त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आगामी दुर्गा पूजा उत्सव को लेकर पूजा समितियों ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस साल शहर भर के पूजा पंडालों में अनूठी रचनात्मकता देखने को मिलेगी, जिसमें बेकार पड़े कांच के टुकड़ों से निर्मित कलाकृतियां, राज्य के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों की प्रतिकृतियां और राजस्थान की राजसी संस्कृति का सजीव प्रदर्शन शामिल है। आयोजकों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के साथ ही उन्हें एक नया और सकारात्मक अनुभव देना है।
टूटे कांच के टुकड़ों से उकेरी जा रही उम्मीद और मजबूती
कुंजबन स्पोर्टिंग यूनियन के पंडाल में इस बार पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से आए कलाकार तपस पॉल एक बेहद अलग तरह का मंडप तैयार कर रहे हैं। इस पंडाल के निर्माण में लोहे के मजबूत ढांचों के भीतर लाखों टूटे हुए कांच के टुकड़ों को करीने से सजाया जा रहा है। जब इन पर विशेष रोशनी बिखरेगी, तो पूरा ढांचा चमक उठेगा। कलाकार का मानना है कि यह अनोखी बनावट उत्सव के दिनों में भारी भीड़ को अपनी ओर खींचेगी।
तपस पॉल के अनुसार, यह कला केवल देखने में सुंदर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा संदेश भी छिपा है। जैसे टूटे हुए कांच को जोड़कर एक भव्य कलाकृति में बदला जा सकता है, ठीक उसी तरह जीवन में टूटी हुई उम्मीदों को फिर से संवारा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस निर्माण का मूल विचार यह दिखाना है कि बिखर चुकी चीजों से भी कुछ सुंदर और अर्थपूर्ण रचा जा सकता है, जिससे दर्शन के लिए आने वाले लोगों को एक सकारात्मक माहौल मिल सके। पूजा समिति के अध्यक्ष सुकांत भट्टाचार्य ने बताया कि इस रचनात्मक थीम के लिए लगभग 40 लाख रुपये का बजट तय किया गया है और उन्हें भरोसा है कि यह पंडाल दर्शकों को खूब पसंद आएगा।
आधुनिक तकनीक और 3D लाइट शो का आकर्षण
अगरतला की एक अन्य प्रमुख पूजा समिति, ऐकतान युबा संस्था, इस बार पंडाल में तकनीकी नवाचार पेश करने जा रही है। समिति ने लगभग 10 मिनट के एक भव्य 3D प्रोजेक्शन लाइट शो की योजना बनाई है। इस प्रस्तुति में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर जैसे असुरों का वध करने की पौराणिक गाथा और भगवान शिव के सृष्टि तथा संहार से जुड़े तांडव नृत्य को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। समिति के सचिव दीप दासगुप्ता ने कहा कि यह विशेष प्रस्तुति उनके पंडाल का मुख्य केंद्र रहेगी और बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करेगी।
राज्य की 18 ऐतिहासिक इमारतों का संगम
शिवनगर मॉडर्न क्लब ने अपनी सजावट के जरिए त्रिपुरा की समृद्ध वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का फैसला किया है। क्लब अपने पंडाल में राज्य की 18 प्रतिष्ठित संरचनाओं की प्रतिकृतियां प्रदर्शित करेगा। क्लब के अध्यक्ष प्रदीप कुमार घोष ने जानकारी दी कि इन संरचनाओं में उज्जयंत पैलेस, उनाकोटी का पुरातात्विक स्थल, नीरमहल, माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर और महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट जैसी प्रमुख जगहें शामिल होंगी। इस पहल का मुख्य मकसद नई पीढ़ी और बच्चों को राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों से परिचित कराना है।
राजस्थानी राजमहल और लोक संगीत की गूंज
दूसरी तरफ, देशबंधु चित्तरंजन क्लब में राजस्थान की शाही परंपराओं और लोक संस्कृति का नजारा दिखेगा। क्लब के प्रवक्ता प्रदीप दे ने बताया कि उनका पंडाल राजस्थान के एक भव्य राजमहल के स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही जयपुर से एक सांस्कृतिक दल को भी आमंत्रित किया गया है, जो पारंपरिक वेशभूषा में लोक वाद्यों के साथ प्रस्तुतियां देगा ताकि त्रिपुरा के लोग राजस्थान की पारंपरिक लोक कला का सीधा आनंद ले सकें।
























