आर्थिक तंगी और सही मार्गदर्शन के अभाव में ग्रामीण व वंचित क्षेत्रों के युवा अक्सर अपने सपनों को साकार करने से चूक जाते हैं। समाज के सबसे गरीब तबकों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक विशेष पहल शुरू की गई है। जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत जिले के हजारों बेरोजगार युवाओं को तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने का व्यापक खाका तैयार किया गया है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के माध्यम से संचालित यह योजना केवल पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार लाना है।
अभियान का दायरा और 12 हजार युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य
अमेठी में जीरो पॉवर्टी अभियान के अंतर्गत कुल 12 हजार गरीब परिवारों के युवाओं को हुनरमंद बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए आईटीआई प्रशासन की ओर से व्यापक सर्वे और संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने दूरभाष के जरिए अब तक लगभग 8 हजार परिवारों से सीधा संवाद स्थापित किया है। इस बातचीत के दौरान परिवारों की आर्थिक स्थिति और युवाओं की रोजगार संबंधी आवश्यकताओं का गहराई से आकलन किया गया।
टेलीफोनिक सर्वे के प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,792 ऐसे युवाओं को चिह्नित किया जा चुका है जो वर्तमान में बेरोजगार हैं और किसी हुनर को सीखकर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं। ये युवा तकनीकी या व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद न केवल नौकरी करने के इच्छुक हैं, बल्कि स्वयं का छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार का संबल बनना चाहते हैं। आने वाले दिनों में बचे हुए लक्षित परिवारों से भी संपर्क स्थापित कर इच्छुक उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाएगी।
योग्यता और रुचि के आधार पर ट्रेडों का चयन
चिह्नित किए गए युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता, व्यक्तिगत रुचि और कार्य क्षमता के अनुसार अलग-अलग व्यावसायिक ट्रेडों में दाखिला दिया जाएगा। इसके तहत मुख्य रूप से इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, कंप्यूटर ऑपरेटिंग, सिलाई और मोटर मैकेनिक जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। इसके अलावा स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप अन्य तकनीकी ट्रेडों में भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि प्रशिक्षण पूरा होते ही युवाओं को आसानी से काम मिल सके।
प्रशिक्षण की अवधि समाप्त होने के उपरांत युवाओं को केवल प्रमाण पत्र देकर छोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें रोजगार के वास्तविक अवसरों से जोड़ने के लिए परामर्श और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। जो युवा अपना स्वयं का कार्य शुरू करना चाहते हैं, उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। इससे युवाओं की कार्यकुशलता बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।
अति गरीब परिवारों का आर्थिक सशक्तिकरण
कौशल विकास मिशन से जुड़े संदीप कुमार ने इस विशेष पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अक्सर जागरूकता की कमी के कारण अति गरीब परिवार सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए जीरो पॉवर्टी अभियान विशेष रूप से उन्हीं परिवारों पर केंद्रित किया गया है जिन्हें अब तक किसी योजना की मदद नहीं मिल सकी थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मूल उद्देश्य केवल युवाओं को हुनर सिखाना भर नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से पूरी तरह सशक्त बनाना है। जब एक परिवार का युवा हुनरमंद होकर कमाने लगता है, तो पूरे परिवार का जीवन स्तर सुधरता है। सरकार की इस दूरगामी सोच से अमेठी के हजारों परिवारों में आर्थिक स्थिरता आएगी और क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।



















