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उत्तराखंड में पूर्व अग्निवीरों के लिए सीधा रास्ता, राज्य की नौकरियों में परीक्षा और शारीरिक टेस्ट से मिलेगी छूटउत्तराखंड
2 सित॰ 2026, 8:32 am (66 दिन पहले)· 4

उत्तराखंड में पूर्व अग्निवीरों के लिए सीधा रास्ता, राज्य की नौकरियों में परीक्षा और शारीरिक टेस्ट से मिलेगी छूट

गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद उत्तराखंड सरकार पूर्व-अग्निवीरों को राज्य की भर्तियों में बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत 4 साल की सेवा पूरी करने वाले जवानों को लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता और मानक जांच से छूट मिल सकती है।

उत्तराखंड सरकार राज्य के पूर्व-अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों के दरवाजे आसान करने जा रही है। 4 साल का सैन्य कार्यकाल पूरा करके लौटने वाले युवाओं को राज्य की सिविल सेवाओं और सुरक्षा बलों की भर्तियों में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता और शारीरिक मानक परीक्षा से पूरी छूट दी जा सकती है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा भेजी गई विशेष सिफारिश के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने भर्ती नियमों में संशोधन की कवायद तेज कर दी है। इस कदम से सेना से लौटने वाले जवानों को सिविल भर्तियों की थकाऊ चयन प्रक्रियाओं में दोबारा 0 से शुरुआत नहीं करनी पड़ेगी।

गृह मंत्रालय की सिफारिश और भर्ती छूट का स्वरूप

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को जो दिशा-निर्देश भेजे हैं, उनके तहत 4 साल का सेवा काल पूरा कर चुके अग्निवीरों को राज्य की चयन प्रक्रियाओं के कई कठिन चरणों से मुक्ति देने का प्रस्ताव है। सामान्य तौर पर सेना से बाहर आने के बाद युवाओं को पुलिस या अन्य विभागों में भर्ती होने के लिए दोबारा किताबों में सिर खपाकर लिखित परीक्षा पास करनी पड़ती है और 5 किलोमीटर की दौड़ जैसे कड़े शारीरिक टेस्ट से गुजरना पड़ता है। नए नियमों के लागू होने के बाद पूर्व-अग्निवीरों को लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और शारीरिक मानक परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनका सीधी भर्ती के जरिए समायोजन हो सकेगा।

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केंद्र सरकार का तर्क: दोहराव और समय की बर्बादी पर रोक

इस नीतिगत सिफारिश के पीछे केंद्रीय गृह मंत्रालय का तर्क बेहद व्यावहारिक है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन को पत्र लिखकर भर्ती नियमावली में आवश्यक बदलाव करने की सलाह दी है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अग्निवीर योजना के तहत थलसेना, नौसेना या वायुसेना में शामिल होते समय युवा पहले ही देश के सबसे कठिन शारीरिक और चिकित्सकीय मानकों को पार करते हैं। इसके अलावा 4 वर्षों तक चलने वाली कठोर सैन्य ट्रेनिंग, अनुशासित जीवनशैली और सामरिक प्रशिक्षण उनके कौशल को पूरी तरह तराश देता है। ऐसे में जो जवान सीमा पर देश की रक्षा के लिए हथियार उठा चुका है, उससे नागरिक पुलिस या अन्य सरकारी पदों के लिए दोबारा शारीरिक परीक्षा मांगना समय और संसाधनों की सरासर बर्बादी है।

कैबिनेट मंजूरी के लिए ड्राफ्ट तैयार, इन विभागों में मिलेगी प्राथमिकता

केंद्र से पत्र मिलने के बाद उत्तराखंड के शासन स्तर पर इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड के सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने बताया कि कार्मिक विभाग ने संबंधित महकमों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। मौजूदा सेवा नियमों में बदलाव के लिए एक औपचारिक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल यानी कैबिनेट की बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से उन सभी रिक्त पदों का ब्यौरा जुटाने को कहा है, जहाँ पूर्व-अग्निवीरों को विशेष आरक्षण या सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त किया जा सके। इस छूट का सबसे बड़ा फायदा पुलिस विभाग, आपदा प्रबंधन बल (SDRF), आबकारी विभाग और होमगार्ड जैसे महकमों में देखने को मिलेगा, जहाँ अनुशासित जवानों की तुरंत जरूरत होती है।

सैन्य बहुल राज्य उत्तराखंड के लिए इस फैसले का महत्व

देवभूमि उत्तराखंड देश के उन अग्रणी राज्यों में शुमार है जहाँ के लगभग हर दूसरे या तीसरे परिवार से कोई न कोई सदस्य भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा देता है। ऐसे में अग्निवीर योजना के तहत 4 साल बाद बाहर आने वाले 75% युवाओं के पुनर्वास और सम्मानजनक रोजगार को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा था। यदि उत्तराखंड कैबिनेट इस नियमावली संशोधन को मंजूरी प्रदान कर देती है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा। इस फैसले से न सिर्फ पूर्व-अग्निवीरों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि उत्तराखंड सरकार को भी बड़ा प्रशासनिक फायदा होगा। राज्य के सुरक्षा बलों और पुलिस महकमे को बिना किसी अतिरिक्त प्रशिक्षण खर्च के पहले से पूरी तरह प्रशिक्षित, शारीरिक रूप से फिट और अनुशासित जवान तत्काल उपलब्ध हो सकेंगे।

सवाल-जवाब

किस मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार को अग्निवीरों के लिए नियम बदलने की सिफारिश भेजी है?
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने उत्तराखंड सरकार को भर्ती नियमावली में बदलाव की सिफारिश भेजी है।
पूर्व-अग्निवीरों को राज्य की सरकारी नौकरियों में किन परीक्षाओं से छूट मिलने का प्रस्ताव है?
प्रस्ताव के तहत पूर्व-अग्निवीरों को लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और शारीरिक मानक परीक्षा से छूट दी जा सकती है।
गृह मंत्रालय ने लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट देने का क्या कारण बताया है?
गृह मंत्रालय के अनुसार अग्निवीर सेना में कठिन शारीरिक परीक्षण पास कर चुके होते हैं और 4 साल की कठोर ट्रेनिंग लेते हैं, इसलिए दोबारा शारीरिक परीक्षा लेना समय की बर्बादी है।
उत्तराखंड सरकार किन विभागों में पूर्व-अग्निवीरों को समायोजित करने की योजना बना रही है?
राज्य सरकार पुलिस विभाग, आपदा प्रबंधन बल (SDRF), आबकारी विभाग और होमगार्ड जैसे महकमों में पूर्व-अग्निवीरों को समायोजित करने पर विचार कर रही है।
नियमावली संशोधन के लिए उत्तराखंड प्रशासन का अगला कदम क्या है?
कार्मिक विभाग संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श करके एक ड्राफ्ट तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·65 दिन पहले

गृह मंत्रालय की इस सिफारिश से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सुरक्षा बलों के पुनर्गठन को गति मिलेगी। पूर्व-अग्निवीरों के सीधे समायोजन से पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को तत्काल एक अनुशासित और प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद सेवा नियमावली में बदला जाएगा, तो अन्य सामान्य अभ्यर्थियों के साथ संतुलन बनाने के लिए रोस्टर और आरक्षण प्रणाली का कानूनी खाका किस प्रकार तैयार किया जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·65 दिन पहले

उत्तराखंड में पूर्व अग्निवीरों के लिए यह सीधी भर्ती व्यवस्था लागू होने से राज्य के पुलिस और प्रशासनिक महकमों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी तेज़ी से पूरी होगी। चार साल की सैन्य सेवा के बाद लौटने वाले इन युवाओं को सिविल परीक्षाओं की लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े, इसके लिए कार्मिक विभाग द्वारा कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव लाने की यह कवायद व्यावहारिक है। हालांकि, सेवा नियमावली में संशोधन के दौरान सामान्य वर्ग के अन्य योग्य युवाओं के हितों और आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों के बीच संतुलन साधना राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

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