हरियाणा के सिरसा जिले के एक ग्रामीण इलाके में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है, जहां दूषित पानी की सप्लाई के कारण हेपेटाइटिस-ए यानी पीलिया के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। देसूजोधा गांव के भीतर पिछले कुछ दिनों से लोग लगातार इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों के बड़े चिकित्सा संस्थानों में भेजना पड़ा है। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति के लिए प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं और शुद्ध पेयजल की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया है।
गंभीर हालत में एम्स और लुधियाना रेफर
बीमारी की चपेट में आने वालों में दो युवतियों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें तुरंत उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किया गया। इनमें से एक मलकीत सिंह की 21 वर्षीय बेटी प्रभजोत हैं, जिन्हें एम्स बठिंडा में भर्ती कराया गया है। वहीं दूसरी मरीज कुलदीप सिंह की 18 वर्षीय बेटी प्रीत कौर हैं, जिन्हें इलाज के लिए दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लुधियाना ले जाया गया है। इसके अलावा जसमीत कौर, हरप्रीत कौर, गोपी, मनप्रीत कौर, राजकरण और गुरनूर समेत कई अन्य ग्रामीण भी सिरसा, डबवाली, बठिंडा, लुधियाना और रामा मंडी के अलग-अलग अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं।
दूषित पेयजल और पाइपलाइन का रिसाव
गांव के सरपंच चरनजीत सिंह और अन्य निवासियों का कहना है कि यह पूरा संकट पेयजल की नई पाइपलाइन बिछाए जाने के दौरान हुई लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों के अनुसार, नई लाइन में लीकेज होने के कारण घरों तक पहुंचने वाले पानी में दूषित पदार्थ मिल गए। बीते एक हफ्ते के दौरान यह समस्या धीरे-धीरे विकराल होती गई और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। जब स्वास्थ्य जांच कराई गई तो पता चला कि यह संक्रमण हेपेटाइटिस-ए का रूप ले चुका है। स्वच्छ पानी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार रोष भी प्रकट किया।
स्वास्थ्य विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और पिछले पांच दिनों के भीतर गांव में कुल 540 लोगों के सैंपल एकत्र किए। इनमें से 216 लोगों में हेपेटाइटिस-ए के संदिग्ध लक्षण पाए गए हैं, जिनमें से 45 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भर्ती मरीजों में पांच साल तक की उम्र के दो बच्चे, 18 साल तक की उम्र के 26 मरीज और 60 साल तक की उम्र के 17 मरीज शामिल हैं। इन 45 मरीजों में 30 पुरुष और 15 महिलाएं हैं। हालात की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन की एक टीम ने शनिवार को देसूजोधा गांव का मुआयना किया और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि साफ पानी की आपूर्ति बहाल की जाएगी तथा सभी प्रभावितों के इलाज का पूरा खर्च प्रशासन द्वारा उठाया जाएगा।



















