संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये प्लेटफॉर्म भारत विरोधी कंटेंट को बढ़ावा देते हैं, और अगर हालात नहीं सुधरे तो इन्हें मिलने वाला कानूनी सेफ हार्बर संरक्षण छीना जा सकता है.
प्लेटफॉर्म्स पर एंटी इंडिया कंटेंट बढ़ावा देने का आरोप
दुबे ने कहा कि मेटा इंडिया, गूगल और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म एंटी इंडिया कंटेंट को बढ़ावा देते पाए गए हैं. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आरक्षण विरोधी एक संगठन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों की पहुंच जानबूझकर बढ़ाई गई. उनके मुताबिक कॉकरोच जनता पार्टी के कंटेंट को करीब 3 करोड़ (30 मिलियन) व्यूज दिए गए, जबकि आरक्षण विरोधी संगठन को करीब 80 लाख (8 मिलियन) व्यूज मिले. दुबे ने कहा कि देश विरोधी सोच रखने वाले नए कंटेंट क्रिएटर्स को भी तरजीह दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर भारत के प्रधानमंत्री का एक वीडियो कथित तौर पर 5 घंटे तक हटा दिया गया, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर सवाल बताया.
बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
निशिकांत दुबे ने कहा कि बच्चों के यौन शोषण और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत बेहद संवेदनशील है, और देश में पोर्न व अश्लील कंटेंट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने सोशल मीडिया पर आए दिन वायरल होने वाले महिलाओं के डीपफेक वीडियो को जघन्य अपराध करार दिया. दुबे के अनुसार गृह सचिव ने समिति को बताया कि सरकार ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखे हुए है, और यह देखा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट को समय पर नहीं हटातीं. उन्होंने यह भी बताया कि पोर्न वीडियो पर विज्ञापन तक चलाए जाते हैं, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर मामला बताया.
समिति ने कहा, जुकरबर्ग को माफी मांगनी होगी
दुबे ने बताया कि संसदीय समिति ने साफ कह दिया है कि मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी होगी. उनके मुताबिक जरूरत पड़ने पर सोशल मीडिया कंपनियों को मिला सेफ हार्बर संरक्षण खत्म करने पर भी विचार किया जाएगा. दुबे ने बताया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के सांसद भी समिति में सहमत हैं. उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का नाम लेते हुए सेफ हार्बर के मुद्दे पर FIR दर्ज कराने के लिए उनका धन्यवाद किया. दुबे ने याद दिलाया कि मार्क जुकरबर्ग पहले भी भारतीयों के डेटा के कथित दुरुपयोग को लेकर खेद जता चुके हैं, और अब उन्हें नए आरोपों पर भी जवाब देना होगा.
सेफ हार्बर कानून क्यों बना और अब क्यों बदल सकता है
दुबे ने पृष्ठभूमि समझाते हुए बताया कि भारत सरकार साल 2000 में आईटी एक्ट लेकर आई थी, और उसी कानून के तहत इंटरनेट को सेफ हार्बर संरक्षण दिया गया था. उस वक्त यह अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स, स्नैपचैट और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म आएंगे. सेफ हार्बर का मकसद यह था कि अगर कोई व्यक्ति इंटरनेट के जरिए अपराध करे या आपत्तिजनक बात कहे, तो इंटरनेट मुहैया कराने वाली कंपनियां, चाहे वह बीएसएनएल हो, एमटीएनएल हो, रिलायंस हो या एयरटेल, उन पर कार्रवाई न हो, क्योंकि वे सिर्फ माध्यम भर हैं. दुबे के मुताबिक ये सभी नए प्लेटफॉर्म बाद में आए, और अब भारत में इनके लिए अलग नियम बन चुके हैं. उन्होंने बताया कि संसद ने एक कानून पास किया है जिसके तहत भारत में पोर्नोग्राफी सामग्री और कंटेंट नहीं चलाया जा सकता, और चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल यानी बच्चों से जुड़ी सेक्सुअल सामग्री कानूनी तौर पर जघन्य अपराध माना जाता है. उन्होंने महिलाओं के एआई फेक वीडियो को भी इसी गंभीर श्रेणी में बताया, जिसे समिति देख रही है.



















