संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर जब भी पाकिस्तान की तरफ से अनर्गल बयानबाजी की जाती है, भारत का राजनयिक दल तथ्यों के साथ उसका मुंहतोड़ जवाब देता है। महासभा में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने अपने राइट टू रिप्लाई अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पड़ोसी देश के दोहरे रवैये को बेनकाब किया। इस कूटनीतिक मोर्चे पर भारत का पक्ष रखने की जिम्मेदारी प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने संभाली। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर बेहद सधे हुए और आक्रामक अंदाज में पाकिस्तान के दावों की हकीकत दुनिया के सामने रखी।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन के दौरान सिंधु जल समझौते और अन्य द्विपक्षीय मसलों को लेकर बयानबाजी की थी। भारत की ओर से जवाब देते हुए राजनयिक पेटल गहलोत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को जमकर घेरा। 26 सितंबर 2026 को दिए अपने संबोधन में उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि 9/11 आतंकी हमलों का मुख्य षड्यंत्रकारी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी के ठीक पास शरण लिए हुए था। उन्होंने इस्लामाबाद पर आतंकी संगठनों को खुला संरक्षण देने, धार्मिक कट्टरता फैलाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोगलापन दिखाने का सीधा आरोप लगाया।
यह पहला मौका नहीं था जब पेटल गहलोत ने महासभा में पाकिस्तान के झूठे नैरेटिव को ध्वस्त किया हो। इससे पहले सितंबर 2025 में भी उन्होंने राइट टू रिप्लाई के तहत पाकिस्तानी दावों का जोरदार खंडन किया था। उस दौरान ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया था कि सैन्य टकराव रोकने के लिए पाकिस्तानी फौज ने स्वयं भारत से संघर्षविराम की गुहार लगाई थी। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के कथित जीत के दावों पर तंज कसते हुए टिप्पणी की थी कि यदि बर्बाद रनवे और खाक हुए हैंगर जीत का प्रतीक लगते हैं, तो पाकिस्तान इस भ्रम में खुश रह सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच के तमाम अनसुलझे मुद्दे केवल द्विपक्षीय बातचीत से हल होंगे और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई गुंजाइश नहीं है।
कौन हैं भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत
पेटल गहलोत भारत की एक बेहद काबिल और अनुभवी राजनयिक हैं। वर्तमान में वह न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने जुलाई 2023 में न्यूयॉर्क मिशन में यह अहम जिम्मेदारी संभाली थी। संयुक्त राष्ट्र में तैनाती से पहले उन्होंने विदेश मंत्रालय के यूरोप वेस्ट डिवीजन में अंडरसेक्रेट्री के रूप में महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व निभाए हैं। इसके अतिरिक्त वह पेरिस और सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों में भी विभिन्न पदों पर कार्य कर चुकी हैं।
मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और संगीत में रुचि
कूटनीति के गलियारों में अपनी धारदार शैली के लिए पहचानी जाने वाली पेटल गहलोत का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी काफी शानदार रहा है। उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और फ्रेंच साहित्य में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में परास्नातक यानी मास्टर्स की डिग्री हासिल की। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भाषाओं के महत्व को देखते हुए उन्होंने अमेरिका के मिडिलबरी इंस्टीट्यूट से लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन और ट्रांसलेशन में भी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की।
गंभीर कूटनीतिक जिम्मेदारियों के बीच पेटल गहलोत कला और संगीत के प्रति भी गहरा लगाव रखती हैं। वह एक कुशल गिटार वादक हैं और अपने खाली समय में संगीत साधना करती हैं। 20 मार्च 2025 को अंतरराष्ट्रीय फ्रैंकोफोनी दिवस के अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ला वी एन रोज गीत का एक विशेष फ्यूजन प्रस्तुत करते हुए वीडियो साझा किया था। बहुमुखी प्रतिभा की धनी यह युवा राजनयिक वैश्विक मंच पर नए भारत की प्रखर और अडिग आवाज बनकर उभरी हैं।













