देखें तो चरमराती सफाई व्यवस्था और बेकाबू ट्रैफिक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते अतिरिक्त बल तैनात कर ठोस प्रबंधन नहीं किया गया, तो यह प्रशासनिक लापरवाही स्थानीय कानून व्यवस्था और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर केवल सावन के दौरान तात्कालिक उपाय करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। तीर्थनगरी में बढ़ती भीड़ के दबाव को संभाल0ने के लिए स्थानीय निकायों को एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करना होगा, जिसमें कचरा उठान की आवृत्ति बढ़ाने के साथ-साथ प्लास्टिक के उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध और निगरानी शामिल हो। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले बड़े आयोजनों में स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

ऋषिकेश के घाटों पर सावन में उमड़ने वाली भारी भीड़ और चरमराती सफाई व्यवस्था सिर्फ एक स्थानीय नागरिक निकाय की विफलता नहीं, बल्कि तीर्थाटन प्रबंधन में दीर्घकालिक योजना के अभाव को दर्शाती है। यदि प्रशासन ने समय रहते मेला क्षेत्र और घाटों को जोन में बांटकर सतत सफाई और मोबाइल डस्टबिन की व्यवस्था नहीं की, तो गंगा की पवित्रता और पर्यावरण पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। आगामी दिनों में इस पर ठोस प्रशासनिक नीति नहीं बनी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन दोनों पर असर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता का यह संकट केवल नागरिक लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। तीर्थ स्थलों पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तय नियमों का पालन न होने से गंगा की पारिस्थितिकी खतरे में पड़ रही है। यदि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निगरानीदस्ते तैनात कर नियम तोड़ने वालों पर आर्थिक दंड और सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह स्थिति विधि-व्यवस्था और लोक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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