चित्रकूट जिले में स्थित शैक्षणिक संस्थानों के समीप पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नशे की लत से दूर रखने के लिए जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की है। अदालत के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन में शुरू किए गए इस अभियान के अंतर्गत विद्यालयों के बेहद नजदीक संचालित हो रही तंबाकू, सिगरेट और गुटखे की दुकानों को हटाने की कवायद तेज हो गई है। जिले के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग स्वयं इस पूरी मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं और विभिन्न इलाकों का दौरा करके स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि शिक्षण परिसरों के इर्द-गिर्द स्वच्छ और अनुशासित माहौल कायम किया जा सके।
न्यायिक आदेशों के बाद हरकत में आया प्रशासन
शिक्षा के मंदिरों के आसपास धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थी, क्योंकि इससे छोटे बच्चों के गलत संगत में पड़ने की आशंका बनी रहती है। इस स्थिति पर उच्च अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद प्रदेश शासन ने सभी जिलाधिकारियों एवं प्रशासनिक अमले को कड़े कदम उठाने के आदेश दिए थे। इन्हीं आदेशों के तहत चित्रकूट में जब विद्यालयों के सामने औचक निरीक्षण किया गया, तो मुख्य दरवाजों के बेहद करीब तंबाकू की गुमटियां और दुकानें पाई गईं। जिलाधिकारी ने मौके पर ही विक्रेताओं को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए अपनी दुकानें तत्काल समेटने को कहा।
विक्रेताओं के लिए 10 दिनों की समय सीमा तय
प्रशासनिक अधिकारियों ने कानून का हवाला देते हुए साफ किया है कि किसी भी स्कूल या कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में धूम्रपान सामग्री बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम उल्लंघनकर्ताओं को दुकानें हटाने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया है। यदि दी गई 10 दिनों की मोहलत समाप्त होने के बाद भी इन दुकानों का संचालन बंद नहीं किया गया, तो प्रशासन उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई और जब्ती की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस कड़े कदम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
गांवों और कस्बों के स्कूलों पर भी रहेगी नजर
यह तंबाकू विरोधी मुहीम केवल चित्रकूट के मुख्य शहर तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों के आसपास भी ऐसा ही सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय पुलिस बल और संबंधित विभागीय अधिकारियों को नियमित तौर पर क्षेत्रों का दौरा करने की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि परिसरों के पास से नशीली वस्तुओं की दुकानें हटने से छात्रों को एक सुरक्षित वातावरण मिलेगा और वे इन आदतों के चंगुल में फंसने से बच सकेंगे।



















