पश्चिम बंगाल प्रशासनिक गलियारे में उस समय एक बड़ी हलचल देखने को मिली, जब राज्य के सचिवालय नबन्ना में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के तुरंत बाद शीर्ष नौकरशाही के पदों पर फेरबदल का आदेश जारी कर दिया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से प्रशासनिक ढिलाई और जिलों में अधिकारियों की पोस्टिंग से जुड़े निर्देशों के पालन में हो रही देरी पर व्यक्त की गई सख्त नाराजगी के महज 24 घंटे के भीतर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की कमान नए अधिकारी को सौंप दी गई। इस त्वरित कार्रवाई ने राज्य शासन के भीतर लंबित फैसलों को लागू करने की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है।
समीक्षा बैठक में उठा पोस्टिंग का मुद्दा
पूरे वाकये की शुरुआत सोमवार को हुई एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक से हुई। नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय से मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संवाद किया था। इस वर्चुअल बैठक का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में संचालित आवास योजना के क्रियान्वयन और उसकी वर्तमान प्रगति का लेखा-जोखा लेना था। हालांकि, समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री का ध्यान जिलों में खाली पड़े पदों और अधिकारियों की नई नियुक्तियों की स्थिति की ओर गया।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग और जिलाधिकारियों से सीधा सवाल किया कि पूर्व में जारी किए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो सकी है। उन्होंने कुछ विशिष्ट जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों से मौजूदा स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी। जब यह तथ्य सामने आया कि कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग को पहले दिए गए स्पष्ट आदेशों के बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए, तो मुख्यमंत्री ने विभाग के ढीले रवैये पर गहरी अप्रसन्नता प्रकट की।
मुख्य सचिव को दिए गए विशेष निर्देश
प्रशासनिक निर्णयों को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें शीघ्रता से धरातल पर उतारने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल को व्यक्तिगत रूप से इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने और तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे इस बात की गहनता से पड़ताल करें कि जिला स्तर पर प्रशासनिक नियुक्तियों से जुड़े निर्देशों के क्रियान्वयन में आखिर कहां और किस स्तर पर रुकावट आई तथा इस अनावश्यक विलंब के पीछे क्या कारण रहे।
24 घंटे के भीतर प्रशासनिक आदेश जारी
मुख्यमंत्री के तेवरों के बाद राज्य का प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया और अगले ही दिन 8 सितंबर को आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार सचिव स्तर पर बड़ा फेरबदल कर दिया गया। जारी नए आदेश के तहत सुरेंद्र गुप्ता को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग का नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही सुरेंद्र गुप्ता को भूमि एवं भूमि सुधार विभाग तथा शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अतिरिक्त प्रभार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
अनूप अग्रवाल की नई जिम्मेदारी और घटनाक्रम के मायने
इसी प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत एक अन्य वरिष्ठ नौकरशाह अनूप कुमार अग्रवाल को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और वस्त्र (टेक्सटाइल) विभाग में अपर मुख्य सचिव के पद पर स्थानांतरित किया गया है। एक ही प्रशासनिक आदेश के माध्यम से दो बेहद महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया।
इस पूरे प्रशासनिक बदलाव का समय और इसकी पृष्ठभूमि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सचिवालय बैठक में विभाग के कामकाज पर मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से जताई गई नाराजगी और उसके ठीक 24 घंटे के भीतर आए इन स्थानांतरण आदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार प्रशासनिक प्राथमिकताओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस बड़े फेरबदल के पश्चात जिलों में लंबे समय से लंबित पड़ी अधिकारियों की नियुक्तियों की प्रक्रिया में कितनी तेजी आती है।





















