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सीकर में सेना का अनूठा क्रेज, मैदानों में बहा रहे पसीना और 52 हजार से अधिक परिवारों की फौज से जुड़ी है पहचानराजस्थान
15 सित॰ 2026, 8:33 pm (9 दिन पहले)· 1

सीकर में सेना का अनूठा क्रेज, मैदानों में बहा रहे पसीना और 52 हजार से अधिक परिवारों की फौज से जुड़ी है पहचान

राजस्थान के सीकर जिले में सेना के प्रति युवाओं का गजब का जुनून देखने को मिलता है। यहां के 52 हजार से ज्यादा परिवार सीधे तौर पर सैन्य सेवा से जुड़े हुए हैं और गांवों से लेकर कस्बों तक हर सुबह हजारों युवा ग्राउंड पर पसीना बहाते नजर आते हैं।

राजस्थान का सीकर जिला देश की रक्षा में अपने असीम योगदान और अनूठी परंपरा के लिए पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है। यहां के गांवों और ढाणियों में भारतीय सेना में जाने का जज्बा पीढ़ियों से चला आ रहा है और यह वहां के जनजीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, सीकर जिले के 16 हजार से अधिक जवान इस समय भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।

पूर्व सैनिकों की भूमिका और मार्गदर्शन

सीकर जिले में केवल सेवारत जवान ही नहीं हैं, बल्कि यहां 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिक भी निवास करते हैं। ये रिटायर्ड सैनिक और अधिकारी नई पीढ़ी के युवाओं के लिए मार्गदर्शक और ट्रेनर की भूमिका पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। जिले के कई गांवों में ये पूर्व सैनिक युवाओं को शारीरिक परीक्षा और सेना भर्ती की लिखित व शारीरिक तैयारी बिल्कुल निशुल्क करवाते हैं। इस मिले-जुले प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में फौज में जाने की तैयारी का माहौल दिन-प्रतिदिन और अधिक मजबूत होता जा रहा है।

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युवाओं का पसीना और तैयार हुए खेल मैदान

जिले में सेना में भर्ती होने की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के गांव-कस्बों में अब तक 500 से ज्यादा प्रैक्टिस ग्राउंड तैयार हो चुके हैं। सुबह सूरज निकलने से पहले ही इन मैदानों पर हजारों युवाओं की दौड़ शुरू हो जाती है। कोई युवा अपनी रनिंग का अभ्यास करता नजर आता है, तो कोई लंबी कूद, पुशअप्स और अन्य शारीरिक दक्षता के मानकों को साधने में पूरी मेहनत से जुटा रहता है।

शहरों से लेकर गांवों तक एक जैसी दीवानगी

इस तैयारी की सबसे खास बात यह है कि इन मैदानों पर पसीना बहाने वाले युवाओं में सिर्फ शहरी इलाकों के लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों और ढाणियों से आने वाले युवा भी भारी संख्या में शामिल हैं। कई जगहों पर तो स्थानीय स्तर पर युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर अपनी मेहनत से अभ्यास के लिए ट्रैक और खेल मैदान विकसित कर लिए हैं। पूर्व सैनिकों के अमूल्य अनुभव और आज की युवा पीढ़ी की कठिन मेहनत का यह अनूठा मेल सीकर में सेना भर्ती की एक बेहद मजबूत संस्कृति को आकार दे रहा है।

अग्निवीर योजना के बाद भी नहीं डिगा हौसला

केंद्र सरकार द्वारा अग्निवीर योजना लागू किए जाने के बाद भी सीकर के युवाओं के उत्साह और जोश में कोई कमी नहीं आई है। इस नई व्यवस्था के आने के बाद भी जिले के करीब 4 हजार अग्निवीर थलसेना, वायुसेना और नौसेना में चयनित होकर अपनी ट्रेनिंग और देश सेवा पूरी मुस्तैदी से कर रहे हैं। स्थानीय पूर्व सैनिकों का कहना है कि अग्निवीर भर्ती रैलियों के दौरान सीकर के युवाओं की भागीदारी लंबे समय से पूरे प्रदेशभर में सबसे बेहतरीन और आगे रही है।

सामाजिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

सीकर में सेना से जुड़े लोगों की संख्या महज एक कागजी आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर जिले के सामाजिक ताने-बाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देता है। सेवारत जवानों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीर युवाओं को मिला दिया जाए, तो सीकर जिले से जुड़ा कुल सैन्य समुदाय 52 हजार से अधिक लोगों का बनता है। इन सभी परिवारों का बच्चों की शिक्षा, आधुनिक आवास, स्थानीय बाजार और तमाम व्यावसायिक सेवाओं में आर्थिक योगदान बेहद महत्वपूर्ण और रीढ़ की हड्डी जैसा है।

सवाल-जवाब

सीकर जिले के कितने जवान वर्तमान में भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं?
सीकर जिले के 16 हजार से अधिक जवान थलसेना, वायुसेना और नौसेना में अलग-अलग पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं।
सीकर में कितने पूर्व सैनिक निवास करते हैं?
सीकर जिले में 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिक रहते हैं जो युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।
सीकर जिले में अभ्यास के लिए कितने ग्राउंड तैयार हो चुके हैं?
जिले के गांव और कस्बों में युवाओं के अभ्यास के लिए 500 से ज्यादा ग्राउंड तैयार किए जा चुके हैं।
अग्निवीर योजना के बाद सीकर से कितने युवाओं का चयन हुआ है?
अग्निवीर योजना आने के बाद सीकर के करीब 4 हजार युवा थलसेना, वायुसेना और नौसेना में चयनित होकर अपनी सेवा दे रहे हैं।
सीकर जिले से कुल कितने सैन्य परिवार या लोग जुड़े हुए हैं?
सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीर युवाओं को मिलाकर सीकर से जुड़े सैन्य परिवारों की कुल संख्या 52 हजार से अधिक है।
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टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·9 दिन पहले

सीकर की यह जीवनशैली केवल रक्षा सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुदृढ़ सामाजिक ताने-बाने और सामूहिक अनुशासन का जीवंत उदाहरण है। यहां पूर्व सैनिकों द्वारा नई पीढ़ी को निशुल्क प्रशिक्षण देना और सामुदायिक स्तर पर खेल मैदानों का विकास करना इस बात का प्रमाण है कि संस्कृति और वेलनेस किस प्रकार एक क्षेत्र के व्यक्तित्व विकास और आजीविका का आधार बन सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

सीकर का यह सैन्य मॉडल केवल सामाजिक गौरव का प्रतीक नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक मजबूत स्तंभ है। पूर्व सैनिकों की फौज और हजारों युवाओं द्वारा खुद तैयार किए गए 500 से अधिक मैदान यह साबित करते हैं कि यह क्षेत्र बिना बड़े कॉरपोरेट निवेश के भी एक टिकाऊ 'ह्यूमन कैपिटल' मॉडल विकसित कर चुका है। आने वाले समय में, यह मजबूत मानव पूंजी न केवल रक्षा क्षेत्र में बल्कि स्थानीय आर्थिकी और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

सीकर का यह मॉडल इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे基层 स्तर पर मजबूत अनुशासन और पूर्व सैनिकों का मार्गदर्शन किसी जिले की दिशा तय कर सकता है। जब 16 हजार से अधिक सेवारत और 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिक एक ही भू-भाग पर हों, तो यह केवल राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे को सुदृढ़ करने का अचूक माध्यम बन जाता है। इस तरह की मानव पूंजी से ग्रामीण क्षेत्रों में जो कार्य संस्कृति विकसित होती है, वह प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर अनुकरणीय है, जिससे स्थानीय युवा बिना किसी अतिरिक्त शासकीय दबाव के राष्ट्र निर्माण की धुरी बन जाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

सीकर में पूर्व सैनिकों द्वारा युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण देना और 500 से अधिक अभ्यास मैदानों का विकसित होना एक मजबूत अनुशासित संस्कृति को दर्शाता है। अग्निवीर योजना के बाद भी चार हजार युवाओं का इस सेवा से जुड़ना यह साबित करता है कि यहां देशभक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि एक संगठित सामाजिक और व्यावहारिक परंपरा है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

सीकर की यह सैन्य संस्कृति केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक गतिशीलता का एक स्थायी स्तंभ बन चुकी है। 32 हजार से अधिक पूर्व सैनिकों की मौजूदगी और 500 से अधिक अनौपचारिक प्रशिक्षण मैदानों का यह अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र यह स्पष्ट करता है कि राज्य के भीतरी इलाकों में राष्ट्र सेवा किस प्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनुशासित और आत्मनिर्भर सामाजिक ताने-बाने का रूप ले चुकी है।

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