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शहीद मनजीत सिंह वाला स्कूल दशकों से बंद, कांसापुर के बच्चे रोज तय करते हैं तीन किलोमीटर का सफरहरियाणा
22 जुल॰ 2026, 12:14 am (62 दिन पहले)· 0

शहीद मनजीत सिंह वाला स्कूल दशकों से बंद, कांसापुर के बच्चे रोज तय करते हैं तीन किलोमीटर का सफर

अंबाला के कांसापुर गांव में शहीद मनजीत सिंह के नाम वाला सरकारी प्राइमरी स्कूल बरसों से बंद पड़ा है, जिसके चलते बच्चों को पढ़ाई के लिए रोज तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ता है.

अंबाला-जगाधरी रोड से सटे गांव कांसापुर में सरकारी प्राइमरी स्कूल की इमारत बरसों से सूनी पड़ी है, जबकि गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चे रोज दो से तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाने को मजबूर हैं. सबसे तकलीफदेह पहलू यह है कि यही स्कूल कभी शहीद मनजीत सिंह के नाम से चलता था, और आज भी गांव के कई बेटे भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, तो कुछ ने सरहद पर शहादत भी दी है. गांव वालों को यही बात सबसे ज्यादा कचोटती है कि जिस गांव ने देश को जवान और शहीद दिए, वहीं के बच्चों को पढ़ाई के लिए तरसना पड़ रहा है.

रोज का सफर बना बच्चों के लिए खतरा

सुबह जब कांसापुर के छोटे बच्चे कंधे पर बस्ता लादकर घर से निकलते हैं, तो उनके साथ-साथ माता-पिता की धड़कनें भी तेज हो जाती हैं. बरसात के मौसम में कच्चे रास्ते कीचड़ से लथपथ हो जाते हैं और बच्चों को उन्हीं फिसलन भरी पगडंडियों से गुजरकर पड़ोसी गांव के स्कूल तक पहुंचना पड़ता है. कई बार बच्चे फिसलकर गिर चुके हैं और उन्हें चोटें भी लग चुकी हैं. ग्रामीणों के मुताबिक अब यह सिर्फ पढ़ाई-लिखाई का सवाल नहीं रहा, बल्कि बच्चों की जान-सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर मसला बन चुका है.

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सरपंच बोले, बढ़ती आबादी के बीच स्कूल फिर खुले

गांव के सरपंच गुरनाम सिंह के मुताबिक, बरसों पहले जब गांव में बच्चों की तादाद घट गई थी, तब यह स्कूल बंद कर दिया गया था. मगर हालात अब बदल चुके हैं. गुरनाम सिंह कहते हैं कि गांव में इस वक्त छोटे बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई है, और हर रोज इन बच्चों को दूसरे गांव भेजना और वहां से वापस लाना, मां-बाप के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. उनकी मांग साफ है, शहीद के नाम पर बना यह स्कूल दोबारा शुरू किया जाए ताकि बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा मिल सके.

एक जोहड़ के भरोसे पूरा गांव, बरसात में बढ़ती मुसीबत

स्कूल के अलावा कांसापुर में पानी निकासी भी एक पुरानी और गंभीर परेशानी है. गांव में सिर्फ एक ही जोहड़ है, जिस वजह से बरसाती पानी की सही निकासी नहीं हो पाती. बारिश होते ही जगह-जगह पानी जमा हो जाता है, गलियां जलमग्न हो जाती हैं और आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं. यही वजह है कि सरपंच गुरनाम सिंह गांव में एक और नया जोहड़ बनाए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि बरसाती पानी की निकासी का स्थायी हल निकल सके.

हाईवे पर कट नहीं, बस स्टॉप नहीं, हादसों में जा चुकी हैं जानें

ग्रामीण विक्रम पाल इस गांव की एक और गंभीर समस्या की तरफ इशारा करते हैं, जीटी रोड पर कट और बस स्टॉप का न होना. विक्रम पाल बताते हैं कि गांव के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने जीटी रोड पर कोई कट नहीं है, जिस वजह से लोगों को लंबा चक्कर काटकर आना-जाना पड़ता है. इसी वजह से इस सड़क पर कई बार हादसे हो चुके हैं, और कई युवाओं की इसमें जान भी जा चुकी है. इतना सब होने के बावजूद अब तक इसका कोई स्थायी हल नहीं निकाला गया. गांव के अनमोल का कहना है कि चुनाव के वक्त नेता बड़े-बड़े वादे करके जाते हैं, लेकिन वोटिंग खत्म होते ही गांव की यह सब समस्याएं फिर भुला दी जाती हैं.

'जो मैंने झेला, वो भाई-बहन न झेलें'

अनमोल खुद बताते हैं कि बचपन में उन्हें भी रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ने जाना पड़ता था, और अब वह नहीं चाहते कि उनके छोटे भाई-बहन भी उसी तकलीफ से गुजरें. अनमोल की मांग है कि शहीद मनजीत सिंह के नाम वाला स्कूल दोबारा खोला जाए, गांव में नया जोहड़ बनाया जाए, बस स्टॉप बनाया जाए और जीटी रोड पर कट दिया जाए. हाल यह है कि गांव के बाहर एक बस तक नहीं रुकती. अंबाला की तरफ पढ़ाई के लिए जाने वाली गांव की बेटियों को भी दूसरे गांव के बस स्टॉप तक पैदल जाकर वहां से बस पकड़नी पड़ती है.

सवाल-जवाब

कांसापुर का बंद स्कूल किसके नाम पर बना था?
यह सरकारी प्राइमरी स्कूल शहीद मनजीत सिंह के नाम पर बना था.
यह स्कूल बंद क्यों हुआ था?
सरपंच गुरनाम सिंह के मुताबिक वर्षों पहले बच्चों की संख्या कम होने के कारण यह स्कूल बंद कर दिया गया था.
अब गांव के बच्चों को कितनी दूर पढ़ने जाना पड़ता है?
बच्चों को रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है.
गांव की दूसरी बड़ी समस्या क्या है?
गांव में सिर्फ एक ही जोहड़ होने से पानी निकासी की समस्या है, इसके अलावा जीटी रोड पर कट और बस स्टॉप न होने की भी दिक्कत है.
जीटी रोड पर कट न होने से क्या नुकसान हो रहा है?
कट न होने से लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिसकी वजह से कई सड़क हादसों में युवाओं की जान जा चुकी है.
ग्रामीण किन मांगों पर अड़े हैं?
ग्रामीण शहीद मनजीत सिंह के नाम वाले स्कूल को दोबारा खोलने, नया जोहड़ बनाने, बस स्टॉप बनाने और जीटी रोड पर कट देने की मांग कर रहे हैं.
गांव की लड़कियों को पढ़ाई के लिए क्या करना पड़ता है?
अंबाला की तरफ पढ़ाई के लिए जाने वाली लड़कियों को दूसरे गांव के बस स्टॉप तक पैदल जाकर बस पकड़नी पड़ती है.
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