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वीर गार्जियन 2026 में भारत और जापान के वायुसेना प्रमुखों ने तेजस से भरी उड़ान, परखी मारक क्षमताराजस्थान
20 सित॰ 2026, 10:09 pm (4 दिन पहले)· 0

वीर गार्जियन 2026 में भारत और जापान के वायुसेना प्रमुखों ने तेजस से भरी उड़ान, परखी मारक क्षमता

जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर द्विपक्षीय सैन्य युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों के वायुसेना अध्यक्षों ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस से फॉर्मेशन उड़ान भरकर रणनीतिक सहयोग प्रदर्शित किया.

राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित युद्धाभ्यास के बारहवें दिन एक ऐतिहासिक दृश्य देखा गया, जब भारत और जापान के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने एक साथ लड़ाकू विमानों में उड़ान भरकर मजबूत द्विपक्षीय साझेदारी का परिचय दिया। द्विपक्षीय युद्धाभ्यास वीर गार्जियन-2026 के इस अहम चरण में भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह तथा जापान एयर एंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मोरिता ताकेहिरो ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में सवार होकर आसमान में संयुक्त शक्ति का मुजाहिरा किया। इस विशेष उड़ान का उद्देश्य दोनों मित्र देशों की सेनाओं के मध्य अंतर-संचालन क्षमता को सुदृढ़ बनाना और सामरिक प्राथमिकताओं को नई दिशा देना रहा।

तेजस फॉर्मेशन का नेतृत्व और जापानी वायुसेना प्रमुख की सह-पायलट उड़ान

इस संयुक्त हवाई अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सोलो कॉकपिट संभालते हुए तेजस विमानों के फॉर्मेशन को लीड किया। दूसरी ओर, जापान के एयर चीफ जनरल मोरिता ताकेहिरो ने ग्रुप कैप्टन आई सम्राट के साथ दो सीटों वाले तेजस विमान में सह-पायलट के तौर पर विंगमैन की भूमिका निभाई। रनवे से एक साथ उड़ान भरने के बाद दोनों लड़ाकू विमानों ने निर्धारित ऊंचाई पर एक सटीक और तालमेल भरे फॉर्मेशन में फ्लाई-पास्ट किया। इस अभ्यास ने जापानी जनरल को भारत के स्वदेशी लड़ाकू प्लेटफॉर्म की आधुनिक एवियोनिक्स, रडार सिस्टम और चुस्त हवाई संचालन को प्रत्यक्ष रूप से परखने का अवसर प्रदान किया। रनवे पर लौटने से पूर्व विमानों ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार फॉर्मेशन को अलग करते हुए सुरक्षित लैंडिंग पूरी की।

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जोधपुर में वीर गार्जियन-2026 का दूसरा संस्करण

भारत तथा जापान के सशस्त्र बलों के बीच चल रहा यह संयुक्त अभ्यास 9 सितंबर से शुरू हुआ था और 22 सितंबर तक जारी रहेगा। जोधपुर एयरबेस पर संचालित इस दूसरे संस्करण में दोनों देशों की ओर से अत्याधुनिक लड़ाकू स्क्वाड्रन मैदान में उतारे गए हैं। जापानी सैन्य टुकड़ी सी-2 परिवहन विमान के जरिए राजस्थान पहुंची थी, जबकि जापान स्थित त्सुइकी एयर बेस से उनके एफ-2 लड़ाकू विमान इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। इसके जवाब में भारतीय वायुसेना ने भी अपने फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स को तैनात किया है, जिनमें सुखोई-30MKI, राफेल तथा घरेलू स्तर पर निर्मित तेजस शामिल हैं। दोनों देशों के जांबाज पायलट प्रतिदिन जटिल हवाई युद्धाभ्यास, डॉगफाइट सिमुलेशन और तकनीकी अनुभव साझा करने वाली वर्कशॉप्स में भाग ले रहे हैं।

पिछली कमी को पूरा करने का मिला मौका

हवाई अभ्यास के उपरांत एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मीडिया से संवाद करते हुए तरंग शक्ति-2024 के घटनाक्रम को स्मरण किया। उन्होंने उल्लेख किया कि उस आयोजन के दौरान जब वे उप वायुसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे, तब जापानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई थी। हालांकि दक्षिण-पूर्व एशिया के हवाई क्षेत्र में अप्रत्याशित खराब मौसम के चलते जापानी लड़ाकू विमान भारत की सीमा तक नहीं पहुंच पाए थे, जिससे संयुक्त उड़ान की योजना अधूरी रह गई थी। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान आयोजन ने उस पूर्ववर्ती कमी को पूरी तरह दूर कर दिया है। एयर चीफ मार्शल ने रेखांकित किया कि साझा प्रशिक्षण मिशन दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की रणनीतिक कार्यप्रणालियों को समझने और अपनी युद्धक क्षमता को निखारने का अनुपम अवसर देते हैं।

सवाल-जवाब

जोधपुर में किन दो वायुसेना प्रमुखों ने संयुक्त उड़ान भरी?
भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और जापान एयर एंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मोरिता ताकेहिरो ने संयुक्त उड़ान भरी।
इस उड़ान के दौरान दोनों अधिकारियों की क्या भूमिका थी?
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सोलो उड़ान भरते हुए फॉर्मेशन का नेतृत्व किया, जबकि जनरल मोरिता ताकेहिरो ग्रुप कैप्टन आई सम्राट के साथ दो सीटों वाले तेजस में सह-पायलट रहे।
वीर गार्जियन-2026 युद्धाभ्यास कब से कब तक आयोजित हो रहा है?
यह द्विपक्षीय सैन्य युद्धाभ्यास जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर 9 सितंबर से शुरू हुआ था और 22 सितंबर तक चलेगा।
जापान की ओर से इस अभ्यास में कौन से विमान शामिल हुए हैं?
जापान की वायुसेना ने अपने सी-2 परिवहन विमान और त्सुइकी एयर बेस से एफ-2 लड़ाकू विमान इस युद्धाभ्यास में उतारे हैं।
भारतीय वायुसेना ने अभ्यास में किन लड़ाकू विमानों को तैनात किया है?
भारतीय वायुसेना ने अपने फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों सुखोई-30MKI, राफेल और स्वदेशी तेजस को तैनात किया है।
तरंग शक्ति-2024 के दौरान जापानी विमान भारत क्यों नहीं पहुंच सके थे?
दक्षिण-पूर्व एशिया के हिस्से में खराब मौसम की स्थिति के कारण उस समय जापानी लड़ाकू विमान भारत की यात्रा पूरी नहीं कर पाए थे।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·4 दिन पहले

रक्षा और रणनीतिक संबंधों का यह नया आयाम पाककला कूटनीति के लिए भी एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है। जब भारत और जापान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने स्वदेशी तेजस विमान में साझा उड़ान भरकर अपनी कूटनीतिक नजदीकियों को मजबूती दी है, तो यह वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मंच तैयार करता है। इस तरह के उच्च स्तरीय सामरिक मेल-मिलाप भोजन, संस्कृति और जीवनशैली से जुड़े द्विपक्षीय संबंधों में भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोलते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

वीर गार्जियन 2026 के इस चरण में दोनों वायुसेना प्रमुखों का तेजस में उड़ान भरना भारत की रक्षा कूटनीति और स्वदेशी विनिर्माण क्षमता के लिए मील का पत्थर है। तरंग शक्ति 2024 के दौरान खराब मौसम से उत्पन्न हुई बाधाओं के बाद, जापान के साथ यह सीधा रणनीतिक सहयोग और आपसी तालमेल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक समीकरणों और मजबूत होते रक्षा संबंधों का स्पष्ट प्रमाण है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

वीर गार्जियन 2026 के इस मंच पर जापान के चीफ ऑफ स्टाफ द्वारा भारतीय तेजस में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरना, भारत के रक्षा विनिर्माण और सामरिक कूटनीति के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यह प्रत्यक्ष जुड़ाव वैश्विक रक्षा बाजार में स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक की स्वीकार्यता को मजबूत करता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच, भारतीय वायुसेना के राफेल और सुखोई के साथ तेजस का ऐसा तालमेल भविष्य में उन्नत रक्षा साझीदारी और इंडो-पैसिफिक में दीर्घकालिक सामरिक संतुलन के नए रास्ते खोलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

वीर गार्जियन 2026 के इस चरण में भारत और जापान के वायुसेना प्रमुखों द्वारा तेजस में भरी गई उड़ान केवल कूटनीतिक संदेश नहीं है, बल्कि यह रक्षा सहयोग को एक नए सामरिक धरातल पर ले जाने का प्रमाण है। जोधपुर एयरबेस पर चल रहे इस युद्धाभ्यास और तरंग शक्ति-2024 की पिछली मौसम संबंधी बाधाओं से सबक लेते हुए यह कड़ा रुख साफ दर्शाता है कि दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को बेहद मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

यह अभ्यास केवल कूटनीतिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तकनीकी और सामरिक समन्वय को अभूतपूर्व मजबूती देता है। जापान जैसे उन्नत तकनीकी देश द्वारा हमारे स्वदेशी 'तेजस' में उड़ान भरना, वैश्विक रक्षा बाजार में भारतीय एयरोस्पेस विनिर्माण की विश्वसनीयता को सीधे तौर पर रेखांकित करता है।

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