17 अगस्त राशिफल: नाग पंचमी पर 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें सभी 12 राशियों का आज का भविष्यफलसुस्त अमेरिकी खुदरा बिक्री आंकड़ों से डॉलर पर दबाव, 0.7100 के स्तर के पास पहुंचा ऑस्ट्रेलियाई डॉलरझारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा विवाद के बीच अभ्यर्थियों से मिलीं कुनिका सदानंदउत्तर प्रदेश में युवाओं को गो सेवा अभियान से जोड़ेगी सरकार, 10 हजार गो मित्र संभालेंगे जिम्मेदारीफिल्म 'घोस्ट' फेम अनन्या राज का निधन, 27 साल की उम्र में सोते समय थमीं सांसेंश्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 167 रनों की धमाकेदार पारी खेलने के बाद देवदत्त पडिक्कल ने खोले अपनी शानदार बल्लेबाजी के राजसाधारण तोरई को बनाएं खास, इस मसालेदार ग्रेवी रेसिपी के साथ हर कोई चाव से खाएगालॉर्ड्स के मैदान पर एश्ले गार्डनर की ट्रент रॉकेट्स ने रचा इतिहास, सनराइजर्स लीड्स को 8 विकेट से हराकर महिला हंड्रेड ट्रॉफी पर किया कब्जाप्यू रिसर्च सर्वे में अमेरिका में भारत पर बंटा जनमत, ब्रिटेन और जर्मनी में सुधरी साखफिल्म रोजा का गाना 'ये हसीन वादियां' कैसे बना ऑल टाइम क्लासिक, जानिए एआर रहमान के डेब्यू प्रोजेक्ट से जुड़े खास किस्से
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा संदेश, कहा कि बंदूकधारी विद्रोहियों से भी ज्यादा घातक हैं दिमागी नक्सलीभारत
15 अग॰ 2026, 11:02 am (2 दिन पहले)· 0

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा संदेश, कहा कि बंदूकधारी विद्रोहियों से भी ज्यादा घातक हैं दिमागी नक्सली

स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने देश से दिमागी नक्सलियों से सतर्क रहने का आह्वान किया और बताया कि कैसे 2014 के संकल्प के बाद नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

79वें स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने आंतरिक सुरक्षा और नक्सलवाद की चुनौती पर अत्यंत महत्वपूर्ण बात रखी। 21वीं सदी के भारत के सामने मौजूद पुरानी रुकावटों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि दशकों पुरानी समस्याओं को समाप्त करना अब देश की प्रगति के लिए बेहद आवश्यक हो चुका है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक विशेष चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में हथियारों वाले नक्सलियों की तुलना में दिमागी नक्सली कहीं अधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं और पूरा देश उनसे सुरक्षित रहना चाहिए।

नक्सल हिंसा का भयानक इतिहास और सुरक्षा बलों का बलिदान

भारत के बड़े भूभाग पर लगभग चार दशकों तक नक्सली और माओवादी हिंसा का कब्जा रहा। इस दौरान बंदूक के बल पर शासन चलाने का प्रयास किया गया और देश के संविधान को ताक पर रखा गया। इस हिंसक दौर ने लाखों युवाओं का भविष्य पूरी तरह तबाह कर दिया। अनगिनत माताओं ने अपने नवयुवक बेटों को खो दिया और हजारों परिवारों के सपने चकनाचूर हो गए। इस हिंसा के दौरान आम नागरिकों की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर 3,500 से अधिक पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। नक्सलियों की हिंसा से देश की धरती खून से लाल होती रही, जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक था।

ये भी पढ़ें

2014 का दृढ़ संकल्प और माओवाद का अंतिम चरण

वर्ष 2014 में सरकार की बागडोर संभालने के पहले ही दिन से देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कराने का अटूट संकल्प लिया गया था। निरंतर प्रयासों और सख्त अभियानों के परिणामस्वरूप आज माओवादी और नक्सली हिंसा में खुद को बनाए रखने की शक्ति नहीं बची है। यह हिंसक विचारधारा अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिन क्षेत्रों में कभी केवल गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती थी और मिट्टी लाल रहती थी, वहां आज विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा पूरी शान से लहरा रहा है। वे तमाम क्षेत्र अब नक्सलवाद से मुक्त होने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

दिमागी नक्सलवाद का बढ़ता खतरा और राष्ट्रीय सतर्कता

बंदूक की नोक पर हिंसा फैलाने वाले संगठन अब कमजोर पड़ चुके हैं, लेकिन वैचारिक रूप से समाज में जहर घोलने वाले दिमागी नक्सली देश की आंतरिक मजबूती के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के अनुसार, 21वीं सदी में भारत को अपनी प्रगति की गति बनाए रखने के लिए ऐसी सभी पुरानी और नई रुकावटों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। सुरक्षा बल जहां जमीनी स्तर पर सशस्त्र हिंसा को खत्म करने में सफल हुए हैं, वहीं समाज को इन दिमागी तत्वों से बचाना समय की सबसे बड़ी मांग है।

सवाल-जवाब

स्वतंत्रता दिवस 2026 पर पीएम नरेंद्र मोदी ने दिमागी नक्सलियों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने चेतावनी दी कि 21वीं सदी के भारत में हथियारों वाले नक्सलियों की तुलना में दिमागी नक्सली कहीं अधिक खतरनाक हैं और देश को उनसे बचाना होगा।
नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों ने कितना बलिदान दिया है?
आम नागरिकों की रक्षा करते हुए 3,500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई है।
देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प कब लिया गया था?
वर्ष 2014 में सरकार में आने के पहले ही दिन देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया गया था।
नक्सल प्रभावित इलाकों की वर्तमान स्थिति क्या है?
माओवादी हिंसा अपने अंतिम चरण में है और जिन इलाकों में कभी गोलियां गूंजती थीं, वहां अब विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।
नक्सलवाद ने देश को कितने समय तक प्रभावित रखा?
लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद ने भारत के बड़े हिस्सों और आबादी को बंदूक के दम पर अपनी गिरफ्त में रखा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR