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उदयपुर के शेफ ने जन्माष्टमी पर तरबूज पर उकेरी भगवान कृष्ण की मनमोहक आकृतिराजस्थान
4 सित॰ 2026, 10:39 am (21 दिन पहले)· 1

उदयपुर के शेफ ने जन्माष्टमी पर तरबूज पर उकेरी भगवान कृष्ण की मनमोहक आकृति

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उदयपुर के एक प्रतिभाशाली शेफ ने अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया है। शेफ हर्षवर्धन सिंह शक्तावत ने तरबूज पर चाकू की मदद से भगवान श्रीकृष्ण का बेहद खूबसूरत चेहरा उकेरा है, जो उनकी कला और भक्ति का अनूठा संगम है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर देश भर में धार्मिक उल्लास का माहौल है, जहां हर कोई अपने अंदाज में कान्हा की भक्ति में लीन नजर आ रहा है। मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है और कई जगहों पर आकर्षक झांकियां भी देखने को मिल रही हैं। इसी बीच राजस्थान के उदयपुर से एक बेहद खास और रचनात्मक मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय शेफ ने अपनी कला के जरिए कान्हा के प्रति अपनी अनूठी श्रद्धा प्रकट की है। उदयपुर के पास स्थित हिंता गांव के रहने वाले शेफ हर्षवर्धन सिंह शक्तावत ने एक तरबूज को अपना कैनवास बनाया और अपनी उंगलियों के कमाल से उस पर भगवान श्रीकृष्ण की आकृति को जीवंत कर दिया।

हर्षवर्धन ने इस कलाकृति को तैयार करने के लिए तरबूज की बाहरी हरी और भीतरी लाल परत का बहुत ही बारीकी से इस्तेमाल किया। चाकू और पेंसिल की मदद से उन्होंने तरबूज की सतह को तराशते हुए कान्हा का चेहरा तैयार किया। इस पूरी कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से हाथों से उकेरा गया है। इसमें किसी भी प्रकार की आधुनिक मशीन या प्रिंटिंग तकनीक का बिल्कुल भी सहारा नहीं लिया गया है। जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर तैयार की गई यह शानदार नक्काशी न केवल उनके बेहतरीन हुनर को बयां करती है, बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी आस्था को भी दर्शाती है।

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फलों पर कलाकारी से बनाई अपनी खास पहचान

उदयपुर के इस कलाकार के लिए फ्रूट कार्विंग अब महज एक शौक तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह उनकी पेशेवर पहचान का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। वह विशेष प्रकार के चाकू और कार्विंग टूल्स की सहायता से फलों की परतों को अलग-अलग गहराई तक काटकर बेहद खूबसूरत चेहरे और आकृतियां तराशने में माहिर हैं। हर्षवर्धन इससे पहले भी कई जानी-मानी हस्तियों और धार्मिक व्यक्तित्वों की तस्वीरें तरबूज पर उकेरकर सुर्खियां बटोर चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर उनकी तस्वीर तरबूज पर बनाई थी। इसके अलावा सालासर बालाजी महाराज, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, सद्गुरु ब्रह्मेशानंद आचार्य, स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और विनेश फोगाट की कलाकृतियां भी वह सफलतापूर्वक तैयार कर चुके हैं।

उनकी इस अद्भुत कला के दायरे में इतिहास और वर्तमान के कई दिग्गज चेहरे भी शामिल हैं। उन्होंने अपनी कलाकारी के जरिए महाराणा प्रताप, विराट कोहली, वसुंधरा राजे सिंधिया, उद्योगपति रतन टाटा, दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र और छत्रपति शिवाजी महाराज की आकृतियों को भी फलों पर उतारा है। उनकी यह कलाकारी हर किसी को हैरान कर देती है क्योंकि इसमें बेहद बारीकी और धैर्य की जरूरत होती है, जिसे वह अपनी मेहनत के दम पर बखूबी पूरा करते हैं।

होटल मैनेजमेंट से लेकर कला में महारत तक का सफर

उदयपुर से लगभग 56 किलोमीटर दूर स्थित हिंता गांव के रहने वाले हर्षवर्धन का यह सफर इतनी आसानी से यहां तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने चाचा के होटल में हाथ बंटाने से की थी, जिससे उनका रुझान होटल इंडस्ट्री और कुकिंग की तरफ बढ़ा। इसके बाद उन्होंने इसी क्षेत्र को अपने करियर के रूप में चुनने का पक्का इरादा कर लिया। साल 2017 में उन्होंने सीईटीटी उदयपुर से होटल मैनेजमेंट का कोर्स पूरा किया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गोल्डन ट्यूलिप में ट्रेनिंग हासिल की और यान वेलनेस रिसोर्ट में अपनी पहली नौकरी की शुरुआत की।

होटल में कामकाज संभालने के दौरान ही उन्होंने कुकिंग के साथ-साथ कार्विंग आर्ट सीखने में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई। हर्षवर्धन इस बात का जिक्र करते हैं कि उनके सीनियर्स मनोज सिंह नेगी और चैन सिंह झाला ने उन्हें इस अनोखी कला में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया। करीब एक साल तक लगातार कड़ी मेहनत और रोजाना अभ्यास करने के बाद उन्होंने फलों पर अलग-अलग तरह की पेचीदा आकृतियां उकेरने में पूरी तरह महारत हासिल कर ली।

रॉयल राजस्थान शेफ सोसायटी से जुड़ाव और कला का उद्देश्य

वर्तमान समय में हर्षवर्धन होटल इंडस्ट्री में एक कुशल शेफ के साथ-साथ एक बेहतरीन कार्विंग आर्टिस्ट के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वह उदयपुर के एक प्रतिष्ठित होटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और हाल ही में उन्हें रॉयल राजस्थान शेफ सोसायटी की टीम का भी हिस्सा बनाया गया है। अपनी इस शानदार कला के लिए उन्हें कई स्तरों पर पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। हर्षवर्धन का मानना है कि जन्माष्टमी का यह पर्व उनके लिए भगवान कृष्ण के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करने का एक बेहतरीन माध्यम है।

जिस तरह आम भक्त भगवान को फूल अर्पित करते हैं, उनका भोग लगाते हैं और उनका विशेष शृंगार करते हैं, उसी प्रकार उन्होंने अपने हुनर को ही अपनी सच्ची भक्ति का जरिया बना लिया है। उनका यह भी कहना है कि यदि उनकी बनाई गई भगवान कृष्ण की यह मनमोहक आकृति देखकर किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती है और उसके मन में कान्हा के प्रति भक्ति का भाव जागृत हो जाता है, तो यही उनकी कला की सबसे बड़ी और सच्ची सफलता होगी।

सवाल-जवाब

हर्षवर्धन सिंह शक्तावत कहाँ के रहने वाले हैं?
वह उदयपुर के पास स्थित हिंता गांव के रहने वाले हैं।
जन्माष्टमी के मौके पर उन्होंने कलाकृति किस चीज पर बनाई?
उन्होंने एक तरबूज की सतह पर चाकू और पेंसिल की मदद से भगवान श्रीकृष्ण का चेहरा उकेरा है।
इस कलाकृति को बनाने में किस मशीन का इस्तेमाल किया गया?
इस पूरी कलाकृति को पूरी तरह से हाथ से तैयार किया गया है और इसमें किसी भी मशीन या प्रिंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
हर्षवर्धन ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स कब पूरा किया था?
उन्होंने वर्ष 2017 में सीईटीटी उदयपुर से होटल मैनेजमेंट का कोर्स पूरा किया था।
इससे पहले उन्होंने किस प्रधानमंत्री की तस्वीर बनाई थी?
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनकी तस्वीर तरबूज पर उकेरी थी।
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