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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लिव इन पार्टनर को भी मिलेगी धारा 498ए के तहत क्रूरता से सुरक्षाभारत
3 अग॰ 2026, 12:27 pm (59 दिन पहले)· 1

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लिव इन पार्टनर को भी मिलेगी धारा 498ए के तहत क्रूरता से सुरक्षा

उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया है कि धारा 498ए के तहत क्रूरता के खिलाफ मिलने वाली कानूनी सुरक्षा अब केवल शादीशुदा जोड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लिव इन पार्टनर्स को भी मिलेगी।

उच्चतम न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को बड़ी कानूनी राहत दी है। शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार, लिव इन पार्टनर को अपने साथी या उसके परिवारजनों द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न और क्रूरता के मामलों में विवाहित पत्नी के समान ही कानूनी अधिकार मिलेंगे। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए अब लिव इन संबंधों पर भी लागू होगी।

बदलते समाज के साथ कानूनी सुरक्षा का दायरा विस्तार

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि क्रूरता से सुरक्षा पाने का अधिकार सिर्फ पारंपरिक विवाह तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता। न्यायपालिका का मानना है कि जैसे-जैसे समाज के ढांचे और रहने के तरीके बदल रहे हैं, वैसे-वैसे कानूनों को भी समय के साथ आगे बढ़ना होगा।

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पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि लिव इन में रहने वाले साथी के लिंग या उनके रिश्ते के स्वरूप से कोई फर्क नहीं पड़ता। जिस प्रकार एक शादीशुदा महिला को घरेलू क्रूरता के खिलाफ कानून का संरक्षण मिलता है, ठीक उसी तरह लिव इन में रहने वाले पार्टनर को भी धारा 498ए के तहत न्यायालय से न्याय मांगने का पूरा हक होगा।

धारा 498ए के प्रावधान और मिलने वाली सजा

भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत यदि कोई व्यक्ति या उसके पारिवारिक रिश्तेदार किसी महिला के साथ क्रूरता का आचरण करते हैं, तो उन्हें तीन वर्ष तक की जेल की सजा और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

कानून में क्रूरता की व्याख्या करते हुए बताया गया है कि ऐसा कोई भी दुर्व्यवहार जो महिला को खुदकुशी के लिए मजबूर करे, उसे गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाए, अथवा संपत्ति या दहेज जैसी गैरकानूनी मांगों के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करे, वह इस धारा के दायरे में आता है।

ऐसी किसी भी स्थिति का सामना करने पर पीड़ित व्यक्ति अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। सर्वोच्च अदालत के इस ऐतिहासिक रुख के बाद अब लिव इन पार्टनर्स भी समान कानूनी सुरक्षा का लाभ उठाकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप को लेकर क्या फैसला सुनाया है?
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि लिव इन पार्टनर को अपने साथी या उसके परिवार द्वारा प्रताड़ना के मामलों में धारा 498ए के तहत पत्नी के समान कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
धारा 498ए के तहत कितनी सजा का प्रावधान है?
धारा 498ए के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
कानून के तहत क्रूरता में क्या शामिल है?
क्रूरता में ऐसा व्यवहार शामिल है जो पीड़िता को खुदकुशी के लिए मजबूर करे, गंभीर शारीरिक या मानसिक चोट पहुंचाए, या संपत्ति और दहेज के लिए परेशान करे।
क्या यह अधिकार केवल महिला लिव इन पार्टनर्स के लिए है?
अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा का अधिकार लिव इन में रहने वाले पार्टनर के लिंग या संबंध के रूप की परवाह किए बिना लागू होता है।
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