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ट्रक चोरी का अंतरराज्यीय रैकेट बेनकाब, फर्जी दस्तावेजों से नई गाड़ी बनाकर बेचने वाले गिरोह का बड़ा खेलमहाराष्ट्र
9 जुल॰ 2026, 10:52 am (20 दिन पहले)· 2

ट्रक चोरी का अंतरराज्यीय रैकेट बेनकाब, फर्जी दस्तावेजों से नई गाड़ी बनाकर बेचने वाले गिरोह का बड़ा खेल

नागपुर में चोरी के ट्रकों के अवैध रजिस्ट्रेशन और उन्हें बेचने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें 1,500 से अधिक संदिग्ध वाहनों की पहचान की गई है।

नागपुर में वाहनों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां चोरों ने एक पूरा सिंडिकेट बना रखा था। यह गिरोह चोरी किए गए ट्रकों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे दोबारा रजिस्टर करवाता था और फिर उन्हें बाजार में बिल्कुल नई गाड़ियां बताकर खपा देता था। इस गंभीर मामले की गंभीरता को देखते हुए नागपुर के कपिल नगर पुलिस थाने में एक आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। नागपुर ग्रामीण आरटीओ के अधिकारी विजय चौहान के अनुसार, इस गिरोह का जाल केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर सक्रिय था।

चेसिस नंबर और गंभीर अनियमितताओं का जाल

जांच में जुटी टीम को अब तक कुल 1,587 ऐसे ट्रकों के बारे में ठोस जानकारी मिली है, जिनके चेसिस नंबरों पर गहरा संदेह है। इन वाहनों की गहन जांच में कई गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। अब तक 495 ट्रकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है और संबंधित थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, परिवहन विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए 223 वाहनों के पंजीकरण को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।

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विजय चौहान ने बताया कि यह गिरोह सबसे पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों से ट्रकों की चोरी करता था और वहां उनके लिए मैन्युअल कागजात तैयार करता था। इन नकली दस्तावेजों पर मुहरें लगाकर औपचारिकताएं पूरी की जाती थीं और फिर इन्हें नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश भेज दिया जाता था ताकि ऑनलाइन पोर्टल पर इनका नया इतिहास रचा जा सके।

पोर्टल पर नई गाड़ी का भ्रम

इस फर्जीवाड़े की कार्यप्रणाली बेहद चालाकी भरी थी। मैन्युअल दस्तावेजों के आधार पर वाहन पोर्टल पर इनका ऑनलाइन पंजीकरण करवाया जाता था, जिसमें दिखाया जाता था कि यह वाहन एकदम नया है। इस प्रक्रिया के करीब 10 दिन बाद वहां से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी हासिल कर ली जाती थी। एक बार ऑनलाइन पोर्टल पर गाड़ी रजिस्टर्ड हो जाने के बाद इसे उन राज्यों में भेज दिया जाता था, जहां खरीदार पहले से तैयार बैठे होते थे। वहां ये ट्रक नई गाड़ी के नाम पर बिक जाते थे और बेधड़क सड़कों पर चलते थे।

जांच में कैसे पकड़ा गया यह गोरखधंधा?

इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब ये ट्रक फिटनेस जांच के लिए आरटीओ के पास पहुंचे। निरीक्षण के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने पाया कि चेसिस नंबरों के साथ भारी छेड़छाड़ की गई थी। कई वाहनों पर ग्राइंडर के निशान मिले, जहां पुराने नंबरों को घिसकर मिटाने या बदलने का प्रयास किया गया था। जब इन चेसिस नंबरों का सत्यापन संबंधित वाहन निर्माता कंपनियों से किया गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया कि ऐसी किसी चेसिस संख्या वाली गाड़ी का उन्होंने कभी निर्माण ही नहीं किया था। यानी ये वाहन रिकॉर्ड में कहीं अस्तित्व में ही नहीं थे।

पंजीकरण प्रणाली की खामियों का फायदा

जांच में यह भी पता चला कि जहां ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था देरी से लागू हुई, वहां से पुरानी आरसी चोरी करके उन्हें फर्जी कागजात के आधार पर तैयार किया जाता था। विशेष रूप से नागालैंड की रजिस्ट्रेशन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए विजय चौहान ने कहा कि वहां वाहन की भौतिक उपस्थिति, मालिक का सत्यापन या स्थानीय पते की जांच किए बिना ही पंजीकरण कर दिए गए। मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनिवार्य फिजिकल इंस्पेक्शन को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जिससे यह अवैध धंधा फलता-फूलता रहा।

पुलिस की कार्रवाई और भविष्य की राह

आरटीओ की शिकायत के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मुंबई, मनमाड, नागपुर और चंद्रपुर समेत कई शहरों में छापेमारी कर पुलिस ने संदिग्ध ट्रकों को जब्त किया है। फिलहाल 1,000 से अधिक वाहनों का सत्यापन होना बाकी है, जिसके बाद गिरफ्तारियों और जब्ती का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। आरटीओ का साफ निर्देश है कि जिन 223 गाड़ियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, उन्हें किसी भी सूरत में सड़कों पर नहीं उतरना चाहिए।

सवाल-जवाब

यह फर्जीवाड़ा मुख्य रूप से कहां से संचालित हो रहा था?
यह गिरोह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से ट्रक चोरी करता था और रजिस्ट्रेशन के लिए नागालैंड तथा अरुणाचल प्रदेश का इस्तेमाल करता था।
कुल कितने संदिग्ध ट्रकों की पहचान की गई है?
अब तक कुल 1,587 ऐसे ट्रकों की पहचान की गई है जिनके चेसिस नंबर संदिग्ध पाए गए हैं।
फर्जीवाड़े का खुलासा कैसे हुआ?
यह तब सामने आया जब आरटीओ ने फिटनेस टेस्ट के दौरान चेसिस नंबरों में छेड़छाड़ और ग्राइंडर के निशान पाए, जिसे कंपनियों ने भी फर्जी बताया।
अभी तक कितने वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए हैं?
परिवहन विभाग ने अब तक 223 वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
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