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शिमला में फोरलेन टनल की खुदाई से दरके मकान, निर्माण पर रोक के बाद न्यायिक जाँच की माँगहिमाचल प्रदेश
23 सित॰ 2026, 8:44 am (44 दिन पहले)· 2

शिमला में फोरलेन टनल की खुदाई से दरके मकान, निर्माण पर रोक के बाद न्यायिक जाँच की माँग

शिमला के कई रिहायशी क्षेत्रों में फोरलेन टनल की वजह से भवनों में गंभीर दरारें आ गई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने काम रोकते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जाँच कराने का फैसला लिया है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पहाड़ों के सीने को चीरकर बनाई जा रही भूमिगत सड़क परियोजना स्थानीय निवासियों के आशियानों के लिए बड़ा संकट बनकर उभरी है। संजौली, ढली तथा भट्टाकुफर समेत आसपास के रिहायशी इलाकों में फोरलेन टनल की खुदाई के चलते बहुमंजिला इमारतों की दीवारों और नींव में गहरी दरारें उभर आई हैं। कई ढांचों के जमींदोज होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में काम रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

रिहायशी बस्तियों में दरारें और असुरक्षित होते आशियाने

पहाड़ी ढलानों पर बसे संजौली के समिट्री, भट्टाकुफर और ढली इलाकों में जमीन के भीतर लगातार हो रहे निर्माण कार्य का बुरा असर सतह पर दिखने लगा है। करीब 13 से 14 भवनों में ऐसी दरारें आई हैं जिनसे पूरा ढांचा डगमगाने लगा है। कई आवासीय परिसरों की स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि वहां रहना जानलेवा साबित हो सकता है। स्थिति की नाजुकता को भांपते हुए संजौली स्थित हेलीपोर्ट क्षेत्र के 4 घरों को पहले ही खाली करवा लिया गया है, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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स्थानीय शांति विहार वार्ड के निवासियों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरा रोष प्रकट किया है। वर्षों की खून-पसीने की कमाई से तैयार घरों के कमजोर पड़ने के बाद लोग रात के समय अनहोनी की आशंका में जागने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि आधुनिक निर्माण के नाम पर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है, जिससे उनकी पीढ़ियों की संपत्ति बर्बाद होने की कगार पर पहुँच गई है।

एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर बरसे कैबिनेट मंत्री

इस संकट के सामने आने के बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और उसके अधीन जुटी ठेकेदार कंपनियों के कामकाज पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने परियोजना में इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री और कार्यपद्धति के मानकों पर गंभीर आपत्ति जताई। मंत्री ने खुले शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एजेंसी ने जनसुरक्षा की अनदेखी बंद नहीं की, तो राज्य सरकार इस मसले को न्यायपालिका के समक्ष ले जाने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेगी।

कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने निर्माण गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "एनएचएआई पूरी तरह से सब-स्टेंडर्ड कार्य कर रही है, जिसके चलते संजौली, समिट्री भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के कुछ अधिकारी केवल अपने निजी लाभ में लगे हैं और उन्हें आम नागरिकों के जीवन की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि निर्माण कार्य के दौरान पहले भी एक भवन गिर चुका है, फिर भी जरूरी सबक नहीं सीखे गए।

प्रशासन का कड़ा रुख, निर्माण अनुमति निरस्त

हालात का जायजा लेने के लिए शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप स्वयं प्रभावित इलाकों में पहुंचे। जमीनी स्तर पर इमारतों को पहुंचे नुकसान का मुआयना करने के उपरांत जिला प्रशासन ने निर्माण के लिए पूर्व में जारी की गई अनुमति को तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया। मौके पर फोरलेन टनल से जुड़े सभी कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है, ताकि मकानों में कंपन के कारण दरारें और अधिक चौड़ी न हों।

प्रशासन की इस पाबंदी के बाद अब पूरी परियोजना की तकनीकी व स्वतंत्र पड़ताल कराने की योजना बनाई जा रही है। अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे इस संवेदनशील विषय पर राज्य के मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। उनका प्रस्ताव है कि जांच के लिए गठित होने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति में पर्यावरणविद, भूवैज्ञानिक और संबंधित विभागों के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए जाएं। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंत्री ने आग्रह किया है कि समिति की कमान किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश अथवा न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके।

मुआवजे और वैज्ञानिक मूल्यांकन की उठी मांग

प्रभावित शांति विहार वार्ड के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री से भेंट कर अपनी पीड़ा साझा की। इस शिष्टमंडल में पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर तथा पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान शामिल रहे। स्थानीय प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने मांग रखी है कि संकटग्रस्त भवनों का विधिवत अधिग्रहण किया जाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

प्रभावितों का एक दल जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष पेश होकर अपनी आपबीती सुनाएगा। नागरिकों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि जब तक स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं भूगर्भीय विशेषज्ञ पूरी सुरक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करते, तब तक किसी भी तरह के भारी उत्खनन कार्य को आगे न बढ़ाया जाए। इसके साथ ही भविष्य में भूस्खलन अथवा धंसाव से बचाव के पुख्ता उपाय लागू करने की बात भी उठाई गई है।

सवाल-जवाब

शिमला में किन इलाकों के मकानों में दरारें आई हैं?
शिमला के संजौली, समिट्री, भट्टाकुफर, ढली और शांति विहार क्षेत्र के करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी दरारें आई हैं।
प्रशासन ने इस मामले में क्या त्वरित कार्रवाई की है?
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने निर्माण की अनुमति वापस लेते हुए फोरलेन टनल के काम को तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं।
संजौली में कितने मकान खाली करवाए गए हैं?
खतरे को देखते हुए संजौली के हेलीपोर्ट क्षेत्र में स्थित 4 घरों को खाली करवाया जा चुका है।
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने एनएचएआई पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने एनएचएआई पर सब-स्टैंडर्ड काम करने, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने और अफसरों द्वारा पैसे बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जांच समिति के गठन को लेकर क्या सुझाव दिया गया है?
मंत्री ने भूवैज्ञानिकों व पर्यावरणविदों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने और उसकी अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का सुझाव दिया है।
प्रभावित क्षेत्र के लोगों की मुख्य मांगें क्या हैं?
स्थानीय लोग वैज्ञानिक नुकसान आकलन, क्षतिग्रस्त संपत्तियों के अधिग्रहण, उचित मुआवजे और विशेषज्ञों की हरी झंडी तक काम बंद रखने की मांग कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·44 दिन पहले

पहाड़ काटकर टनल बनाना और घरों का इस तरह दरकना डरावना है। लोगों की गाढ़ी कमाई यूं खतरे में पड़ते देख बहुत बुरा लगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·44 दिन पहले

सिर्फ चार घर खाली करवाए हैं, जबकि चौदह इमारतों में दरारें आ चुकी हैं। बाकी लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे?

Ravikash Gupta@ravikash·44 दिन पहले

अर्जुन जी, बात सही है आपकी, पर शायद प्रशासन बाकी इमारतों को तुरंत खाली न करवाने की कोई तकनीकी वजह देख रहा होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 दिन पहले

सिर्फ ठेकेदार को दोष देना ठीक नहीं है, पहाड़ों की मिट्टी ही ऐसी है कि खुदाई में रिस्क रहता ही है।

Rohan Verma@rohan-verma·44 दिन पहले

करण भाई, मिट्टी का बहाना देकर आप लोगों की जान से खिलवाड़ को सही नहीं ठहरा सकते। हमारे यूपी में भी एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान मनमानी पर इंजीनियरों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाती है, यहाँ क्यों नहीं?

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