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तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में लेने पर विवाद, वकील ने पूछा ठिकानादिल्ली
17 अक्तू॰ 2026, 8:08 am (13 दिन पहले)· 0

तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में लेने पर विवाद, वकील ने पूछा ठिकाना

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के तिरंगा मार्च से ठीक पहले पुलिस ने पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया, जिस पर उनकी लीगल टीम ने सवाल उठाए हैं।

राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के आयोजन से ठीक पहले प्रशासन ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को उनके एक सहयोगी के घर से हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद उन्हें निवारक हिरासत (प्रिवेंटिव अरेस्ट) में रखा गया है और उन पर शांति व्यवस्था भंग करने तथा माहौल बिगाड़ने की आशंका से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

वकील ने उठाए सवाल और मांगा जवाब

पार्टी की कानूनी प्रमुख और अधिवक्ता रत्ना सिंह ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट लिखकर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। रत्ना सिंह का कहना है कि दिपके को कहां ले जाया गया है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उनके वकीलों को नहीं दी गई है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अज्ञात स्थान पर रखा गया है और उनकी लीगल टीम को अब तक उनसे मिलने की अनुमति भी नहीं मिल सकी है।

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अदालत में पेशी और बॉन्ड उल्लंघन का मामला

दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में बताया कि हिरासत में लिए जाने के 24 घंटों के भीतर मामले को अदालत के समक्ष लाया जाएगा। निर्धारित योजना के अनुसार, मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित एसईएम कोर्ट में यह पेशी होनी है। पुलिस का कहना है कि उन पर शांति भंग करने के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त यह बात भी सामने आई है कि दिपके ने पिछली बार रिहाई के दौरान तय किए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है। पूर्व में उन्हें इसी शर्त पर रिहा किया गया था, इसलिए नियमों के उल्लंघन के चलते इस बार उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भी भेजा जा सकता है।

आईसा नेता की रिहाई

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) की नेता नेहा बोरा को भी शुरू में कार्रवाई के दायरे में लिया गया था। हालांकि बाद में पुलिस ने नेहा बोरा को रिहा कर दिया। पहले पुलिस का विचार दोनों को एक साथ विशेष अदालत में पेश करने का था, लेकिन बाद में प्रक्रियात्मक बदलाव देखने को मिले और उन्हें छोड़ दिया गया।

सवाल-जवाब

अभिजीत दिपके को पुलिस ने कहां से हिरासत में लिया?
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को उनके एक सहयोगी के आवास से हिरासत में लिया।
अभिजीत दिपके किस राजनीतिक दल से जुड़े हैं?
वह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक हैं।
उनकी वकील रत्ना सिंह ने क्या आपत्ति दर्ज कराई?
वकील रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि दिपके को किस स्थान पर रखा गया है और आरोप लगाया कि वकीलों को उनसे मिलने नहीं दिया गया।
नेहा बोरा का इस मामले में क्या हुआ?
आईसा नेता नेहा बोरा को पुलिस ने बाद में रिहा कर दिया।
अभिजीत दिपके को जेल भेजे जाने की संभावना क्यों जताई गई?
पुलिस के अनुसार उन्होंने पिछली रिहाई के समय भरे गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·12 दिन पहले

अभिजीत को इस तरह अचानक उठा लेना और वकीलों को ठिकाना न बताना थोड़ा अजीब है। माना कि शांति बनाए रखनी है, पर नियम तो कायदे से होने चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

तिरंगा मार्च से पहले इस तरह किसी को उठा लेना और वकीलों को ठिकाना न बताना समझ से बाहर है। अगर पुलिस को पहले से अंदेशा था तो मार्च की अनुमति ही क्यों नहीं रद्द कर दी? ऐसे में तो शक और बढ़ेगा ही।

Ananya Iyer@ananya-iyer·12 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। कोई थ्रिलर पॉलिटिकल ड्रामा सीरीज़ लग रही है, जहाँ पुलिस और वकीलों के बीच लुका-छिपी का खेल चल रहा हो।

Rohan Verma@rohan-verma·12 दिन पहले

मार्च से पहले इस तरह की हिरासत और वकीलों को जानकारी न देना पुलिस की मनमानी साफ दिखाता है। शांति व्यवस्था के नाम पर लोकतांत्रिक हक दबाए जा रहे हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

रोहन जी, प्रिवेंटिव अरेस्ट के मामलों में 24 घंटे के भीतर एसईएम कोर्ट में पेश करना कानूनी बाध्यता है, लेकिन वकीलों को ठिकाना न बताना प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े करता है।

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