उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर में सड़कों की खस्ताहाली और गहरे गड्ढों को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ा जनआक्रोश अब प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में उखड़ी सड़कों, दुर्घटनाग्रस्त होते दोपहिया वाहनों और जलजमाव के बीच जूझते राहगीरों के वीडियो इंटरनेट पर लगातार प्रसारित हो रहे हैं। इस चौतरफा फजीहत और नागरिकों के तीखे विरोध के बाद कानपुर नगर निगम ने बदहाल अवसंरचना को सुधारने के लिए कई सौ करोड़ रुपये की एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। प्रशासनिक दावों के अनुसार, मानसून की बारिश थमते ही शहर के प्रमुख प्रभावित मार्गों का कायाकल्प शुरू कर दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और जन प्रतिनिधियों का तंज
कानपुर की सड़कों की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सामाजिक माध्यमों पर लोग शहर के बुनियादी ढांचे का मजाक उड़ा रहे हैं। वायरल वीडियो में कई जगह बाइक सवार अचानक गड्ढों में गिरते दिखाई दे रहे हैं, वहीं नागरिक सड़क की दयनीय हालत का फिल्मांकन कर नगर निगम प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। सोशल मीडिया उपयोगकर्ता व्यंग्यात्मक टिप्पणियां करते हुए यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सड़क में गड्ढे बने हैं या गड्ढों के बीच कहीं सड़क बची है।
यह मुद्दा तब और अधिक गरमा गया जब शहर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मंच से कानपुर की परिवहन व्यवस्था पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि शहर में आकर यह तय कर पाना कठिन है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। इसके अतिरिक्त एक प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता ने भी शहर के जर्जर मार्गों को लेकर इसी प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इन बयानों के बाद कानपुर निवासियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की बदहाल सड़कों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने का अभियान तेज कर दिया, जिससे नगर निगम पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बन गया।
175 स्थान चिन्हित, बारिश खत्म होते ही शुरू होगा काम
व्यापक असंतोष और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए नगर निगम ने शहर के 175 ऐसे प्रमुख स्थानों की सूची तैयार की है, जहां की सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं, उखड़ गई हैं या बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने स्थिति की स्पष्ट जानकारी देते हुए बताया कि चालू मानसूनी सीजन में हुई भारी बारिश के कारण शहर भर के सड़क ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मौसम साफ होने और सड़कों से पानी की नमी समाप्त होते ही प्राथमिकताओं के आधार पर डामरीकरण और पैचवर्क का काम युद्धस्तर पर चलाया जाएगा।
नगर आयुक्त ने आगे स्पष्ट किया कि चिन्हित 175 स्थलों में से 115 प्वाइंट सीधे तौर पर नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा शहर के कई महत्वपूर्ण मार्ग लोक निर्माण विभाग और जल निगम की देखरेख में आते हैं। इन विभागों के नियंत्रण वाली सड़कों को सुधारने के लिए संबंधित उच्च अधिकारियों के साथ पत्राचार शुरू किया गया है, ताकि पाइपलाइन बिछाने या अन्य निर्माण कार्यों के बाद क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की भी समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित की जा सके।
158 टेंडर जारी और 250 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट
सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण पर होने वाले कुल खर्च को लेकर नगर निगम ने पारदर्शी रुख अपनाया है। नगर आयुक्त के अनुसार, प्रत्येक सड़क की लंबाई, क्षति के स्तर और निर्माण सामग्री के आधार पर अलग-अलग बजट तैयार किया गया है। वर्तमान में नगर निगम मुख्यालय को सड़कों के कायाकल्प से जुड़े 158 टेंडर प्राप्त हो चुके हैं। यद्यपि अंतिम राशि का सटीक एकमुश्त विवरण प्रक्रिया पूरी होने पर तय होगा, परंतु अनुमान है कि पूरी योजना पर लगभग 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी। नागरिक निकाय ने भरोसा जताया है कि आने वाले एक महीने के भीतर शहर की सभी मुख्य क्षतिग्रस्त सड़कों को सुचारू यातायात योग्य बना दिया जाएगा।
इन 5 प्रमुख मार्गों पर राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें
कानपुर के कई प्रमुख आवागमन मार्गों पर रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति जिन रास्तों पर दर्ज की गई है, उनमें निम्नलिखित पांच प्रमुख मार्ग शामिल हैं
- जरीब चौकी चौराहा से अफीमकोठी मार्ग: इस व्यस्त व्यापारिक मार्ग पर गहरे गड्ढों के कारण व्यापारिक और निजी वाहनों की गति थम जाती है।
- शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क चौराहा से छैंया होटल चौराहा: रिहायशी इलाके से जुड़ा यह मार्ग पूरी तरह उखड़ चुका है, जिससे पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
- गुरुदेव चौराहा से चिड़ियाघर चौराहा: पर्यटन और दैनिक आवागमन के इस मुख्य रास्ते पर बड़े गड्ढों की वजह से अक्सर लंबा ट्रैफिक जाम लगता है।
- मूलगंज चौराहा से कानपुर सेंट्रल स्टेशन मार्ग: रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाले इस अति आवश्यक मार्ग की बदहाली से बाहर से आने वाले यात्रियों को भारी असुविधा होती है।
- चैन फैक्ट्री चौराहा से संत नगर चौराहा: औद्योगिक और आवासीय यातायात के इस साझा मार्ग पर बारिश का पानी भरने से गड्ढों की गहराई का अनुमान लगाना असंभव हो जाता है।
इन मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि जलजमाव के दौरान सड़क पर बने गड्ढे अदृश्य हो जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहनों का संतुलन बिगड़ने का निरंतर भय बना रहता है। अब शहरवासियों की निगाहें नगर निगम के उस दावे पर टिकी हैं कि बारिश रुकने के बाद क्या वास्तव में एक माह के भीतर इन खतरनाक सड़कों की सूरत बदल पाएगी।





















