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सूर्यकुमार यादव के लिए किसान ने बनवाई दो लाख की मूर्ति, मुंबई पहुंचे लोकेंद्र साहू को मिला यह जवाबछत्तीसगढ़
18 सित॰ 2026, 9:11 pm (6 दिन पहले)· 0

सूर्यकुमार यादव के लिए किसान ने बनवाई दो लाख की मूर्ति, मुंबई पहुंचे लोकेंद्र साहू को मिला यह जवाब

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक किसान ने अपनी खेती की कमाई से भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव की मूर्ति बनवाई और उसे भेंट करने मुंबई पहुंचे। क्रिकेटर ने मूर्ति लौटाते हुए इसे गांव में ही स्थापित करने की बात कही और छत्तीसगढ़ आने का आश्वासन दिया।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के देवगहन गांव के रहने वाले लोकेंद्र साहू का भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के प्रति अनोखा समर्पण इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोकेंद्र ने अपनी खेती से हुई कमाई में से करीब दो लाख रुपये खर्च करके सूर्यकुमार यादव की एक आदमकद और हूबहू मूर्ति तैयार करवाई है। इसके बाद वे इस अनूठे तोहफे को लेकर सीधे मुंबई पहुंचे। चौदह सितंबर को सूर्यकुमार यादव का जन्मदिन था, और उसी खास मौके पर लोकेंद्र ने यह प्रतिमा उन्हें भेंट की। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब सूर्यकुमार यादव ने इस तोहफे को अपने पास रखने से विनम्रतापूर्वक मना कर दिया और इसे वापस लौटाते हुए एक खास संदेश दिया।

मुलाकात और मूर्ति की खासियत

लोकेंद्र साहू ने बातचीत के दौरान साझा किया कि हाल ही में मुंबई में उनकी मुलाकात भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव से हुई थी। जब उन्होंने जन्मदिन के अवसर पर वह सुंदर प्रतिमा क्रिकेटर को सौंपी, तो सूर्यकुमार उसे देखकर बेहद प्रसन्न हुए और उसकी बनावट की बारीकियों को देखकर चकित रह गए। उन्होंने प्रतिमा की ऊंचाई, गर्दन के आकार और सीने की चौड़ाई की विशेष रूप से प्रशंसा की और आश्चर्य जताया कि इसे इतनी सटीकता के साथ कैसे गढ़ा गया है। लोकेंद्र के अनुसार, सूर्यकुमार यादव ने मूर्ति को वापस करते हुए सुझाव दिया कि इसे उनके अपने गांव में ही स्थापित किया जाए, ठीक उसी जगह पर जहां पहले से सचिन तेंदुलकर की मूर्ति लगी हुई है। इसके साथ ही, क्रिकेटर ने यह भी वादा किया कि वे जल्द ही छत्तीसगढ़ के उस गांव में आएंगे और खुद इस प्रतिमा का अनावरण करेंगे। सूर्यकुमार की इस बात से लोकेंद्र और उनके गांव के लोग बेहद उत्साहित हैं।

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क्यों बनाई गई यह प्रतिमा

लोकेंद्र केवल सूर्यकुमार यादव के खेल कौशल के ही मु मुरीद नहीं हैं, बल्कि वे उनकी सामाजिक और राष्ट्रहित की पहलों से भी बहुत प्रभावित हैं। पहलगाम हमले के बाद एशिया कप टूर्नामेंट की अपनी मैच फीस को शहीदों और प्रभावित नागरिकों के कल्याण के लिए दान करने के फैसले ने लोकेंद्र के दिल पर गहरी छाप छोड़ी थी। इसी अगाध सम्मान और प्रेरणा के चलते उन्होंने अपनी खेती की आय से लगभग दो लाख रुपये निकालकर इस मूर्ति को तैयार करवाने का फैसला किया। इस खूबसूरत प्रतिमा को बनने में कुल डेढ़ महीने का समय लगा। इसे छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ही मूर्तिकार नरेंद्र देवांगन और मध्य प्रदेश के अमरकंटक से ताल्लुक रखने वाले जयपाल ठाकुर ने मिलकर बड़ी मेहनत से तराशा है।

शहीदों के सम्मान में पहले भी किए हैं काम

यह पहली बार नहीं है जब लोकेंद्र साहू ने इस तरह का कोई देशभक्ति या प्रेरणादायक कार्य किया हो। इससे पहले भी उन्होंने अपनी खेती की जमीन बेचकर अपने गांव की सड़क के किनारे देश के खातिर अपने प्राण न्योछावर करने वाले अट्ठारह जवानों की मूर्तियां तैयार करवाकर स्थापित की हैं। इन मूर्तियों में कारगिल युद्ध, मुंबई के भीषण आतंकी हमले, पुलवामा हमले और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग नक्सली हमलों में शहीद हुए वीर जवानों की प्रतिमाएं शामिल हैं। अब लोकेंद्र की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि सूर्यकुमार यादव खुद उनके गांव देवगहन आएं और इन सभी प्रतिमाओं के साथ-साथ इस नई मूर्ति का भी अनावरण करें। सूर्यकुमार के छत्तीसगढ़ आने के वादे के बाद से पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी उत्सुकता और खुशी का माहौल है।

सवाल-जवाब

लोकेंद्र साहू किस जगह के रहने वाले हैं?
लोकेंद्र साहू छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के देवगहन गांव के रहने वाले हैं।
उन्होंने सूर्यकुमार यादव की मूर्ति पर कितना खर्च किया?
उन्होंने खेती से हुई कमाई से लगभग दो लाख रुपये खर्च करके यह मूर्ति तैयार करवाई है।
यह मूर्ति कितने दिनों में बनकर तैयार हुई?
यह प्रतिमा महज डेढ़ महीने में बनकर तैयार हुई है।
इस मूर्ति को किन मूर्तिकारों ने बनाया है?
इसे बालोद के मूर्तिकार नरेंद्र देवांगन और मध्य प्रदेश के अमरकंटक के जयपाल ठाकुर ने मिलकर बनाया है।
सूर्यकुमार यादव ने मूर्ति को लेकर क्या कहा?
क्रिकेटर ने मूर्ति को वापस लौटाते हुए उसे गांव में सचिन तेंदुलकर की मूर्ति के पास स्थापित करने को कहा और खुद गांव आने का आश्वासन दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·6 दिन पहले

एक हेल्थ संवाददाता के दृष्टिकोण से, लोकेंद्र साहू का यह कदम मानसिक जुड़ाव और प्रेरणा के अनूठे स्तर को दर्शाता है, जहाँ खेल और राष्ट्रप्रेम का यह मेल व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है। जब कोई व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई इस तरह के सामाजिक और प्रेरणादायक कार्यों में लगाता है, तो यह समाज में भावनात्मक संबल और मानसिक कल्याण की एक मजबूत भावना पैदा करता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी एक सकारात्मक प्रेरणा है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

लोकेंद्र साहू का यह कदम सिर्फ एक प्रशंसक का पागलपन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय कलाकारों के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर है। दो लाख रुपये की इस कृषि-आय से बनी मूर्ति के जरिए बालोद और अमरकंटक के शिल्पकारों को जो राष्ट्रीय पहचान मिली है, वह इस अनूठी कहानी का सबसे बड़ा व्यावसायिक और सांस्कृतिक पहलू है। सूर्यकुमार यादव द्वारा इसे गांव में स्थापित करने के सुझाव से ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि लोकेंद्र साहू जैसे किसानों का यह सांस्कृतिक उपक्रम ग्रामीण भारत की बदलती प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। जब कृषि आय का एक हिस्सा स्थानीय शिल्पकारों को मिलता है, तो यह अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है। सूर्यकुमार यादव द्वारा मूर्ति को छत्तीसगढ़ के देवगहन गांव में ही स्थापित करने और स्वयं अनावरण करने के वादे से यह स्थल अब एक सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है। इससे न केवल स्थानीय मूर्तिकारों नरेंद्र देवांगन और जयपाल ठाकुर की कला को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि इस सुदूर ग्रामीण इलाके में आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे, जो अंततः ग्रामीण विकास के एक नए मॉडल को जन्म देते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

लोकेंद्र साहू जैसे प्रशंसकों का समर्पण केवल खेल प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय भावना और सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ा है। एक किसान द्वारा खेती की कमाई से मूर्ति बनवाना और पहले भी शहीदों के सम्मान में जमीन बेचकर मूर्तियां स्थापित करना यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में प्रेरणा के स्रोत कितने अनूठे हैं। सूर्यकुमार यादव का इसे वापस गांव में स्थापित करने का सुझाव और छत्तीसगढ़ आने का वादा इस भावनात्मक जुड़ाव को एक सकारात्मक दिशा देता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

लोकेंद्र साहू के इस कदम में खेल के प्रति जुनून के साथ-साथ एक संवेदनशील नागरिक की भावना भी झलकती है, जो अपनी मेहनत की कमाई का उपयोग सामाजिक प्रेरणा के लिए कर रहे हैं। हालांकि ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था या जनसुरक्षा का सीधा सरोकार नहीं है, फिर भी सार्वजनिक हस्तियों और उनके प्रशंसकों के बीच इस तरह के सकारात्मक संवाद समाज में रचनात्मक संदेश देते हैं। आगे यह देखना दिलचस्प होगा कि खिलाड़ी का छत्तीसगढ़ दौरा और ग्राम विकास में यह पहल किस रूप में सामने आती है।

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