जयपुर जिले में साल 2026 के नगरीय निकाय चुनावों के संदर्भ में नामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के साथ ही चुनावी समर का पूरा गणित सामने आ चुका है। जिले के भीतर आने वाले 19 शहरी निकायों के कुल 690 वार्डों के लिए अब दो हजार छह सौ से अधिक उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, कागजातों की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल तीन हजार तीन सौ इकसठ लोग वैध उम्मीदवार माने गए थे, जिनमें से सात सौ चौदह लोगों ने मैदान छोड़ने का फैसला किया। इसके साथ ही तीन प्रत्याशी ऐसे भी सामने आए जो बिना किसी विरोध के सीधे विजयी घोषित कर दिए गए हैं।
नामांकन और छंटनी का पूरा ब्योरा
इस पूरी चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत में जयपुर के इन 19 निकायों के लिए कुल चार हजार आठ सौ अड़सठ नामांकन पत्र भरे गए थे। इनमें से एक हजार तीन सौ बयासी पर्चे जांच के दौरान विभिन्न कमियों के चलते खारिज कर दिए गए थे। इसके बाद तीन हजार चार सौ छियासी पर्चे पूरी तरह सही पाए गए थे। नाम वापसी का समय खत्म होने के बाद अब मैदान में कुल दो हजार छह सौ चवालीस उम्मीदवार बचे हैं। राजनीतिक दलों के कई बागी नेताओं ने भी अपने कदम पीछे खींचते हुए मुकाबले से दूरी बना ली है, जिससे समीकरणों में बदलाव आया है।
विभिन्न निकायों में उम्मीदवारों की स्थिति
जयपुर नगर निगम के दायरे में आने वाले 150 वार्डों में सबसे कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जहां सात सौ तेईस प्रत्याशी आमने-सामने हैं। अकेले इसी निगम क्षेत्र के भीतर दो सौ इक्यासी लोगों ने अपने नाम वापस लिए हैं। इसके अलावा शाहपुरा में दो सौ सैंतालीस, बस्सी में एक सौ चौसठ और चाकसू में एक सौ छत्तीस उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं। मनोहरपुर निकाय में एक सौ बीस लोग चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि चौमूं और बगरू दोनों ही जगहों पर एक सौ उन्नीस-उन्नीस प्रत्याशी अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं।
अन्य क्षेत्रों का चुनावी गणित
किशनगढ़-रेनवाल में एक सौ, दूदू में निन्यानवे और जमवारामगढ़ में छ्यानवे लोग चुनावी मैदान में भाग्य आजमा रहे हैं। इसके साथ ही खेजरोली और नारायणा में अट्ठासी-अट्ठासी, फागी में पचासी तथा वाटिका में चौरासी प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं। जोबनेर में अस्सी, फुलेरा में सतहत्तर, कानोता में छियासठ और कालाडेरा में पैंसठ प्रत्याशियों के बीच मुकाबला तय हुआ है। इन सभी उम्मीदवारों को आज आधिकारिक रूप से चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर प्रचार की गतिविधियों में तेजी आने की पूरी संभावना है।


















