देशभर में गणेश चतुर्थी और गणेश महोत्सव के उल्लास के बीच राजस्थान के उदयपुर शहर में बप्पा का एक बेहद अलौकिक और भव्य रूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शहर की पुरानी मंडी स्थित प्रसिद्ध पंडाल में विराजे मन्नत वाले राजा के दरबार को इस वर्ष लगभग 2 करोड़ 51 लाख रुपए के असली करेंसी नोटों से भव्यता के साथ सजाया गया है। भगवान गणेश की प्रतिमा के मुकुट, माला और पृष्ठभूमि की झांकी तक नोटों की खूबसूरत कारीगरी से तैयार की गई है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालुओं का भारी तांता लग रहा है।
कारीगरी की मिसाल बना नोटों का दरबार
पुरानी मंडी के इस पारंपरिक पंडाल में हर साल गणेश उत्सव के दौरान कुछ अनूठा और विशिष्ट करने की परंपरा रही है। इस बार आयोजकों ने पूरे दरबार को नोटों के अनोखे शृंगार से दिव्य रूप देने की योजना बनाई थी। भगवान गणेश की मुख्य प्रतिमा के आसपास का समूचा परिवेश, उनका विशाल मुकुट, गले की माला और पीछे की विस्तृत झांकी पूरी तरह भारतीय मुद्रा के नोटों से कलात्मक रूप से तैयार की गई है। दूर से देखने पर पूरा दरबार नोटों की चादर में लिपटा हुआ और जगमगाता नजर आता है, जिसने हर आने वाले श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
बंगाल के हुनरमंद कारीगरों ने रची यह कलाकृति
इस अनूठी सजावट को साकार करने के लिए विशेष रूप से बंगाल से कुशल कारीगरों को उदयपुर बुलाया गया था। कारीगरों ने कई दिनों तक लगातार बारीकी से मेहनत करते हुए नोटों को बिना किसी नुकसान के इस तरह व्यवस्थित किया कि पूरी झांकी एक भव्य कलात्मक स्वरूप में तब्दील हो गई। नोटों की परतों, मोड़ों और संयोजन से निर्मित इस शृंगार की जानकारी जैसे-जैसे शहर और आसपास के इलाकों में फैली, वैसे-वैसे पंडाल में दर्शनार्थियों की कतारें लंबी होती गईं। लोग न केवल श्रद्धापूर्वक शीश नवा रहे हैं, बल्कि इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी सहेज रहे हैं।
पिछले साल के मुकाबले एक करोड़ रुपये अधिक की सजावट
आयोजन से जुड़े विवरण के अनुसार, पुरानी मंडी में स्थापित मन्नत वाले राजा के शृंगार का स्तर हर साल बढ़ाया जाता रहा है। बीते वर्ष भगवान गणेश का शृंगार करीब 1 करोड़ 51 लाख रुपए के नोटों से किया गया था। इस साल श्रद्धालुओं के उत्साह और आयोजन की भव्यता को विस्तार देते हुए यह राशि सीधे 2 करोड़ 51 लाख रुपए तक पहुंचा दी गई। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1 करोड़ रुपए अधिक मूल्य के नोटों का उपयोग इस बार किया गया है, जिसने इस पंडाल को वर्तमान उत्सव के दौरान उदयपुर का सबसे चर्चित धार्मिक स्थल बना दिया है।



















