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उत्तराखंड में महालक्ष्मी किट वितरण पर विवाद, प्रसूताओं को बांटी गई एक्सपायर्ड सामग्रीउत्तराखंड
1 अक्तू॰ 2026, 4:59 pm (36 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड में महालक्ष्मी किट वितरण पर विवाद, प्रसूताओं को बांटी गई एक्सपायर्ड सामग्री

देहरादून में प्रसूता को बांटी गई महालक्ष्मी किट में मियाद पूरी कर चुके तेल, क्रीम और खाद्य पदार्थ मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अधिकारियों को नए निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड सरकार द्वारा जच्चा और बच्चा के पोषण और स्वास्थ्य को सहारा देने के मकसद से चलाई जा रही महालक्ष्मी किट योजना प्रशासनिक लापरवाही की जद में आ गई है। नवजात बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं के उपयोग के लिए तैयार की गई इन किटों में समय सीमा पार कर चुका सामान दिए जाने का मामला सामने आया है। इस तरह के पुराने उत्पादों का इस्तेमाल प्रसूता और नवजात शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है, जिसको लेकर अब व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

देहरादून के गढ़ी कैंट में सामने आई गंभीर लापरवाही

लापरवाही की यह सीधी घटना राजधानी देहरादून के गढ़ी कैंट क्षेत्र से सामने आई। यहां 7 सितंबर को एक धात्री महिला को आधिकारिक वितरण के तहत महालक्ष्मी किट दी गई थी। घर पहुंचकर जब परिजनों ने डिब्बे को खोलकर उसमें रखी सामग्री की जांच की, तो उसमें मौजूद शरीर पर लगाने वाला तेल, क्रीम और खाने-पीने का सामान अपनी मियाद पूरी कर चुका था। पीड़िता के अनुसार, उस सामग्री की अंतिम वैध तारीख 30 अगस्त ही दर्ज थी। यानी वैधता खत्म होने के एक हफ्ते से भी अधिक समय बाद यह किट महिला को सौंप दी गई थी।

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महालक्ष्मी किट में शामिल वस्तुएं और उनका मूल्य

योजना के नियमों के मुताबिक, प्रत्येक लाभार्थी को लगभग 3 हजार रुपये मूल्य की सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें कुल 23 तरह के जरूरी सामान रखे जाते हैं। इनमें से 13 उत्पाद विशेष रूप से गर्भवती और धात्री महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं, जिनमें 250 ग्राम सूखी खुमानी, छुआरा, सरसों का तेल, नहाने का साबुन और कपड़े धोने का साबुन शामिल हैं। इसके अलावा 9 अन्य चीजें नवजात शिशु की देखभाल के लिए होती हैं, जिनमें शिशु के उपयोग का तेल, साबुन, क्रीम तथा 2 जोड़ी कपड़े शामिल किए जाते हैं।

निदेशालय ने जारी किया आदेश, व्यवस्था सुधारने की कवायद

मामले के सार्वजनिक होने और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने के बाद महिला एवं बाल विकास निदेशालय हरकत में आया। फजीहत से बचने के लिए निदेशालय स्तर पर 25 सितंबर को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया, जो प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों यानी DPO को भेजा गया है। इस आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वितरण केंद्रों पर ‘फर्स्ट इन फर्स्ट आउट’ (FIFO) व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया जाए। इसका सीधा मतलब यह है कि जो किट या सामग्री पहले आई है अथवा जिसकी एक्सपायरी नजदीक है, उसे प्राथमिकता के आधार पर पहले वितरित किया जाए। साथ ही संपूर्ण वितरण और निगरानी व्यवस्था को पुख्ता बनाने को कहा गया है।

आंगनबाड़ी राशन और भंडारण प्रणाली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

राज्य में पोषण योजनाओं के भंडारण और वितरण में अनियमितता का यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले राशन को लेकर शिकायतें आती रही हैं। पूर्व में केंद्रों से बांटे जाने वाले अंडे, सत्तू और हलवे की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं और स्थानीय नागरिक अमानक व खराब पोषण सामग्री दिए जाने की बात उठाते रहे हैं। अब देखना होगा कि उच्च स्तर से जारी इन नए दिशा-निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर वितरण प्रणाली कितनी पारदर्शी और सुरक्षित हो पाती है।

सवाल-जवाब

महालक्ष्मी किट में एक्सपायरी सामान मिलने का मामला कहां सामने आया?
यह मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के गढ़ी कैंट इलाके में सामने आया, जहां 7 सितंबर को एक धात्री महिला को किट दी गई थी।
किट में कौन सा सामान एक्सपायर पाया गया?
किट के अंदर रखा तेल, त्वचा क्रीम और खाद्य सामग्री एक्सपायर पाई गई, जिसकी वैधता 30 अगस्त को ही समाप्त हो चुकी थी।
महालक्ष्मी किट के तहत लाभार्थियों को क्या-क्या दिया जाता है?
इस किट में लगभग 3 हजार रुपये मूल्य की कुल 23 वस्तुएं होती हैं, जिनमें माताओं के लिए 13 और नवजात शिशु के लिए 9 उत्पाद शामिल हैं।
माताओं और बच्चों के लिए किट में मुख्य रूप से क्या वस्तुएं शामिल हैं?
महिलाओं के लिए सूखी खुमानी, छुआरा, सरसों का तेल व साबुन और शिशु के लिए तेल, साबुन, क्रीम तथा 2 जोड़ी कपड़े शामिल हैं।
लापरवाही उजागर होने के बाद विभाग ने क्या निर्देश दिए हैं?
महिला एवं बाल विकास निदेशालय ने 25 सितंबर को सभी DPO को पत्र भेजकर 'फर्स्ट इन फर्स्ट आउट' (FIFO) व्यवस्था लागू करने और निगरानी मजबूत करने का आदेश दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·35 दिन पहले

तीस अगस्त की एक्सपायरी वाली किट सात सितंबर को थमा दी, कमाल का प्रशासनिक ध्यान है। जानबूझकर ऐसा किया या आंखें बंद करके बांटते रहे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

30 अगस्त की एक्सपायरी वाली किट 7 सितंबर को बांटी जा रही है, मतलब साफ है कि सरकारी गोदामों में कोई सुध लेने वाला नहीं है। नवजात की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त के बाहर है।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन जी, लापरवाही तो साफ है, पर मुझे लगता है कि यह कोई सोची-समझी साजिश नहीं बल्कि कर्मचारियों की सुस्ती है। हालांकि जान जोखिम में डालना फिर भी गलत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

प्रसूताओं को एक्सपायर्ड सामान मिलना लापरवाही है, पर सिर्फ डीटीओ को आदेश देने से क्या होगा? जब तक गोदाम से माल निकलने से पहले कोई जांच नहीं करेगा, तब तक कागजी निर्देश बदलते रहेंगे पर ज़मीनी हालात वैसे ही रहेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मैंने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी देखा है कि जब तक ज़मीनी स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, गोदामों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक ऐसी लापरवाही होती रहेगी।

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