छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी सीजीपीएससी परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। इसी क्रम में जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपियों में शामिल अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बघोरिया को निर्धारित रिमांड अवधि पूरी होने के बाद रायपुर स्थित विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनकी रिमांड अवधि को आठ दिन के लिए और विस्तारित करने का निर्णय लिया है।
कोर्ट में पेशी और रिमांड का विस्तार
इससे पहले न्यायिक आदेश के तहत चेतन बघोरिया छह दिन की हिरासत में थे। शुरुआती पूछताछ का समय पूरा होने पर अन्वेषण एजेंसी ने कुछ नए तथ्यों और महत्वपूर्ण कड़ियों का हवाला देते हुए अदालत से हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था। विशेष न्यायालय ने एजेंसी के तर्कों को स्वीकार करते हुए यह नया आदेश जारी किया है। अब उन्हें आगामी तेरह सितंबर को दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
हिरासत के दौरान होगी विस्तृत पूछताछ
इस विस्तारित हिरासत अवधि के दौरान एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया में बरती गई कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन के मामलों को लेकर गहराई से पूछताछ करेगी। इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे। जांच का मुख्य केंद्र इस पूरी गड़बड़ी के जरिए अर्जित की गई अवैध संपत्ति, बेनामी संपत्तियों की पहचान और संदिग्ध बैंक खातों की जांच करना है।
कांग्रेस शासनकाल के दौरान उठा था मामला
यह पूरा विवाद सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद और चयन प्रक्रिया में धांधली से जुड़ा हुआ है। उस समय आरोप सामने आए थे कि तत्कालीन आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को नौकरियां दिलाई थीं और कई योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों की अनदेखी की गई थी। घटना के वक्त राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री के पद पर भूपेश बघेल कार्यरत थे। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।



















