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सीकर: शेखावाटी की संस्कृति और भाषा को मिलेगा बढ़ावा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में खुलेगा नया केंद्रराजस्थान
18 सित॰ 2026, 11:29 am (7 दिन पहले)· 1

सीकर: शेखावाटी की संस्कृति और भाषा को मिलेगा बढ़ावा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में खुलेगा नया केंद्र

शेखावाटी विश्वविद्यालय में जल्द ही राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र की स्थापना की जाएगी। इस कदम से स्थानीय संस्कृति, साहित्य और ऐतिहासिक विरासत पर शोध कार्यों को एक नया मंच मिलेगा।

राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और लोक संस्कृति को अकादमिक स्तर पर स्थापित करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। इस दिशा में संस्थान के भीतर जल्द ही राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र की स्थापना की जाएगी। इस योजना का प्रस्ताव आगामी बैठकों में एकेडमिक काउंसिल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहाँ से हरी झंडी मिलते ही इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।

शोध और अध्ययन को मिलेगा नया मंच

इस नए केंद्र के अस्तित्व में आने से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को राजस्थानी भाषा, साहित्य, पारंपरिक लोकगीतों और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े विषयों पर गहराई से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। शेखावाटी क्षेत्र अपनी प्राचीन हवेलियों, अनूठी बोलियों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। इस प्रकार के अकादमिक मंच के माध्यम से इन तमाम क्षेत्रीय विशेषताओं को दस्तावेजी रूप में सहेजने और संरक्षित करने में बहुत मदद मिलेगी।

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भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव

विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र का संचालन किया जा रहा है। अब राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र के खुलने से स्थानीय ज्ञान और लोक साहित्य को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा। दोनों केंद्र मिलकर पारंपरिक ज्ञान, लोक कला और सांस्कृतिक सामग्रियों के दस्तावेजीकरण और संरक्षण की दिशा में मिलकर काम करेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अकादमिक लाभ मिल सके।

राजभवन के निर्देशों का पालन

उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा और शोध कार्यों में राजस्थानी भाषा को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश के कुल 11 प्रमुख विश्वविद्यालयों में इस तरह के केंद्र खोले जाने का प्रावधान है। राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े की विशेष पहल और निर्देशों के बाद राजभवन सचिवालय ने सभी संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

भाषा और संस्कृति का गहरा नाता

राजस्थानी भाषा केवल आपसी संवाद का जरिया भर नहीं है, बल्कि इसके साथ इस आंचल की लोक कथाएं, लोक परंपराएं, रीति-रिवाज और पीढ़ियों पुरानी स्मृतियां भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर इन विषयों की पढ़ाई शुरू होने से छात्र इन सभी पहलुओं को क्रमबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से समझ सकेंगे। रामसिंह सरावग (उपकुलसचिव, शेखावाटी विश्वविद्यालय) ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र की स्थापना की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे अकादमिक जगत में स्थानीय संस्कृति को उचित स्थान मिलेगा।

सवाल-जवाब

शेखावाटी विश्वविद्यालय में कौन सा नया केंद्र खोला जा रहा है?
विश्वविद्यालय में जल्द ही राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र की स्थापना की जाएगी।
इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य राजस्थानी भाषा, साहित्य, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े विषयों पर शोध को बढ़ावा देना है।
प्रदेश के कितने विश्वविद्यालयों में यह केंद्र खोले जाने हैं?
राजस्थान के 11 प्रमुख विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाने का प्रावधान है।
इस पहल के पीछे किसका निर्देश मुख्य है?
कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े के निर्देश के बाद राजभवन सचिवालय ने विश्वविद्यालयों को यह पत्र जारी किया है।
विश्वविद्यालय में पहले से कौन सा केंद्र कार्यरत है?
विश्वविद्यालय में पहले से ही भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र संचालित किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

राजभवन के निर्देशों के तहत राज्य के 11 विश्वविद्यालयों में क्षेत्रीय भाषा केंद्रों की स्थापना केवल सांस्कृतिक संरक्षण का प्रयास नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अस्मिता को लोक नीति और उच्च शिक्षा के ढांचे में संस्थागत करने की एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल है। शेखावाटी विश्वविद्यालय में एकेडमिक काउंसिल की मंजूरी के बाद असली चुनौती इस केंद्र के लिए बजटीय संसाधन, स्थायी फैकल्टी और प्रामाणिक पाठ्यक्रम सुनिश्चित करने की होगी। शासन के स्तर पर ऐसे भाषाई केंद्रों का सफल संचालन ही यह तय करेगा कि राजस्थानी भाषा को अकादमिक और प्रशासनिक मुख्यधारा में कितना स्थायी स्थान मिल पाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

राजभवन के निर्देशों के तहत ग्यारह विश्वविद्यालयों में इस तरह के केंद्र खोलने का यह कदम अकादमिक स्तर पर क्षेत्रीय संस्कृति और भाषा के संरक्षण की दिशा में एक अहम प्रशासनिक पहल है। आने वाले समय में जब यह प्रस्ताव एकेडमिक काउंसिल से पारित होकर धरातल पर उतरेगा, तो इससे न केवल स्थानीय बोलियों, लोकगीतों और पारंपरिक ज्ञान का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण हो सकेगा, बल्कि शोधार्थियों को भी एक औपचारिक मंच मिलेगा। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे बजट और संसाधन आवंटन में कितनी प्राथमिकता मिलती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

एक क्राइम और कानूनी मामलों के संवाददाता के तौर पर मेरा मानना है कि राजभवन के निर्देशों और प्रशासनिक आदेशों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए केवल अकादमिक मंजूरी ही काफी नहीं होती, बल्कि इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है। जब तक इन केंद्रों के लिए वैधानिक प्रावधानों के तहत स्पष्ट वित्तीय और प्रशासनिक गाइडलाइंस जारी नहीं होतीं, तब तक ऐसे प्रस्तावों के कागजी अमलीजामा पहनाने में प्रशासनिक सुस्ती का खतरा बना रहता है।

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