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शिमला के छह साल के शिवाक्ष रापटा ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जमाई धाक, 195 देशों के झंडे और नक्शे पहचानेहिमाचल प्रदेश
15 सित॰ 2026, 8:52 am (7 दिन पहले)· 4

शिमला के छह साल के शिवाक्ष रापटा ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जमाई धाक, 195 देशों के झंडे और नक्शे पहचाने

शिमला जिले के चौपाल के रहने वाले छह साल के शिवाक्ष रापटा ने मात्र 12 मिनट और 56 सेकंड में दुनिया के 195 देशों के झंडे पहचानकर और विश्व मानचित्र पर उनकी सही स्थिति बताकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।

हिमाचल प्रदेश की वादियों से ताल्लुक रखने वाले एक छोटे बच्चे ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति के बल पर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। शिमला जिले के चौपाल उपमंडल के अंतर्गत आने वाले मडावग इलाके के रहने वाले छह वर्षीय शिवाक्ष रापटा ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय देते हुए प्रतिष्ठित इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सफलता हासिल की है। इस नन्हीं सी उम्र में उन्होंने जो कारनामा कर दिखाया है, वह बड़े-बड़े वयस्कों को भी हैरान करने वाला है। उनकी इस शानदार उपलब्धि के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर आईबीआर अचीवर के खिताब से सम्मानित किया गया है, जिससे उनके परिवार के साथ-साथ पूरे पहाड़ी अंचल में हर्ष का माहौल है।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि के तहत शिवाक्ष ने दुनिया भर के कुल 195 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों को न केवल चुटकियों में पहचाना, बल्कि उनके सटीक नाम भी जुबानी बताए। बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने एक खाली विश्व मानचित्र यानी आउटलाइन वर्ल्ड मैप पर इन सभी देशों की सटीक भौगोलिक स्थिति को भी बखूबी दर्शाया। इस पूरी कठिन प्रक्रिया को उन्होंने रिकॉर्ड समय यानी महज 12 मिनट और 56 सेकंड के भीतर पूरा करके दिखा दिया। इतनी कम आयु में वैश्विक भूगोल और राष्ट्रध्वजों की ऐसी गहरी समझ होना किसी भी बच्चे की असाधारण बौद्धिक क्षमता का स्पष्ट प्रमाण माना जाता है।

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संस्थान द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों और प्रमाण पत्र के अनुसार शिवाक्ष के इन प्रयासों और दावों की पुष्टि 24 अगस्त को कर ली गई थी। इसके उपरांत 5 सितंबर 2026 को उनके नाम से आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया गया। इस विशेष प्रमाण पत्र पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के मुख्य संपादक डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इस प्रलेखन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इस नन्हे प्रतिभागी के नाम यह अनूठा कीर्तिमान आधिकारिक रूप से दर्ज हो गया, जिसने साबित कर दिया कि लगन और रुचि होने पर उम्र की सीमाएं आड़े नहीं आती हैं।

शिवाक्ष रापटा का जन्म 31 जुलाई 2020 को हुआ था और वर्तमान समय में वह शिमला के ही एक स्थानीय निजी संस्थान में एलकेजी कक्षा के विद्यार्थी हैं। इतनी कच्ची उम्र में वैश्विक स्तर के 195 देशों के झंडों और नक्शों से जुड़ी बारीकियों को अपने जहन में बैठाना उनकी तीव्र बुद्धि को दर्शाता है। उनके इस कारनामे से उनके स्कूल के शिक्षक भी बेहद उत्साहित हैं और उनके सहपाठियों में भी उनके प्रति एक अलग ही प्रेरणा का भाव पैदा हुआ है।

इस पृष्ठभूमि की बात करें तो शिवाक्ष का परिवार पूरी तरह से ग्रामीण और बागवानी से जुड़ा हुआ है। उनके पिता राजेश रापटा एक सेब बागवान के रूप में अपनी आजीविका चलाते हैं, जबकि उनकी माता किरण रापटा एक गृहणी हैं। एक साधारण ग्रामीण और बागवान परिवार में जन्म लेने के बावजूद इस छोटे से बच्चे ने अपनी काबलियत के दम पर वैश्विक पटल पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है। परिवारजनों का कहना है कि शिवाक्ष को बहुत ही कम उम्र से अलग-अलग देशों के बारे में जानने, उनके झंडों को देखने और विश्व मानचित्र को टटोलने में गहरी दिलचस्पी थी।

बच्चों की यह जिज्ञासा धीरे-धीरे उनके दैनिक अभ्यास का हिस्सा बनती चली गई और उनकी याददाश्त को और अधिक मजबूत करती गई। परिजनों के प्रोत्साहन और उनकी खुद की लगन ने इस शौक को एक पक्के लक्ष्य में बदल दिया, जिसके बाद उन्होंने इस रिकॉर्ड को हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया। पहाड़ी इलाकों में सीमित संसाधनों के बीच इस तरह की उपलब्धि हासिल करना यह साबित करता है कि यदि बच्चों की रुचि को सही दिशा मिल जाए, तो वे किसी भी मुकाम को छू सकते हैं।

सवाल-जवाब

शिवाक्ष रापटा की आयु कितनी है?
शिवाक्ष रापटा की आयु छह वर्ष है और उनका जन्म 31 जुलाई 2020 को हुआ था।
उन्होंने कौन सा रिकॉर्ड अपने नाम किया है?
उन्होंने 195 देशों के झंडे पहचानकर और नक्शे पर उनकी स्थिति बताकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।
यह चुनौती पूरी करने में उन्हें कितना समय लगा?
शिवाक्ष ने इस पूरी चुनौती को महज 12 मिनट और 56 सेकंड में पूरा किया।
शिवाक्ष वर्तमान में किस कक्षा में पढ़ते हैं?
वह शिमला के एक निजी स्कूल में एलकेजी के छात्र हैं।
उनके माता-पिता क्या करते हैं?
उनके पिता राजेश रापटा सेब बागवान हैं और उनकी माता किरण रापटा एक गृहणी हैं।
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