मध्य प्रदेश के नीमच जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों, छोटे कामगारों और स्वरोजगार की इच्छुक महिलाओं के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मिलने वाले कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और रियायती बैंक ऋण की बदौलत जिले के कई हुनरमंद लोग अब अपनी छोटी गुमटियों और घरेलू स्तर के सीमित कामकाज से बाहर निकलकर अपनी खुद की स्थायी दुकानें स्थापित कर रहे हैं। इस पहल ने न केवल स्थानीय दस्तकारों के जीवनस्तर को सुधारा है, बल्कि उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आत्मनिर्भरता का एक नया मार्ग भी प्रशस्त किया है।
प्रशासनिक आंकड़े और योजना की प्रगति
नीमच जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अमन वैष्णव द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, जिले में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 36 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इन प्राप्त आवेदनों में से गहन प्रक्रिया के बाद करीब 5,500 आवेदकों का सफल पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर चलाए गए अभियानों के तहत 5,050 लाभार्थियों को सफलतापूर्वक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान ब्यूटी पार्लर, कारपेंट्री, बार्बर शॉप और टेलरिंग जैसे अलग-अलग पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को आधुनिक तकनीकों, नए उपकरणों के इस्तेमाल और व्यापार प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया गया है।
वित्तीय सहायता के मोर्चे पर भी नीमच जिले में उल्लेखनीय काम हुआ है। अब तक प्राप्त बैंक ऋण आवेदनों में से लगभग 1,800 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनके जरिए कुल 15.5 करोड़ रुपये की वित्तीय राशि लाभार्थियों तक पहुंचाई गई है। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन गरीब और साधनहीन कारीगरों को सीधे बैंकिंग तंत्र से जोड़ना है, जो शुरुआती पूंजी की कमी के कारण नया उद्यम शुरू करने में सक्षम नहीं थे या अपने वर्षों पुराने पारंपरिक काम को विस्तार देने में कठिनाई का सामना कर रहे थे।
ब्यूटी पार्लर क्षेत्र में महिलाओं की सफलता गाथा
योजना से लाभान्वित होकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली महिलाओं में नयागांव की रानी जैन प्रमुख हैं। रानी पिछले आठ वर्षों से 'रक्षिता ब्यूटी पार्लर' का संचालन कर रही थीं। उन्होंने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिसमें व्यवसाय को आधुनिक तरीके से चलाने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें बैंक के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस राशि का उपयोग करके उन्होंने अपने पार्लर के लिए नए ब्रांडेड उत्पाद और आवश्यक आधुनिक सामान खरीदे। इससे उनके ग्राहकों की संख्या में इजाफा हुआ और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो गई।
नयागांव की ही एक अन्य लाभार्थी सोनम सेन, जो 'नंदिनी ब्यूटी पार्लर' चलाती हैं, ने भी इस योजना के अनुभवों को साझा किया। सोनम के मुताबिक, 15 दिनों की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें व्यापार में आने वाली चुनौतियों से निपटने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। इसके बाद बैंक से प्राप्त 1 लाख रुपये के ऋण को उन्होंने सीधे अपने पार्लर के विस्तार में लगाया। उन्होंने कहा कि अक्सर पर्याप्त पूंजी के अभाव में छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाना बहुत कठिन होता है, ऐसे में योजना के तहत मिली यह आर्थिक मदद उनके लिए एक वरदान साबित हुई है।
कपड़ा सिलाई और स्वरोजगार से बदला जीवन
नीमच शहर की रहने वाली रत्ना व्यास के लिए यह योजना आत्मनिर्भरता का आधार बनी। योजना के अंतर्गत उन्हें कपड़े सिलने के लिए आधुनिक सिलाई मशीन के साथ-साथ 1 लाख रुपये का बैंक ऋण भी प्रदान किया गया। इस पूंजी की मदद से उन्होंने अपने सिलाई के काम को बड़े स्तर पर शुरू किया और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों के कपड़े तैयार करने का व्यवसाय स्थापित किया। रत्ना व्यास की लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने योजना के तहत मिला पूरा ऋण बैंक को चुका दिया है। अब वे बाजार से थोक में कपड़ा खरीदकर बड़े पैमाने पर सिलाई का काम कर रही हैं। अपने आर्थिक हालात में आए इस बड़े सुधार के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।
गुमटी से स्थायी प्रतिष्ठान तक का बदलाव
नीमच जिले के जावी गांव के निवासी दशरथ देवीलाल सेन की कहानी भी योजना की सफलता को बयां करती है। दशरथ पहले सड़क किनारे एक छोटी सी गुमटी में अपना सैलून का काम चलाते थे, जिससे उनकी सीमित आय होती थी। योजना के तहत 15 दिन के प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रतिदिन 500 रुपये का वित्तीय भत्ता दिया गया, साथ ही काम से जुड़ी आधुनिक टूलकिट और मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद मिले 1 लाख रुपये के बैंक ऋण की मदद से उन्होंने अपनी खुद की एक स्थायी पक्की दुकान स्थापित कर ली है। अब अपनी खुद की दुकान होने से उनकी दैनिक कमाई और आजीविका के साधनों में पहले की तुलना में काफी बड़ा सुधार हुआ है।



















