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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा का नया दांव, मेधा कुलकर्णी को सौंपी सह प्रभारी पद की कमानभारत
24 सित॰ 2026, 10:09 am (33 दिन पहले)· 3

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा का नया दांव, मेधा कुलकर्णी को सौंपी सह प्रभारी पद की कमान

आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा सदस्य डॉ. मेधा कुलकर्णी को राज्य का सह प्रभारी नियुक्त किया है। वह मुख्य चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े के साथ मिलकर चुनावी बिसात बिछाएंगी।

आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक रणनीतियों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी नेतृत्व ने महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी को उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया है। राज्य के चुनावी मोर्चे पर वह मुख्य चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े के साथ मिलकर संगठन की कमान संभालेंगी। एक पूर्व प्राध्यापक और लंबे समय तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने वाली नेत्री को देश के सबसे बड़े राजनीतिक सूबे में तैनात किए जाने के फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।

संगठनात्मक निर्णय के पीछे काम कर रहे चार प्रमुख समीकरण

पार्टी की ओर से इस बड़ी नियुक्ति के पीछे कई रणनीतिक कारण साफ दिखाई दे रहे हैं। इनमें जातिगत संतुलन और महिला प्रतिनिधित्व का समीकरण सबसे ऊपर है। वर्तमान समय में डॉ. मेधा भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में सामाजिक संतुलन हमेशा से बेहद निर्णायक रहा है। वह एक सशक्त ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जानी जाती हैं और साथ ही महिला मुद्दों पर मुखरता से अपनी बात रखती रही हैं। ऐसे में आधी आबादी और प्रबुद्ध वर्ग के मतदाताओं के बीच पहुंच मजबूत करने के लिए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

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इसके अलावा उनकी पहचान एक प्रखर राष्ट्रवादी और हिंदुत्व की मजबूत पैरोकार के तौर पर भी रही है। अक्टूबर 2025 के दौरान वह उस समय चर्चा के केंद्र में आई थीं, जब उन्होंने पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा परिसर में नमाज पढ़े जाने का कड़ा विरोध किया था और उस स्थल को गोमूत्र से शुद्ध करवाया था। इस रुख से पारंपरिक समर्थकों के बीच उनकी छवि को काफी मजबूती मिली।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अनुशासित कार्यशैली भी उनकी तैनाती की बड़ी वजह बनी है। सक्रिय राजनीति में आने से पहले वह अध्यापन कार्य से जुड़ी थीं। उनके इसी लंबे अनुभव का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में बूथ स्तर के प्रबंधन को व्यवस्थित करने और प्रबुद्ध समाज को जोड़ने में किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्य चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े के साथ उनका पुराना प्रशासनिक और संगठनात्मक तालमेल रहा है। दोनों नेता महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं, जिससे चुनावी योजनाओं को धरातल पर उतारने और स्थानीय नेतृत्व से संवाद बनाने में आसानी होगी।

शिक्षा जगत से लेकर राजनीति तक का सफर

डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे की निवासी हैं। सार्वजनिक जीवन में उतरने से पहले उन्होंने अपनी मजबूत पहचान अकादमिक क्षेत्र में बनाई थी। उन्होंने वर्ष 1989 में पुणे स्थित अबासाहेब गरवारे कॉलेज से बीएससी की डिग्री पूरी की थी। उच्च शिक्षा के सफर को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 1991 में बीएड और फिर 1994 में एमएड की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा के प्रति उनका जुड़ाव लगातार बना रहा और वर्ष 2021 में उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की। राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पूर्व उन्होंने पुणे के कमिंस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन में सहायक प्राध्यापक के पद पर सेवाएं दीं।

पार्षद से संसद और उत्तर प्रदेश के चुनावी मंच तक

डॉ. मेधा कुलकर्णी का सार्वजनिक जीवन स्थानीय निकाय की राजनीति से शुरू हुआ था। वह पुणे महानगरपालिका में लगातार तीन बार पार्षद चुनी गईं, जहां उन्होंने जमीनी स्तर के नागरिक मुद्दों पर काम किया।

वर्ष 2014 से 2019 के दौरान उन्होंने पहली बार विधानसभा का रुख किया। 2014 के चुनावों में उन्होंने पुणे के कोथरुड विधानसभा क्षेत्र से बड़े अंतर से जीत दर्ज की और विधायक बनीं। इस कार्यकाल में उन्होंने अपने क्षेत्र के बुनियादी विकास कार्यों पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया था।

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने रणनीतिक बदलाव करते हुए उनका टिकट काटकर चंद्रकांत पाटिल को प्रत्याशी बनाया था। इस फैसले से शुरुआत में असंतोष जरूर दिखा, लेकिन उन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखी और संगठन में सक्रिय रहीं।

उनके इसी धैर्य और निष्ठा का सम्मान करते हुए पार्टी नेतृत्व ने फरवरी 2024 में उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा का सदस्य बनाया। इस कदम से क्षेत्रीय सामाजिक हलकों में भी सकारात्मक संदेश गया। इसके बाद मई 2026 में उनकी प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए संसद की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण संबंधी अहम समिति की अध्यक्षता सौंपी गई। अब सितंबर 2026 में पार्टी ने आगामी 2027 की चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी का बड़ा दायित्व दिया है।

सवाल-जवाब

डॉ. मेधा कुलकर्णी को उत्तर प्रदेश में क्या जिम्मेदारी दी गई है?
उन्हें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव प्रभारी कौन हैं?
महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव प्रभारी हैं।
डॉ. मेधा कुलकर्णी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या रही है?
उन्होंने बीएससी, बीएड, एमएड के बाद 2021 में पीएचडी की डिग्री हासिल की और कमिंस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन में सहायक प्राध्यापक भी रहीं।
उनका संसदीय और विधायी करियर कैसा रहा है?
वह तीन बार पुणे में पार्षद, 2014 से 2019 तक कोथरुड से विधायक रहीं और फरवरी 2024 में महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद चुनी गईं।
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टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·32 दिन पहले

अध्यापन से सीधा राजनीति में आकर इतने बड़े राज्य को संभालना क्या सच में इतना आसान होगा?

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

मेधा कुलकर्णी को यूपी की जिम्मेदारी मिलना बड़ा कदम है। पुणे में उनके साथ काम करने का पुराना अनुभव है, वह ज़मीन पर बहुत सख्त मेहनत करती हैं।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·32 दिन पहले

रविकेश जी, ज़मीन पर मेहनत की बात तो ठीक है, पर क्या महाराष्ट्र से आने वाले नेताओं के लिए यूपी की स्थानीय सियासत को समझना और संभालना इतना आसान होगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

पुणे में जब वो शनिवारवाड़ा वाला मामला हुआ था, तब मैं वहीं था और माहौल सच में बहुत गरम हो गया था। अब वही तेवर उत्तर प्रदेश चुनाव में देखने को मिलेंगे.

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

करण भाई, शनिवारवाड़ा वाले किस्से से जो तेवर चर्चा में आए थे, अब देखते हैं यूपी के चुनावी मैदान में उनका असर कितना टिकता है।

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