त्रिपुरा के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वित्तीय राहत से जुड़ा एक अहम फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने मंगलवार को महंगाई भत्ते यानी डीए और महंगाई राहत यानी डीआर में 3 फीसदी की नई बढ़ोतरी का ऐलान किया। इस ताजा संशोधन के बाद कुल डीए और डीआर की दर बढ़कर 44 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह कदम कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
वेतन भत्तों में बदलाव और वित्तीय असर
सिविल सेक्रेटेरिएट में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संशोधित डीए और डीआर 1 अक्टूबर से प्रभावी माना जाएगा। इस फैसले के लागू होने से राज्य के खजाने पर हर साल लगभग 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से राज्य कर्मियों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच भत्तों के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा, “इस बढ़ोतरी के साथ, राज्य सरकार के कर्मचारियों और केंद्र के उनके समकक्षों के डीए-डीआर के बीच का अंतर घटकर 16 प्रतिशत रह जाएगा।” इसके साथ ही राज्य प्रशासन ने नियमित कर्मियों के लिए मकान किराया भत्ता यानी एचआरए भी 8 फीसदी से बढ़ाकर मूल वेतन का 10 फीसदी कर दिया है। यह नया एचआरए नियम भी 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा, जिससे सरकारी खजाने पर सालाना 141.96 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
प्रशासनिक स्तंभ और आठवें वेतन आयोग की योजना
सरकारी तंत्र में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे शासन के अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। नीतियों के धरातल पर क्रियान्वयन, जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के निर्बाध संचालन में उनकी भूमिका केंद्रीय रहती है। उन्होंने प्रस्तावित आठवें वेतन आयोग के गठन पर भी रुख स्पष्ट किया और बताया कि राज्य सरकार ने एक वेतन आयोग गठित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कर्मचारियों के हितों और राज्य की आर्थिक स्थिति के बीच संतुलन साधते हुए आगामी कदम उठाए जाएंगे।
अवकाश नियम, पदोन्नति नीति और क्षमता निर्माण
छुट्टियों से जुड़े नियमों में भी कर्मियों के हित में संशोधन किया गया है। अब जिन कर्मचारियों के पास 285 दिनों से अधिक लेकिन 300 दिनों तक का अर्जित अवकाश जमा है, वे अगले 15 दिनों की छुट्टी को अग्रिम अवकाश के तौर पर अलग से सुरक्षित रख सकते हैं। इस व्यवस्था से अर्जित की गई छुट्टियों के व्यपगत यानी जब्त होने का जोखिम समाप्त हो जाएगा।
पदोन्नति से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए वर्ष 2021 की प्रमोशन पॉलिसी का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान हेतु तदर्थ पदोन्नतियां दी जा रही हैं। 1 दिसंबर 2025 के फैसले में निर्धारित शर्तों के अंतर्गत, इस नीति के तहत तदर्थ पदोन्नति पाने वाले कर्मियों को संबंधित तिथि से नियमित पदोन्नति के सेवा और सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएंगे।
इसके अलावा 2018 की भर्ती नीति का उल्लेख करते हुए बताया गया कि प्रत्यक्ष सरकारी भर्तियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू है। राज्य सिविल सेवा अधिकारियों की दक्षता बढ़ाने के लिए सिपारड के जरिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, आईआईएम कलकत्ता और बिपारड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर निरंतर जोर दिया जा रहा है।
























