आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खोज से हिला कंप्यूटर साइंस, एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस पर उठे सवाललाइव: चक्रवात अर्णब का ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी तांडव, 55 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्टहजारों साल पुराना है कंडोम का इतिहास, कभी भेड़ की आंत और कछुए के खोल से तैयार होते थे ये कवरपेरेंट्स की ये 5 गलतियां घर में बढ़ाती हैं भाई-बहनों के बीच मनमुटाव, ताउम्र रिश्तों में आ जाती है कड़वाहटरिवाइव हुआ समझौता: वोक्सवैगन ग्रुप के साथ एआई असिस्टेंट साझा करेगी रिवियनडोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कैसे बढ़ी ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता की मानसिक चिंता?स्पेन ट्रेन हादसा: 69 लोगों की मौत, युवा एथलीट और पूर्व मंत्री भी शामिलनीट-यूजी और नेट विवादों के साये में एनटीए का कायापलट, सीआईएसएफ को सौंपी गई सुरक्षा और हटाए गए 600 विशेषज्ञद डेविल्स रिव्यू (2026): कैसे आधी सदी पुराना कल्ट क्लासिक इस हेलोवीन सीजन का सबसे बड़ा सिनेमाई धमाका बन गयादिल्ली का जहरीला प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ दिमाग को भी बना रहा है गंभीर रूप से बीमार, स्ट्रोक का खतरा बेहद तेज
वैश्विक ताकतों के लिए चीन की तरह खतरा नहीं है भारत, नई दिल्ली में बोले जॉर्ज येओदिल्ली
6 अक्तू॰ 2026, 10:32 pm (23 दिन पहले)· 2

वैश्विक ताकतों के लिए चीन की तरह खतरा नहीं है भारत, नई दिल्ली में बोले जॉर्ज येओ

सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज येओ ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक विविधता और खुलापन दुनिया को सहज बनाता है, जबकि चीन के साथ ऐसा नहीं है।

नई दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के मंच पर भारत और चीन की वैश्विक भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण विश्लेषण सामने आया है। इस सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी में सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज येओ ने स्पष्ट किया कि दुनिया की किसी भी महाशक्ति के लिए भारत उस तरह का खतरा नहीं बन सकता, जैसा खतरा चीन को माना जाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि सदियों पुराने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्वाभाविक खुलेपन के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत की प्रगति को सकारात्मक नजरिए से देखता है।

भूगोल और खुली संस्कृतियों का प्रभाव

जॉर्ज येओ के अनुसार, भारत की भौगोलिक बनावट और बाहरी दुनिया के साथ इसके प्राचीन संपर्कों ने देश के स्वभाव को बेहद उदार और ग्रहणशील बनाया है। उन्होंने समझाया कि भारत एक ऐसा भूभाग रहा है जहां मानसूनी हवाएं साल में छह महीने एक दिशा में और अगले छह महीने दूसरी दिशा में चलती हैं। हिंद महासागर के समुद्री मार्गों से लोगों, विभिन्न संस्कृतियों, मसालों और नए विचारों का आवागमन सदियों से होता रहा है। इस निरंतर आवाजाही ने भारत को पूरे क्षेत्र की समृद्ध विविधता का एक जीवंत प्रतीक बना दिया है। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों के लिए चीन की व्यवस्था और समाज को गहराई से समझ पाना काफी जटिल रहता है।

वैश्विक शक्तियों का भरोसा और भारत की स्थिति

अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने खुद को वैश्विक पटल पर बहुत संतुलित स्थिति में स्थापित किया है। इसी वजह से दुनिया के प्रमुख देश भारत का उत्थान देखना चाहते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया यह उम्मीद करता है कि भारत तेजी से आगे बढ़े। ठीक इसी तरह जापान, यूरोप और अमेरिका भी चाहते हैं कि भारत हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करे। यह सद्भाव इसलिए मौजूद है क्योंकि वैश्विक शक्तियों को भारत के विस्तार से कोई रणनीतिक आशंका नहीं महसूस होती, जैसी चिंता चीन की नीतियों को लेकर अक्सर जताई जाती है।

विदेशी नागरिकों के लिए सहजता और अपनापन

जॉर्ज येओ ने समाज और जनजीवन की तुलना करते हुए बताया कि बाहर से आने वाले लोगों को भारत में कदम रखते ही अपनापन और सहजता महसूस होती है, जो शायद चीन में देखने को नहीं मिलती। चीन की यात्रा करने वाले बाहरी लोगों को एक समान दिखने वाले समाज के बीच अक्सर खुद के विदेशी होने का तीव्र अहसास हो सकता है। दूसरी तरफ, भारत हिंद महासागर के तटों पर बसी दुनिया की व्यापक विविधता को अपने भीतर समेटे हुए है। यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति समाज के अलग-अलग रंगों के बीच अपने लिए एक सहज कोना और सुकून भरा दायरा आसानी से ढूंढ लेता है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

जॉर्ज येओ ने भारत और चीन की तुलना में क्या मुख्य बात कही?
उन्होंने कहा कि भारत किसी भी प्रमुख शक्ति के लिए उस तरह का खतरा नहीं है जैसा चीन है, क्योंकि दुनिया भारत की प्रगति को सकारात्मक रूप से देखती है।
यह बयान किस मंच पर और किसकी उपस्थिति में दिया गया?
यह बयान नई दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी में दिया गया।
जॉर्ज येओ के अनुसार भारत को बाहरी दुनिया के लिए खुला क्या बनाता है?
भारत की भौगोलिक स्थिति, मानसूनी हवाओं के चक्र और हिंद महासागर के जरिए सदियों पुराने सांस्कृतिक व व्यापारिक आदान-प्रदान ने इसे बेहद खुला बनाया है।
कौन से देश और क्षेत्र भारत की तरक्की चाहते हैं?
जॉर्ज येओ के मुताबिक दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान, यूरोप और अमेरिका सभी चाहते हैं कि भारत निरंतर उन्नति करे।
विदेशी नागरिकों के अनुभव को लेकर दोनों देशों में क्या अंतर बताया गया?
भारत आने वाले विदेशियों को यहां की विविधता में सहजता और अपनापन मिलता है, जबकि चीन के एक समान समाज में उन्हें विदेशीपन महसूस हो सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·23 दिन पहले

विदेशों में भारत को लेकर जो भरोसा है, वह टेक और मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल इन्वेस्टर्स को यहां लाने में बहुत मदद करेगा। चीन से दूरी बना रहे निवेशकों के लिए भारत एक स्वाभाविक और सुरक्षित विकल्प बनता जा रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 दिन पहले

भारत का खुलापन और विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, जो दुनिया को हम पर भरोसा दिलाती है।

Priya Sharma@priya-sharma·23 दिन पहले

अर्जुन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। हमारे यहाँ की विविधता और खुलेपन की वजह से ही विदेशी लोग यहाँ जल्दी घुल-मिल जाते हैं, जो यात्रा के दौरान हर किसी को चाहिए होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

जॉर्ज येओ की बात में दम तो है कि भारत से किसी को डर नहीं लगता क्योंकि हम खुले हैं। लेकिन क्या पश्चिमी देशों का यह समर्थन सिर्फ चीन को रोकने के लिए एक कूटनीतिक खेल है, या वे वाकई हमारे विकास से खुश हैं?

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

रोहन भाई, पश्चिमी देशों का समर्थन कूटनीतिक चाल हो या न हो, पर जॉर्ज येओ ने हिंद महासागर और मानसूनी हवाओं वाली बात बिल्कुल सटीक कही है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp