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श्रीगंगानगर के कृषि कॉलेज में नई शुरुआत, मशरूम और फूड प्रोसेसिंग से छात्र बनेंगे उद्यमीराजस्थान
1 सित॰ 2026, 12:06 pm (24 दिन पहले)· 3

श्रीगंगानगर के कृषि कॉलेज में नई शुरुआत, मशरूम और फूड प्रोसेसिंग से छात्र बनेंगे उद्यमी

श्रीगंगानगर के कृषि महाविद्यालय में दो नई एक्सपीरियंस लर्निंग यूनिट शुरू की गई हैं, जिनसे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।

कृषि क्षेत्र में शिक्षा को सीधे स्वरोजगार और व्यावसायिक दक्षता से जोड़ने की कवायद के तहत श्रीगंगानगर स्थित कृषि महाविद्यालय में दो अत्याधुनिक एक्सपीरियंस लर्निंग यूनिट स्थापित की गई हैं। इन नई इकाइयों में फूड प्रोसेसिंग और मशरूम कल्टीवेशन टेक्नोलॉजी यूनिट शामिल हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक उत्पादन और उद्यमिता का व्यावहारिक अनुभव कराना है।

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने इन दोनों नवस्थापित यूनिटों का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कॉलेज परिसर का दौरा कर प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया तथा संकाय सदस्यों से विस्तृत चर्चा की।

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खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का व्यावहारिक प्रशिक्षण

फूड प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से छात्र कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, संरक्षण, पैकेजिंग और विपणन की बारीकियाँ सीखेंगे। इस केंद्र में फल, सब्जियों और अनाजों से विभिन्न प्रकार की प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। इससे छात्रों को कृषि उपज को अधिक समय तक सुरक्षित रखने और बाजार में बेहतर दाम हासिल करने के तरीके समझने में मदद मिलेगी।

कम लागत में मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक

मशरूम कल्टीवेशन टेक्नोलॉजी यूनिट के जरिए विद्यार्थियों को मशरूम की तमाम किस्मों के वैज्ञानिक उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें खाद तैयार करने की विधि, बीज प्रबंधन, तापमान और नमी का नियंत्रण, रोग रोकथाम, कटाई से लेकर पैकेजिंग और मार्केटिंग तक के गुर सिखाए जाएंगे। चूंकि मशरूम की खेती कम जगह और सीमित पूंजी में शुरू की जा सकती है, इसलिए यह युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम साबित हो सकती है।

युवाओं को स्टार्टअप और रोजगार के लिए तैयार करना

इन व्यावहारिक इकाइयों को शुरू करने का मूल मकसद छात्रों को नौकरी खोजने वाले के बजाय नौकरी देने वाला यानी उद्यमी बनाना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये युवा खुद का मशरूम उत्पादन केंद्र या फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में नए स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा। कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज की जरूरत के हिसाब से छात्रों को बदलती तकनीक और बाजार की मांगों के अनुरूप तैयार किया जाना बहुत जरूरी है।

छात्रों से संवाद और प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

दौरे के दौरान कुलगुरु ने कृषि स्नातक तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और उन्हें नवाचार की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कॉलेज के पूर्व छात्रों की शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलताओं की भी जानकारी ली। इस उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस आचार्य, महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. बीएस मीणा, संकाय सदस्य डॉ. रूप सिंह मीणा, अतिथि व्याख्याता डॉ. कोमल और राम वर्मा सहित कई छात्र मौजूद रहे।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर के कृषि कॉलेज में कौन सी दो नई यूनिट्स शुरू हुई हैं?
महाविद्यालय में फूड प्रोसेसिंग और मशरूम कल्टीवेशन टेक्नोलॉजी यूनिट शुरू की गई हैं।
इन नई यूनिट्स का उद्घाटन किसने किया?
इनका उद्घाटन स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने किया।
मशरूम कल्टीवेशन यूनिट से छात्रों को क्या सिखाया जाएगा?
इसमें मशरूम की विभिन्न किस्मों के वैज्ञानिक उत्पादन, खाद तैयार करने, बीज प्रबंधन और पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
फूड प्रोसेसिंग यूनिट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
छात्रों को कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, संरक्षण और पैकेजिंग की व्यावहारिक जानकारी देना है।
इस पहल से विद्यार्थियों को क्या फायदा होगा?
छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी तलाशने के साथ अपनी खुद की फूड प्रोसेसिंग या मशरूम यूनिट शुरू कर सकेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

श्रीगंगानगर के कृषि महाविद्यालय में फूड प्रोसेसिंग और मशरूम कल्टीवेशन जैसी एक्सपीरियंस लर्निंग यूनिट्स का शुरू होना कृषि शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। केवल किताबी ज्ञान की बजाय छात्रों को मूल्य संवर्धन और कम लागत वाले स्टार्टअप्स का प्रशिक्षण देना ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। आने वाले समय में ऐसी पहलों का प्रभाव तब और अधिक दिखेगा जब ये छात्र स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म उद्यम स्थापित कर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह की व्यावहारिक इकाइयां केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह कृषि से जुड़े कानूनी और सुरक्षात्मक पहलुओं पर भी सीधा असर डालती हैं। जब युवा फूड प्रोसेसिंग और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में छोटे उद्यम या स्टार्टअप शुरू करेंगे, तो खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग नियमों और बाजार में विधिक अनुपालन की समझ बेहद जरूरी हो जाएगी। इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण से छात्र न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, बल्कि वे स्थानीय स्तर पर एक सुव्यवस्थित और वैध व्यावसायिक तंत्र स्थापित करने के लिए भी तैयार होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक सुरक्षित और पेशेवर दिशा मिलेगी।

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