देहरादून में अगस्त का महीना समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चालक, परिचालक और अन्य सहायक स्टाफ समेत करीब 1800 से 2000 कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। इस वजह से कर्मचारियों के परिवारों पर गहरा आर्थिक संकट मंडरा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि कर्मचारियों के पास अपने घर का दैनिक खर्च चलाने और बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। मजबूरी के इस आलम में कुछ कर्मचारी निगम की नौकरी छोड़कर मजदूरी करने तक को मजबूर हो चुके हैं।
त्योहार के सीजन में कर्मचारियों की बढ़ी परेशानी
सामने रक्षाबंधन का पावन त्योहार है, लेकिन वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के पास अपने घर जाने तक के पैसे नहीं हैं। कर्मचारी नमन शर्मा ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि खाली हाथ होने की वजह से भाइयों के सामने त्योहार पर घर पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। वहीं एक अन्य कर्मचारी मुकेश नैथानी ने स्पष्ट किया कि लगभग दो हजार परिवारों के सामने सीधे तौर पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि कुछ कर्मचारियों का बकाया वेतन जारी किया गया है, लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारी अब भी खाली हाथ हैं। आम यात्रियों की सहूलियत का ध्यान रखते हुए कर्मचारियों ने फिलहाल आंदोलन को सीमित रखा है। पिछले 6 दिनों से वे रोजाना केवल दो घंटे का शांतिपूर्ण धरना देते हैं और उसके तुरंत बाद अपने काम पर लौट आते हैं ताकि बस संचालन बाधित न हो।
बीमारी की दवाइयों तक के पैसे नहीं
वेतन संकट का सीधा असर कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। निगम कर्मचारी संजय कुमार शर्मा ने बताया कि वे बीपी और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। वेतन न मिलने के कारण वे अपने इलाज के लिए जरूरी दवाइयां तक नहीं खरीद पा रहे हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है। संजय अपने परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य हैं और उनके छोटे बच्चे हैं। ऐसी स्थिति में परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है। कई अन्य कर्मचारी भी इसी तरह की पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
यूनियन की अधिकारियों को दो टूक
उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी मंडलीय मंत्री दिनेश सती ने इस पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने भोजन का संकट पैदा हो चुका है। सती ने बताया कि इस संबंध में निगम के अधिकारियों से बातचीत की गई थी, लेकिन अधिकारियों के जवाब से कर्मचारी बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि वेतन मुख्यालय से लिया जाए, जिस पर सती ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी यहां काम करते हैं तो वे अपना वेतन भी यहीं के प्रबंधन से मांगेंगे। उन्होंने कहा, "अगर हम यह समझ पाते कि निगम की आय क्यों नहीं हो रही है, तो हम आज छोटे कर्मचारी न होकर आरएम या जीएम के पद पर होते।"
राज्यव्यापी कार्य बहिष्कार की सख्त चेतावनी
स्थिति में सुधार न होने पर कर्मचारियों ने शासन और प्रशासन को अंतिम चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी लंबे समय से लंबित वेतन की मांग को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन उग्र रूप ले लेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजबूरी में उन्हें पूरे राज्य में पूर्ण कार्य बहिष्कार का रास्ता चुनना पड़ेगा। अगर ऐसी नौबत आती है तो उत्तराखंड भर में परिवहन निगम की सभी गाड़ियों के पहिये थम जाएंगे, जिससे होने वाली जन-असुविधा और व्यवस्था के ठप होने की पूरी जिम्मेदारी केवल शासन और प्रशासन की होगी।





















