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उत्तराखंड के नैनीताल में बेटियों का कमाल, रामलीला के मंच पर भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभा रहीं बालिकाएंउत्तराखंड
16 अक्तू॰ 2026, 2:27 pm (22 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड के नैनीताल में बेटियों का कमाल, रामलीला के मंच पर भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभा रहीं बालिकाएं

नैनीताल की ऐतिहासिक रामलीला में बेटियां सिर्फ महिला किरदार ही नहीं, बल्कि भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख पुरुष पात्रों को भी जीवंत कर रही हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम हो रही है।

उत्तराखंड के नैनीताल शहर की ऐतिहासिक रामलीला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा केंद्र बनती जा रही है। मल्लीताल स्थित श्री राम सेवक सभा की इस रामलीला में मंच पर नजर आने वाले लगभग 70 प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं। खास बात यह है कि अब ये बेटियां केवल सीता, कैकेयी या मंदोदरी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे बड़े पुरुष किरदारों को भी पूरी शिद्दत के साथ निभा रही हैं। नैनीताल से शुरू हुई इस अनोखी परंपरा का असर अब कुमाऊं के दूसरे इलाकों की रामलीलाओं में भी साफ दिखाई देने लगा है, जो समाज में बदलते नजरिए और बालिकाओं के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।

भगवान राम के रूप में अनुष्का कोहली का लंबा सफर

श्री राम सेवक सभा की रामलीला में भगवान राम का मुख्य किरदार निभाने वाली अनुष्का कोहली पिछले 14 वर्षों से इस मंच से जुड़ी हुई हैं और लगातार अभिनय कर रही हैं। उनके परिवार की अन्य बहनें भी इस सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा हैं और अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर इसे आगे बढ़ा रही हैं। अनुष्का ने साझा किया कि पहले उनकी चारों बहनें एक साथ रामलीला में अभिनय करती थीं, हालांकि इस साल किसी वजह से एक बहन मंचन का हिस्सा नहीं बन पाई हैं। उनकी एक बहन रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाती हैं, जबकि दूसरी बहन शूर्पणखा, शबरी और कैकेयी जैसे विभिन्न पात्रों को मंच पर जीवंत करती हैं। उनके अनुसार, वक्त के साथ इस आयोजन में बालिकाओं की संख्या और उनकी भागीदारी में काफी इजाफा हुआ है और आज लड़कियां हर तरह के पुरुष पात्रों को भी पूरी खूबी के साथ निभा रही हैं। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख किरदारों में बेटियों का यह अभिनय देखने आने वाले दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है।

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सीता के रूप में अनुसूया वर्मा का अनुभव

रामलीला के मंच पर माता सीता का अहम किरदार निभा रही अनुसूया वर्मा पिछले तीन वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बनी हुई हैं। उनका कहना है कि श्री राम सेवक सभा के अंतर्गत रामलीला का पूरा माहौल बेहद सकारात्मक और encouraging है, जहां बालिकाओं को लगातार आगे बढ़ने और अपनी कला को दिखाने का पूरा अवसर मिलता है। अनुसूया बताती हैं कि उन्हें हर साल रामलीला का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें अपनी अभिनय कला को प्रदर्शित करने का बेहतरीन मंच मिलता है। उनके विचार में, बालिकाएं हर तरह के किरदारों को पूरी कुशलता से निभा सकती हैं और ऐसे आयोजनों से उनका आत्मविश्वास काफी मजबूत होता है, जिससे उन्हें अपनी छिपी हुई क्षमताओं को समझने का मौका मिलता है।

इतिहास और पुरानी परंपराओं की झलक

नैनीताल की यह रामलीला कोई नई नहीं है, बल्कि इसका इतिहास 129 साल पुराना है और एक समय ऐसा भी था जब इस मंच से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई जाती थी। समय के इस लंबे सफर में इस मंच ने कई बदलाव देखे हैं। इस वर्ष रामलीला में मंदोदरी की भूमिका अदा कर रही निवेदिता उप्रेती पहली बार एक कलाकार के रूप में इस मंच से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही नैनीताल की रामलीला देखती आ रही हैं और जब भी वह मंच पर लड़कियों को भगवान राम या लक्ष्मण जैसे बड़े पुरुष किरदार निभाते देखती थीं, तो उन्हें अंदर से काफी खुशी होती थी। इसी प्रेरणा से उन्होंने भी इस साल रामलीला में भाग लेने का पक्का मन बनाया।

युवाओं के लिए प्रेरणा और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

निवेदिता उप्रेती ने बताया कि श्री राम सेवक सभा के सहयोग से उन्हें इस साल मंदोदरी का किरदार निभाने का मौका मिला, जिससे वह बेहद प्रसन्न हैं। उनका मानना है कि यह रामलीला महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें अपनी प्रतिभा को खुलकर सबके सामने लाने का एक सशक्त माध्यम प्रदान करती है। उन्होंने आज के युवाओं और Gen Z पीढ़ी से अपील की है कि उन्हें ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, ताकि हमारी प्राचीन परंपराएं भी सुरक्षित रहें और अपनी कला को भी निखारा जा सके। पिछले 30 से 40 वर्षों के अंतराल में महिलाओं की इस आयोजन में भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

पार्वती बिष्ट और लीला ठठोला का योगदान

श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी मुकेश जोशी ‘मंटू’ इस बात पर रोशनी डालते हैं कि पिछले तीन से चार दशकों में महिलाओं और बालिकाओं की उपस्थिति इस रामलीला में बहुत तेजी से बढ़ी है। उन्होंने याद किया कि नैनीताल में पार्वती बिष्ट और लीला ठठोला जैसी कई महिलाओं ने अलग-अलग दशकों में रामलीला के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है। स्थानीय बालिकाओं की इस लगातार सक्रिय भागीदारी ने इस सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक मजबूती प्रदान की है। मुकेश जोशी के अनुसार, अब केवल नैनीताल तक ही नहीं, बल्कि आसपास के तमाम क्षेत्रों में होने वाली रामलीलाओं में भी महिलाएं और बेटियां प्रमुख किरदारों की भूमिका संभाल रही हैं। इसे समाज में आ रहे एक बड़े सकारात्मक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह बदलाव न केवल धार्मिक परंपराओं को एक नई ऊर्जा दे रहा है, बल्कि हमारी बेटियों को आगे बढ़ने के नए आसमान भी मुहैया करा रहा है।

सवाल-जवाब

नैनीताल की इस रामलीला में कितने प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं?
मल्लीताल स्थित श्री राम सेवक सभा की रामलीला में करीब 70 प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं।
अनुष्का कोहली रामलीला के मंच पर कौन सा किरदार निभा रही हैं?
अनुष्का कोहली रामलीला में भगवान राम की भूमिका निभा रही हैं और वह पिछले 14 वर्षों से अभिनय कर रही हैं।
अनुसूया वर्मा पिछले कितने वर्षों से रामलीला का हिस्सा हैं?
अनुसूया वर्मा पिछले तीन वर्षों से रामलीला में माता सीता का किरदार निभा रही हैं।
इस वर्ष मंदोदरी का किरदार कौन निभा रहा है?
निवेदिता उप्रेती इस वर्ष रामलीला में मंदोदरी की भूमिका निभा रही हैं और वह पहली बार कलाकार के रूप में इसमें शामिल हुई हैं।
नैनीताल की रामलीला का इतिहास कितना पुराना है?
नैनीताल की यह ऐतिहासिक रामलीला 129 साल पुरानी है।
श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी कौन हैं जिन्होंने महिलाओं की भागीदारी पर बात की?
मुकेश जोशी 'मंटू' श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·21 दिन पहले

नैनीताल की रामलीला में लड़कियों को भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाते देखना सचमुच दिल को छू लेने वाला है। जिस तरह से ये बेटियां मंच पर आत्मविश्वास के साथ बड़े पुरुष किरदार निभा रही हैं, वह काबिले तारीफ है। इस तरह के सांस्कृतिक मंच न सिर्फ कला को बढ़ावा देते हैं, बल्कि महिलाओं के स्टाइल और कॉन्फिडेंस को भी एक नया आयाम देते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·21 दिन पहले

नैनीताल की इस रामलीला में बेटियों को राम और लक्ष्मण के रूप में देखकर बहुत अच्छा लगा। 129 साल पुरानी परंपरा में ऐसा बदलाव वाकई कमाल है। क्या कुमाऊं के बाकी इलाकों में भी दर्शक इसे उतनी ही सहजता से स्वीकार कर रहे हैं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

रवि जी, सच कहा आपने। जब मैं पिछली बार नैनीताल गया था, तब मैंने खुद इन बालिकाओं को अभ्यास करते देखा था, गजब का आत्मविश्वास है इनमें।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

लड़कियों का राम बनना अच्छी बात है, पर इससे परंपरा और आस्था से जुड़े पुराने नियम पूरी तरह पीछे छूट जाते हैं क्या?

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

रोहन भाई, परंपराएं समय के साथ बदलती हैं। क्या आने वाले सालों में पुरुष भी महिला पात्रों को निभाते दिखेंगे?

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