महाराष्ट्र राज्य की सियासत और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर गुरुवार को भारी हलचल और तनाव देखने को मिल रहा है। वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) ने छात्रों के गंभीर मुद्दों को लेकर आज एक बड़े पैमाने पर राज्यव्यापी 'महाराष्ट्र बंद' का स्पष्ट ऐलान किया है। यह विशाल विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से बहुचर्चित नीट (NEET) मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक मामले की जारी जांच और छात्रों के साथ राष्ट्रीय राजधानी में हो रहे कथित अन्याय के कड़े विरोध में आयोजित किया गया है। पार्टी द्वारा तय किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, गुरुवार सुबह 9 बजे के बाद से इस बंद की विधिवत शुरुआत की गई है, जिसके चलते पूरे राज्य में प्रशासन और पुलिस विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से सतर्क और मुस्तैद हो गया है।
वीबीए नेताओं पर पुलिसिया कार्रवाई और नजरबंदी के आरोप
राज्यव्यापी बंद के आधिकारिक रूप से शुरू होने से पहले ही जमीनी स्तर पर विवाद काफी गहरा गया है। वंचित बहुजन अघाड़ी के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य की पुलिस और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी द्वारा जारी किए गए बयानों का कहना है कि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को कमजोर करने की नीयत से, पुलिस ने उनके कई वरिष्ठ नेताओं और जमीनी स्तर के सक्रिय कार्यकर्ताओं को पहले से ही चेतावनी भरे नोटिस भेज दिए हैं। वीबीए का यह भी मजबूती से दावा है कि उनके कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों के घरों के ठीक बाहर सुबह-सुबह भारी पुलिस बल रणनीतिक रूप से तैनात कर दिया गया है। पार्टी के अनुसार, पुलिस की इस कार्रवाई के कारण उनके नेताओं को एक तरह से जबरन नजरबंद कर दिया गया है और उन्हें अपने घरों से बाहर कदम तक नहीं रखने दिया जा रहा है ताकि वे सड़कों पर होने वाले लोकतांत्रिक प्रदर्शनों में हिस्सा न ले सकें।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और बंद की भविष्य की रूपरेखा को लेकर वंचित बहुजन अघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर मीडिया के सामने स्थिति को स्पष्ट करेंगे। वे सुबह के समय मुंबई के व्यस्त दादर इलाके में स्थित अपने निवास स्थान 'राजगृह' पर मीडिया कर्मियों के साथ एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। यह पूरी उम्मीद की जा रही है कि इस महत्वपूर्ण बातचीत में वे छात्रों की जायज मांगों और पुलिस की इस सख्त निवारक कार्रवाई को लेकर अपनी पार्टी का बेहद कड़ा रुख पेश करेंगे।
इन विशिष्ट इलाकों में दिख सकता है बंद का व्यापक असर
स्थानीय राजनीतिक जानकारों और पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस बंद का सबसे अधिक और स्पष्ट प्रभाव उन विशिष्ट क्षेत्रों में देखने को मिलेगा जहां वंचित बहुजन अघाड़ी का पारंपरिक रूप से मजबूत जनाधार है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की अगर बात करें तो चेंबूर, घाटकोपर और धारावी जैसे प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में बंद का खासा असर होने की प्रबल संभावना है, क्योंकि इन सभी क्षेत्रों में दलित समुदाय की एक बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। मुंबई शहर के अलावा, राज्य के अन्य प्रमुख नगरों जैसे संभाजीनगर, अकोला और मध्य भारत के अहम शहर नागपुर के कई हिस्सों में भी व्यावसायिक गतिविधियां, स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक यातायात आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, इस राज्यव्यापी बंद को लेकर महाराष्ट्र के अन्य विपक्षी दलों का रुख बहुत स्पष्ट और आक्रामक नहीं है। राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों ने वीबीए के इस छात्र-समर्थक कदम को केवल मौखिक रूप से अपना सैद्धांतिक समर्थन दिया है। किसी भी बड़े विपक्षी दल ने यह भरोसा बिल्कुल नहीं दिलाया है कि उनके अपने कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सड़कों पर उतरकर इस प्रदर्शन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे। अन्य प्रमुख दलों के कार्यकर्ताओं की इस स्पष्ट गैर-मौजूदगी के कारण ऐसा माना जा रहा है कि इस बंद का पूरा राज्यव्यापी असर अंततः थोड़ा सीमित रह सकता है और यह मुख्य रूप से केवल वीबीए के गढ़ वाले इलाकों तक ही सिमट कर रह जाएगा।
नीट परीक्षा का विरोध और नागपुर पुलिस की भारी मुस्तैदी
इस समय पूरा देश नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक के संवेदनशील मुद्दे पर बेहद आक्रोशित है, जिसने अनगिनत मेडिकल छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। महाराष्ट्र के मुंबई तथा नागपुर जैसे प्रमुख शहर इस राष्ट्रव्यापी विरोध के अहम केंद्र बने हुए हैं। वीबीए द्वारा आज के इस बंद का आह्वान करने का मुख्य तात्कालिक कारण दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस द्वारा किए गए कथित कठोर दुर्व्यवहार को माना जा रहा है। दिल्ली की इस घटना के ठीक बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक यह भारी उबाल आया है।
इस विरोध आह्वान के बाद नागपुर शहर का ऐतिहासिक और प्रमुख संविधान चौक पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। स्थानीय प्रशासन को इस बात का पुख्ता अंदेशा है कि वंचित बहुजन अघाड़ी के सैकड़ों कार्यकर्ता इस महत्वपूर्ण चौक पर बड़ी संख्या में एकत्र होकर उग्र प्रदर्शन कर सकते हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर यहां सुरक्षा के अभूतपूर्व और बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं।
शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैनाती
जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी मीडिया को देते हुए, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) सुनील सिंह पवार ने बताया कि हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, "सुरक्षा चिंताओं को मुख्य रूप से ध्यान में रखते हुए, सड़कों पर ज्यादा से ज्यादा पुलिस स्टाफ को मुस्तैद किया गया है।" एसीपी ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल स्थानीय पुलिस ही काफी नहीं है, बल्कि संभावित भीड़ से निपटने के लिए एसआरपीएफ (SRPF) और दंगा नियंत्रण बटालियन यानी आरसीबी (RCB) की विशेष टुकड़ियों को भी विशेष रूप से तैनात किया गया है।
प्रशासन ने शहर के प्रमुख बाजारों, व्यस्त चौराहों और भीड़भाड़ वाले सभी संवेदनशील स्थानों पर फिक्स पुलिस पॉइंट्स स्थापित किए हैं, जहां पुलिस के जवान लगातार कड़ी नजर रखे हुए हैं। इसके साथ ही पूरे शहर में मोबाइल पेट्रोलिंग को भी कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया गया है। एसीपी पवार ने जोर देकर कहा कि स्थानीय पुलिस की पूरी कोशिश केवल यही है कि राज्य में कोई भी हिंसक या अप्रिय घटना बिल्कुल न घटे और आम लोगों के लिए शांति तथा कानून व्यवस्था पूरी तरह से बनी रहे।
बीती रात संविधान चौक पर हाई-वोल्टेज ड्रामा और पुलिस कार्रवाई
गुरुवार सुबह की इस भारी पुलिस तैनाती की मुख्य जड़ें बुधवार रात की उन घटनाओं से जुड़ी हैं जो नागपुर में घटी थीं। कल शाम करीब 4:30 बजे कॉकरोच जनता पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने नागपुर के प्रसिद्ध संविधान चौक पर जुटना शुरू कर दिया था। कुछ ही घंटों में यह भीड़ काफी विशाल हो गई और अनुमानों के मुताबिक लगभग 1,000 से 1,200 उत्साही कार्यकर्ता वहां विरोध जताने जमा हो गए।
हालांकि, जैसे-जैसे रात गहराने लगी और तापमान में गिरावट आई, प्रदर्शनकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगी और ज्यादातर लोग शांतिपूर्वक अपने घरों की ओर लौट गए। लेकिन, लगभग 60 से 70 कार्यकर्ताओं का एक बेहद दृढ़ समूह वहां से हटने को बिल्कुल तैयार नहीं था। इन बचे हुए प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट और अड़ी हुई जिद थी कि जब तक महाराष्ट्र सरकार का कोई वरिष्ठ मंत्री खुद आकर उनका आधिकारिक ज्ञापन स्वीकार नहीं करेगा, तब तक वे उस जगह को किसी भी हाल में खाली नहीं करेंगे।
स्थिति को बिगड़ता देख और देर रात के समय कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए, पुलिस को मजबूरन सख्ती से कदम उठाना पड़ा। रात लगभग 11:30 बजे पुलिस ने वहां डटे हुए बचे-खुचे कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपनी अंतिम कार्रवाई शुरू की। उन्हें सुरक्षित तरीके से हिरासत में ले लिया गया और संविधान चौक को पूरी तरह से खाली कराकर पुलिस नियंत्रण में ले लिया गया, जिसके बाद गुरुवार सुबह के इस बंद की पृष्ठभूमि तैयार हुई।




















