उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है, क्योंकि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी दलों के बीच बैठकों और बयानों का दौर शुरू हो चुका है। इसी सिलसिले में समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी पार्टी की तरफ से आगामी चुनावों के लिए सीटों के तालमेल का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। इस घोषणा के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि दोनों प्रमुख दल जल्द ही आधिकारिक तौर पर सीटों के बंटवारे पर मुहर लगा सकते हैं।
घोषणापत्र जारी करने की तारीख सामने आई
सपा सांसद रामाशंकर राजभर ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए साफ किया कि पार्टी आगामी 26 नवंबर को अपना आधिकारिक घोषणापत्र जनता के सामने रखेगी। हालांकि उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों के बीच किस संख्या में और कौन सी विधानसभा सीटें बांटी जाएंगी, लेकिन उन्होंने यह जरूर भरोसा दिलाया कि फार्मूले को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसकी घोषणा बहुत जल्द कर दी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घोषणा से चुनाव से पहले पार्टी की तैयारियों को एक स्पष्ट दिशा मिलेगी।
कांग्रेस की तरफ से रखी गई हैं बड़ी मांगें
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी राज्य में अपनी हिस्सेदारी को लेकर लगातार दावे पेश किए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी दी थी कि पार्टी ने राज्य में दो सौ से ज्यादा सीटों पर अपना दावा पेश किया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि उनका यह दावा संगठन की जमीनी मजबूती और जनता के बीच लगातार बढ़ रहे प्रभाव पर आधारित है। पार्टी का यह भी कहना है कि आपसी बातचीत के जरिए एक सम्मानजनक समझौते पर पहुंचना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।
लोकसभा चुनाव के नतीजों का दिया जा रहा है हवाला
कांग्रेस पार्टी अपने दावों के समर्थन में बीते लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख कर रही है। नेताओं का कहना है कि पिछले चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन ने जो तैंतीस से ज्यादा सीटें हासिल की थीं, वह राज्य में उनके मजबूत आधार और जनता के समर्थन की तस्दीक करता है। इसके साथ ही राहुल गांधी के नेतृत्व और उनके कार्यक्रमों के प्रभाव को भी राज्य में पार्टी की स्थिति बेहतर होने का एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि वे लगातार अपने सांगठनिक ढांचे को जिला और बूथ स्तर पर धार दे रहे हैं, जिससे आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
समिति गठन और आपसी बयानों में अंतर
हालांकि समाजवादी पार्टी के सांसद द्वारा सीट फार्मूला तय होने का दावा किया जा रहा है, वहीं कांग्रेस की तरफ से यह कहा गया था कि सीटों के बंटवारे पर उचित चर्चा के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। इस तरह दोनों दलों के नेताओं के बयानों में हल्की भिन्नता भी देखने को मिली है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि अभी कुछ बिंदुओं पर अंदरखाने मंथन चल रहा है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय स्तर के पदाधिकारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हर पहलू पर विचार करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
आगे की राजनीतिक रणनीतियां और नजरें
फिलहाल दोनों दलों के बीच सीटों के आधिकारिक बंटवारे की कोई अंतिम सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसके चलते तमाम तरह के कयासों का बाजार गर्म है। विपक्षी खेमे के भीतर चल रही इन वार्ताओं के बीच भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की तरफ से भी इस गठबंधन को लेकर लगातार बयानबाजी की जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आपसी मतभेदों या चर्चाओं को सुलझाकर कब तक संयुक्त रूप से अपने चुनावी रोडमैप और उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करती हैं।
























