राजस्थान की राजधानी जयपुर में पेट्रोल पंप कर्मियों को चकमा देकर बिना भुगतान किए भागने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बिंदायका थाना पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने एक संयुक्त अभियान के तहत दो युवकों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अंकित वर्मा और विशाल मेहरा के रूप में हुई है। प्राथमिक पड़ताल के मुताबिक, इन दोनों ने राजधानी के अलग-अलग इलाकों में स्थित 20 से भी ज्यादा पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने के बाद बिना पैसे चुकाए गाड़ी भगाने की वारदातों को अंजाम दिया था। अब पुलिस दोनों से कड़ाई से पूछताछ कर अन्य मामलों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
फर्जी नंबर प्लेट लगाकर पुलिस को देते थे चकमा
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वे किसी भी फ्यूल स्टेशन पर पहुंचते, अपनी गाड़ी की टंकी में ईंधन भरवाते और जैसे ही कर्मचारी पैसे मांगने आता, वे अचानक गाड़ी की रफ्तार बढ़ाकर मौके से रफूचक्कर हो जाते थे। शहर के मामा पेट्रोल पंप और ढाका फिलिंग स्टेशन सहित दर्जनों प्रतिष्ठानों पर ऐसी धोखाधड़ी की गई थी। इस तरह की हरकतों की वजह से पेट्रोल पंप संचालकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि कई बार यह घाटा कर्मचारियों की जेब पर पड़ता था।
पुलिस तफ्तीश में यह सनसनीखेज तथ्य भी सामने आया कि आरोपी वारदात को अंजाम देने के लिए अपने वाहनों पर चोरी की नंबर प्लेट लगा लेते थे। फर्जी और चोरी की नंबर प्लेटों की वजह से सीसीटीवी कैमरों में फुटेज आने के बावजूद उनकी वास्तविक पहचान कर पाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। हालांकि, साइबर सेल, तकनीकी साक्ष्यों और धरातलीय सूचनाओं के सटीक विश्लेषण के बाद पुलिस आखिरकार आरोपियों के ठिकाने तक पहुंचने में कामयाब रही।
शहर के कई इलाकों में फैला रखा था नेटवर्क
इन दोनों युवकों ने शहर के किसी एक कोने तक खुद को सीमित नहीं रखा था, बल्कि कई थाना क्षेत्रों में सिलसिलेवार तरीके से वारदातें की थीं। जानकारी के अनुसार, मानसरोवर, सोडाला, सीकर रोड और वैशाली नगर के अलावा बिंदायका, हरमाड़ा तथा करणी विहार क्षेत्र में स्थित पेट्रोल पंपों को इन्होंने अपना निशाना बनाया था। राजधानी के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर स्थित 20 से अधिक पंपों पर लगातार हो रही इन घटनाओं से पेट्रोल पंप एसोसिएशन और कर्मचारियों में दहशत का माहौल बन गया था।
मौज-मस्ती और सैर-सपाटे के लिए रची साजिश
शुरुआती पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे केवल घूमने-फिरने और मौज-मस्ती करने के शौक को पूरा करने के लिए पेट्रोल पंपों पर इस तरह की ठगी करते थे। वे बिना कोई खर्च किए लंबी दूरी तय करना चाहते थे, जिसके चलते उन्होंने यह गैरकानूनी रास्ता चुना। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इन वारदातों में कुल कितने दोपहिया या चौपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया गया था और आरोपी वाहनों पर लगाने के लिए चोरी की नंबर प्लेटें कहां से लाते थे।
डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण (आईपीएस) ने प्रकरण की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि बिंदायका थाना पुलिस और डीएसटी की संयुक्त टीम की त्वरित कार्रवाई से यह सफलता मिली है। पुलिस को पूरी संभावना है कि रिमांड के दौरान गहन पूछताछ से शहर और आसपास के इलाकों में हुई ऐसी अन्य कई अनसुलझी वारदातों का पर्दाफाश होगा तथा चोरी की नंबर प्लेट सप्लाई करने वाले नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया जा सकेगा।

















