त्रिपुरा के एक युवा के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार और अपमान से जुड़े मामले में राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने कंटेंट क्रिएटर आमिर शोकीन को पांच दिन की पुलिस हिरासत में सौंप दिया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अहमदाबाद में छिपे अन्य संदिग्धों की पहचान करना और उन्हें कानून के दायरे में लाना है।
सोशल मीडिया वीडियो और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए एक वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुवार को आमिर शोकीन को हिरासत में ले लिया था। इस वीडियो में त्रिपुरा के रहने वाले एक युवक को नस्लीय गालियां देते हुए और अपमानजनक व्यवहार का शिकार बनाते हुए दिखाया गया था। इसके बाद पुलिस ने आगे की गहन पूछताछ और अहमदाबाद में अन्य संलिप्त व्यक्तियों को पकड़ने के लिए अदालत से हिरासत की मांग की थी।
अदालत में हुई सुनवाई और वकीलों के तर्क
विशेष न्यायाधीश शिल्पी जैन ने लोक अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पांच दिन के रिमांड का आदेश दिया। इससे पहले ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत आमिर शोकीन को एक दिन की न्यायिक हिरासत में बिताने के बाद अदालत के सामने पेश किया गया था। जांच टीम ने छह दिन की हिरासत मांगते हुए अदालत को बताया कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें त्रिपुरा के युवक का मजाक उड़ाया गया था।
पुलिस के अनुसार, इस वीडियो को अहमदाबाद में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शूट किया गया था जिसे बाद में आमिर शोकीन ने अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। आरोपी के वकील विनीत जैन ने पुलिस के इस आग्रह का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि जांच अधिकारी अहमदाबाद में कोई निश्चित पता पेश करने में विफल रहे हैं और बिना पते के आरोपी को पूरे शहर में घुमाना बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है। इसके अलावा, बचाव पक्ष के वकील ने यह भी दावा किया कि वीडियो में दिखने वाले अन्य लोगों ने न तो कोई टिप्पणी की थी और न ही पीड़ित की तरफ देखा था।
कानूनी कार्रवाई और विभिन्न धाराओं के तहत केस
दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि आमिर शोकीन ने अहमदाबाद में संलिप्त अन्य आरोपियों के सटीक ठिकानों का खुलासा नहीं किया है। दिल्ली पुलिस ने इस सिलसिले में सदर बाजार पुलिस स्टेशन में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के साथ-साथ अन्य सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। इसके अतिरिक्त, इस घटना को लेकर त्रिपुरा पुलिस की तरफ से भी एक अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पूर्वोत्तर के लोगों के साथ भेदभाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस ताजा घटनाक्रम ने देश के अन्य हिस्सों में पूर्वोत्तर के निवासियों द्वारा झेले जाने वाले नस्लीय भेदभाव के गंभीर मुद्दों को एक बार फिर से सतह पर ला दिया है। विशेष पुलिस इकाई पूर्वोत्तर क्षेत्र (SPUNER) के एक आधिकारिक संचार के आधार पर दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।
इस बीच, त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली ने इस मामले में एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जोरदार मांग की है। संगठन की ओर से (SPUNER) के संयुक्त पुलिस आयुक्त को एक औपचारिक शिकायत सौंपी गई है, जिसमें वायरल फुटेज का हवाला देते हुए त्रिपुरा के युवा के साथ हुए नस्लीय उत्पीड़न और अपमान का विस्तार से जिक्र किया गया है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस घिनौनी हरकत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे प्रकरण की जांच में दिल्ली पुलिस के साथ पूरा समन्वय बनाए रखें।



















