नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों का विवाद अब महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भी गहराता जा रहा है। देश की राजधानी नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन की आंच मुंबई तक पहुंच गई है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई इस धांधली ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है, और इसी के विरोध में छात्र लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी पूर्व अनुमति के शहर के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। सरकारी आदेशों के उल्लंघन और गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जुटाने के आरोप में पुलिस ने अठारह जुलाई से बाईस जुलाई के बीच की पांच दिनों की छोटी अवधि में कुल तेरह प्राथमिकियां दर्ज की हैं। इन दर्ज मामलों में करीब चार सौ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जो इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
यह पूरा विवाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र लगातार यह मांग कर रहे हैं कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार किए जाएं और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर हमेशा के लिए रोक लगाई जाए। मुंबई में हो रहे ये सभी विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चलाए जा रहे विशाल छात्र आंदोलन का समर्थन करने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं। छात्रों और उनके अभिभावकों का कहना है कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और जब तक उनकी सभी मांगें पूरी तरह से नहीं मानी जातीं, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन पूरे देश में जारी रहेगा। पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी है कि जिन लोगों को इन दर्ज मामलों में नामजद किया गया है, उन्हें फिलहाल थाने बुलाकर कानूनी नोटिस थमा दिया गया है और इसके बाद उन्हें वहां से जाने की अनुमति दे दी गई है।
बिना अनुमति कई इलाकों में हुए प्रदर्शन
अधिकारियों के अनुसार, शहर के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में यह कानूनी कार्रवाई की गई है। मुंबई के कई प्रमुख और संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने बिना कोई इजाजत लिए भीड़ इकट्ठा की, जिससे यातायात और सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ। इनमें मुख्य रूप से शिवाजी पार्क, दादर स्थित चैत्यभूमि, चेंबूर और शिवसेना भवन के आस-पास के इलाके शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रकार के सार्वजनिक आंदोलन या धरने के लिए संबंधित पुलिस विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इन मामलों में आयोजकों ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। सोमवार को दादर के चैत्यभूमि इलाके में हुए ऐसे ही एक बिना अनुमति वाले बड़े प्रदर्शन को लेकर भी पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है और वहां भी मामला दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
दर्ज किए गए सभी तेरह मामलों में आरोपियों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मुंबई पुलिस के अनुसार, इन लोगों पर सरकारी कर्मचारियों के आधिकारिक आदेशों की अवहेलना करने, आम जनता का रास्ता गलत तरीके से रोकने और गैर-कानूनी तरीके से एक सार्वजनिक स्थान पर इकट्ठा होने से संबंधित सख्त धाराएं लगाई गई हैं। इस बीच, उन्नीस जुलाई को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में शिवसेना-यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवाजी पार्क में आयोजित एक विशाल सभा को संबोधित किया था। इस सभा का आयोजन विशेष रूप से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में किया गया था। सोनम वांगचुक को जब उनके गिरते स्वास्थ्य के कारण सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, तब उसके विरोध में मुंबई में यह भारी भीड़ जमा हुई थी।
पुलिस की भारी तैनाती और लोगों को हिरासत में लेना
बुधवार को मुंबई के कई अन्य स्थानों पर भी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के खिलाफ जोरदार और उग्र प्रदर्शन हुए। ये सभी कार्यक्रम कॉकरोच जनता पार्टी के देशव्यापी अभियान के समर्थन में आयोजित किए गए थे। स्थिति को नियंत्रण में रखने और किसी भी तरह की हिंसा को टालने के लिए पुलिस को अंततः कई लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चेंबूर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर गार्डन इलाके में सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे। वहां स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पहले से ही पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी। वहां मौजूद चश्मदीदों का यह भी आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के साथ काफी सख्ती बरती और कई लोगों को खींचकर जबरन पुलिस की गाड़ियों में भरा गया। इसके बाद उन सभी को स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
चेंबूर में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर और प्लेकार्ड लेकर पहुंचे थे। इन पोस्टरों पर देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव लाने और नीट पेपर लीक मामले के असली दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग बड़े अक्षरों में लिखी हुई थी। पुलिस ने जब कुछ मुख्य प्रदर्शनकारियों को पकड़ कर हिरासत में ले लिया, तो उसके बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद बाकी भीड़ को भी हल्का बल प्रयोग करके वहां से हटा दिया गया। इसके अलावा, दादर में स्थित शिवसेना भवन के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग और कार्यकर्ता जमा हुए। वहां मौजूद भीड़ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनसे इस्तीफे की मांग की। शहर में किसी भी तरह की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सभी प्रमुख प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर रखी है।




















