हांगकांग को रौंदकर सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तान मैच को लेकर दी प्रतिक्रियाश्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर राजनाथ सिंह ने देशवासियों को दी बधाई, गीता के संदेशों को किया यादहोर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना के पहरे से कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 89.50 डॉलर पर स्थिरअमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट से पहले 1.3500 के पार मजबूत हुआ पाउंडअमेरिकी और कनाडाई रोजगार डेटा के इंतजार में अमेरिकी डॉलर पर भारी पड़ रहा कनाडाई डॉलरएस जयशंकर की कीव यात्रा, वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख की सराहना कीहनुमान अंश के आगे पस्त हुई टॉक्सिक, यश की फिल्म से दोगुनी कमाई कर रही है नीम करोली बाबा पर बनी मूवीजयपुर निकाय चुनाव: नाम वापसी के बाद साफ हुई तस्वीर, मैदान में डटे इतने प्रत्याशीसरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकारसांभर और जोबनेर में जल संकट से जंग, गायत्री देवी की इस अनोखी पहल ने बदल दी गांवों की तस्वीर
सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकारभारत
4 सित॰ 2026, 7:15 am (21 मिनट पहले)· 2

सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, यूट्यूबर्स और बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने वाले आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत इस पर विचार करने से मना कर दिया है।

देशभर के सरकारी विद्यालयों में अब बिना आधिकारिक अनुमति के किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है। इस पाबंदी के दायरे में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि मीडियाकर्मी, स्वतंत्र पत्रकार, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इन तमाम प्रतिबंधों को न्यायपालिका के उच्चतम स्तर पर चुनौती दी गई थी, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इंकार कर दिया है।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आदेशों को दी गई थी चुनौती

शीर्ष अदालत के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मुख्य रूप से राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी संस्थानों में लागू किए गए प्रवेश प्रतिबंधों को निशाना बनाया गया था। याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की तरफ से दाखिल इस कानूनी चुनौती में उन प्रशासनिक फरमानों को खारिज करने की मांग की गई थी, जो शिक्षण संस्थानों के भीतर बाहरी तत्वों की आवाजाही को नियंत्रित और प्रतिबंधित करते हैं।

ये भी पढ़ें

न्यायालय की पीठ का रुख और फैसला

इस पूरे मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के प्रावधानों के अंतर्गत इस रिट याचिका पर सुनवाई करने के बिल्कुल भी इच्छुक नहीं हैं। अदालत के इस रुख के बाद याचिका को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया गया, जिससे फिलहाल राज्य स्तर पर जारी किए गए सर्कुलर और दिशा-निर्देश अपनी जगह पर कायम हैं।

प्रशासनिक सर्कुलर में क्या थे कड़े नियम

याचिका में खास तौर पर राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी किए गए एक सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के मुताबिक, शिक्षा संस्थान के परिसर में कदम रखने से पहले किसी भी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय के प्रधानाचार्य से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था। इसके साथ ही संस्थान परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार लेने, ऑडियो रिकॉर्डिंग करने या सोशल मीडिया के लिए लाइवस्ट्रीमिंग करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई थी, जब तक कि इसके लिए पहले से विधिवत अनुमति प्राप्त न की गई हो।

उत्तर प्रदेश और अन्य जिलों के निर्देश

उत्तर प्रदेश का हवाला देते हुए याचिका में अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 19 अगस्त 2026 को जारी किए गए एक अन्य आदेश का भी जिक्र किया गया था। इस निर्देश में भी स्पष्ट किया गया था कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना कोई भी बाहरी शख्स, यूट्यूबर या सोशल मीडिया से जुड़ा व्यक्ति परिषदीय स्कूलों में प्रवेश नहीं कर सकता और न ही वहां किसी तरह की शूटिंग या रिकॉर्डिंग कर सकता है। याचिका के दस्तावेजों में बताया गया कि आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी स्थानीय प्रशासन की ओर से ठीक इसी तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश प्रसारित किए गए थे।

अभियान का संदर्भ और कानूनी स्थिति

यह पूरा घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के 'स्कूल ठीक करो' नामक अभियान से भी जुड़ा हुआ है, जिसके तहत सरकारी विद्यालयों की बुनियादी व्यवस्थाओं और बदहाल आधारभूत सुविधाओं की कमियों को उजागर करने का प्रयास किया जाता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इन कड़े प्रशासनिक आदेशों के कारण स्कूलों की जमीनी हकीकत और वहां उपलब्ध संसाधनों की पोल खोलने वाले मुद्दों को जनता के सामने लाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बहरहाल, सर्वोच्च अदालत ने इन आदेशों की वैधता पर किसी भी प्रकार की विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज करते हुए अनुच्छेद 32 के तहत आई इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है, जिसके चलते राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए यह कदम अभी अदालत की सीधी समीक्षा के दायरे से बाहर हैं।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने किस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया?
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों और पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
राजस्थान में स्कूल प्रवेश को लेकर सर्कुलर कब जारी किया गया था?
राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने 16 अगस्त 2026 को यह सर्कुलर जारी किया था।
उत्तर प्रदेश के किस अधिकारी ने प्रवेश प्रतिबंध का आदेश जारी किया था?
अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 19 अगस्त 2026 को ऐसा ही आदेश जारी किया था।
किन-किन जिलों में इस तरह के निर्देश जारी किए गए थे?
आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऐसे निर्देश दिए गए थे।
किस राजनीतिक अभियान के संदर्भ में यह मामला चर्चा में आया?
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के संदर्भ में चर्चा में आया था।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व किसने किया था?
यह जनहित याचिका याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के किन न्यायमूर्तियों ने इस मामले की सुनवाई की?
यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुना गया था।
अदालत ने किस अनुच्छेद के तहत याचिका पर विचार करने से मना किया?
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

सर्वोच्च अदालत द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत याचिका खारिज किए जाने से प्रशासनिक आदेशों को तात्कालिक सुरक्षा मिल गई है। इससे राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों को स्कूलों में बाहरी हस्तक्षेप रोकने की मजबूत कानूनी स्थिति मिल गई है, हालांकि मीडिया और सिविल सोसाइटी के अधिकारों के संतुलन पर बहस आगे भी निचले न्यायालयों या अन्य मंचों पर बनी रहेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·अभी

सर्वोच्च न्यायालय का यह रुख प्रशासनिक स्वायत्तता और शिक्षण संस्थानों में अध्ययन के अनुकूल माहौल बनाए रखने के उद्देश्य को रेखांकित करता है। हालांकि, अनुच्छेद 32 के तहत राहत न मिलने से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित उच्च न्यायालयों का रुख करना होगा। इस नीति से जहां स्कूलों की गोपनीयता और सुरक्षा पुख्ता होगी, वहीं यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे साधा जाता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR