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तारापीठ के होटल में लगी भीषण आग, धुएं से घिरे परिवार ने दो बच्चों के साथ बाथरूम में ऐसे बचाई जानपश्चिम बंगाल
17 अग॰ 2026, 11:36 am (26 दिन पहले)· 2

तारापीठ के होटल में लगी भीषण आग, धुएं से घिरे परिवार ने दो बच्चों के साथ बाथरूम में ऐसे बचाई जान

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ में एक निजी होटल में सुबह तड़के आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि एक परिवार ने बाथरूम का शीशा तोड़कर किसी तरह अपनी जान बचाई।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ स्थित एक निजी होटल में सोमवार तड़के भीषण आग भड़क उठी, जिसने वहां ठहरे श्रद्धालुओं की रातों की नींद उड़ा दी। इस दुखद हादसे में सात लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। आग की लपटों और कमरे में भरते जहरीले धुएं के बीच एक परिवार ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से दो बच्चों की जान बचाई। यह घटना ऐसे समय पर हुई जब होटल में गहरी नींद में सोए लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

रिसेप्शन के पास के कमरे में फंसा परिवार

होटल के ग्राउंड फ्लोर पर रिसेप्शन काउंटर के ठीक नजदीक ठहरे एक परिवार के लिए सुबह का वक्त किसी कयामत से कम नहीं था। इस दल में एक पुरुष, उनकी पत्नी, दो 10 साल के बच्चे और एक बहन शामिल थे, जबकि उनकी मां और दूसरी बहन पास के ही एक अन्य कमरे में ठहरी हुई थीं। अचानक से फैली आग के बाद जब इन लोगों ने बाहर की तरफ भागना चाहा, तब तक मुख्य मार्ग पर लपटें आ चुकी थीं। कुछ ही क्षणों में कमरे के भीतर गहरा काला धुआं भर गया, जिससे हर तरफ अंधेरा छा गया और सांस लेना दूभर हो गया। उस विकट परिस्थिति में बड़ों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन दोनों मासूम बच्चों को सुरक्षित रखने की थी।

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बाथरूम का सहारा और शीशा तोड़ने की मजबूरी

स्थिति के बेकाबू होते देख उस परिवार ने बिना एक पल गंवाए बाथरूम के अंदर शरण ली। कमरा धुएं से पूरी तरह पट चुका था और बाहर तेज आग सुलग रही थी, इसलिए उनके पास यही एक विकल्प बचा था। अंदर पहुंचते ही उन्होंने तुरंत पानी का नल खोल दिया ताकि ठंडक बनी रहे और धुएं के प्रभाव को कुछ कम किया जा सके। परिवार के एक सदस्य ने उस खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वे लोग अंदर फंस चुके थे और उन्होंने राहत पाने के लिए बाथरूम का शीशा तोड़ डाला। उनका मुख्य उद्देश्य किसी तरह शुद्ध हवा अंदर खींचना और दम घुटने वाली स्थिति से मुकाबला करना था। उस वक्त किसी को यह अंदाजा नहीं था कि अगला पल उनके लिए क्या परिणाम लेकर आने वाला है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए हर पल संघर्ष

साथ में दो छोटे बच्चों के होने के कारण उस परिवार की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई थीं। चारों तरफ फैली भीषण गर्मी और घुटन भरे माहौल के बीच बच्चों को संभालते हुए वक्त बिताना बेहद तनावपूर्ण था। कमरे के भीतर सांस लेना तक मुश्किल हो चुका था और होटल के हालात इतने बिगड़ चुके थे कि बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नजर नहीं आ रहा था। पानी चालू करने और शीशे पर प्रहार करने का जोखिम भरा कदम उन्होंने सिर्फ इसलिए उठाया ताकि वे किसी तरह उस जानलेवा स्थिति से निपट सकें। परिवार के हर सदस्य ने लगातार इस बात की कोशिश जारी रखी कि बच्चों को आंच तक न पहुंचे और वे इस आपदा से सुरक्षित बाहर निकल सकें।

वह शीशा तोड़ना एक खतरनाक निर्णय था, क्योंकि यदि हवा मिलने के बजाय वहां से और अधिक आग अंदर आ जाती, तो स्थिति और भी भयानक हो सकती थी। लेकिन उस वक्त उनके पास कोई और दूसरा रास्ता नहीं बचा था क्योंकि जहरीला धुआं लगातार उनकी सांसें छीन रहा था। होटल में फंसे उस व्यक्ति ने अपनी आपबीती में बताया कि वे खुद को ऑक्सीजन दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, जबकि उनकी आंखों के सामने पूरा ढांचा तबाह होता जा रहा था। वह समय किसी डरावने सपने जैसा था जहां हर बीतता सेकंड मौत के करीब खींच रहा था और बाहर निकलने की उम्मीदें लगातार धूमिल हो रही थीं।

दमकल कर्मियों ने निकाला ग्यारह लोगों को बाहर

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद कुल 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिनमें से कई लोग बेहोश हो चुके थे। इस अग्निकांड में कुल सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई। राहत कार्यों के दौरान बचाए गए लोगों में से एक को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, एक अन्य को बेहतर इलाज के लिए दूसरे चिकित्सा केंद्र भेजा गया, और कुछ का इलाज मौके पर जारी रहा। इसके अलावा, पांच अन्य पीड़ितों को भी अस्पताल लाया गया जिसमें एक छोटा बच्चा भी शामिल था।

इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी घातक भूमिका धुएं ने निभाई, जो आग लगने के स्थान से तेजी से ऊपर की मंजिलों की तरफ फैल गया। होटल के कमरों में मौजूद कई लोगों को सांस लेने में तीव्र असुविधा हुई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। यही कारण था कि उस परिवार को अपनी जान बचाने के लिए बाथरूम का रुख करना पड़ा और पानी का सहारा लेना पड़ा। वे आग की सीधी चपेट में आने से तो बच गए, लेकिन धुएं के गुबार से मुकाबला करना उनके लिए भी आसान नहीं था। पीड़ित सदस्य का यह बयान इस बात की गवाही देता है कि उस समय अंदर का मंजर कितना भयावह था।

शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है आग की वजह

इस भीषण हादसे के कारणों को लेकर होटल मालिक के बेटे कल्याण पाल ने बयान देते हुए दावा किया कि आग की असल वजह शॉर्ट सर्किट थी। उनके अनुसार, सुबह करीब 4:30 बजे के आसपास एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट हुआ जिसकी वजह से यह दुर्घटना शुरू हुई। इसके बाद होटल के नाइट गार्ड ने तुरंत दूसरे कर्मचारी को इस बात की सूचना दी। कल्याण पाल का कहना है कि बिजली की मुख्य लाइन तत्काल प्रभाव से काट दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के समय फायर अलार्म सक्रिय रूप से बजा था ताकि वहां ठहरे सभी मेहमानों को खतरे की चेतावनी मिल सके और वे समय रहते बाहर निकल सकें। हालांकि इसके बाद धुआं इतनी तेजी से ऊपर की ओर फैल गया कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला।

होटल में हुई सात मौतों के बाद अब वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मौके का मुआयना करने पहुंचे रामपुरहाट विधायक ध्रुव साहा ने भी होटल प्रबंधन की व्यवस्थाओं की कड़ी आलोचना की। उन्होंने उस स्थान को जतुगृह की संज्ञा देते हुए दावा किया कि आग लगने के दौरान अलार्म सिस्टम पूरी तरह बंद था। इसके विपरीत, होटल मालिक के बेटे का कहना है कि अलार्म बजा था, जबकि अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक वहां के फायर फाइटिंग उपकरण सही स्थिति में थे। अब इस बात की गहन जांच की जा रही है कि आखिर आग किस वजह से भड़की और किस स्तर पर सुरक्षा मानकों में चूक हुई।

तारापीठ का यह दर्दनाक हादसा केवल सात लोगों की असामयिक मौत की खबर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस परिवार की अदम्य इच्छाशक्ति की कहानी भी है। दो छोटे बच्चों के साथ आग और धुएं के बीच बाथरूम में कैद रहकर जिंदगी की जंग लड़ना आसान नहीं था। पानी का लगातार बहना, शीशे का टूटना और हर सांस के लिए संघर्ष करना उस खौफनाक रात की सबसे बड़ी सच्चाई है, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।

सवाल-जवाब

तारापीठ के होटल में आग किस समय लगी?
तारापीठ के एक निजी होटल में सोमवार तड़के यह भीषण आग लगी।
हादसे में कितने लोगों की जान गई?
इस अग्निकांड में कुल सात लोगों की मौत हो गई।
होटल में आग लगने का कारण क्या बताया गया?
होटल मालिक के बेटे के अनुसार, आग सुबह करीब 4:30 बजे एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी।
कमरे में फंसे परिवार ने अपनी जान कैसे बचाई?
परिवार ने बाथरूम में जाकर नल चलाया और ताजी हवा के लिए शीशा तोड़कर किसी तरह अपनी जान बचाई।
दमकल विभाग ने कुल कितने लोगों को सुरक्षित निकाला?
दमकलकर्मियों ने बचाव अभियान चलाकर कुल 11 लोगों को होटल से बाहर निकाला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·26 दिन पहले

तारापीठ के इस होटल अग्निकांड में सात लोगों की मौत और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है। भारत के धार्मिक पर्यटन केंद्रों में अचानक बढ़ती भीड़ के मुकाबले आतिथ्य सत्कार और आपदा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे में भारी कमी है। इस त्रासदी के बाद प्रशासन और होटल संचालकों पर अग्नि सुरक्षा के कड़े नियमों को सख्ती से लागू करने का अत्यधिक दबाव बन गया है, अन्यथा ऐसे दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना असंभव होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·26 दिन पहले

तारापीठ के इस होटल अग्निकांड ने आतिथ्य उद्योग में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अग्नि सुरक्षा ऑडिट के अभाव को उजागर किया है। इस दुर्घटना से पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और होटल सेक्टर की कॉरपोरेट अनुपालन व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे भविष्य में सख्त नियमों और जवाबदेही की मांग तेज होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

तारापीठ की यह दुखद घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नीतिगत और प्रशासनिक विफलता का गंभीर परिणाम है। पर्यटन केंद्रों पर अनियोजित निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के प्रति लापरवाही राज्य में बड़े संकट को न्योता दे रही है। यह मामला स्पष्ट करता है कि प्रशासन को व्यावसायिक भवनों के नियमों के पालन में कोई ढील नहीं देनी चाहिए, अन्यथा ऐसी त्रासदियां रुकने वाली नहीं हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

तारापीठ की इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर होटल उद्योग में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर किया है। सात लोगों की मौत इस बात का प्रमाण है कि शुरुआती स्तर पर आग बुझाने के उपकरण और आपातकालीन निकास मार्गों की व्यवस्था कितनी कमजोर थी। यदि समय रहते अग्नि सुरक्षा ऑडिट सख्ती से लागू नहीं किए गए, तो ऐसे हादसे तीर्थस्थलों पर और भी बड़ी तबाही का कारण बन सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

यह हादसा कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही का गंभीर परिणाम है। प्रारंभिक जांच से स्पष्ट है कि होटल प्रबंधन ने दमकल विभाग के नियमों और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा था। यदि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने समय रहते सख्त निरीक्षण किया होता, तो सात निर्दोष जिंदगियां नहीं जातीं। इस मामले में गैर इरादतन हत्या और सुरक्षा उपेक्षा की धाराओं के तहत तुरंत आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए, ताकि दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

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