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पश्चिम बंगाल में बहती पद्मा नदी से BSF के जवानों ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों को बचाया, 30 दिन के नवजात को मिला नया जीवनपश्चिम बंगाल
13 सित॰ 2026, 9:09 pm (45 दिन पहले)· 1

पश्चिम बंगाल में बहती पद्मा नदी से BSF के जवानों ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों को बचाया, 30 दिन के नवजात को मिला नया जीवन

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ के जवानों ने देवदूत बनकर उफनती पद्मा नदी में डूब रहे दस बांग्लादेशी नागरिकों की जान बचाई, जिसमें एक नवजात भी शामिल था।

मानवता की मिसाल पेश करते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक बड़े हादसे को टाल दिया है। पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बहती पद्मा नदी के तेज बहाव में डूब रहे 10 बांग्लादेशी नागरिकों की जान बचाई गई है। इन बचाए गए लोगों में तीन बच्चे, तीन महिलाएं और चार पुरुष शामिल थे। इस बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती महज 30 दिन के एक नवजात बच्चे को सुरक्षित बचाना था, जो नदी के ठंडे पानी में डूबने के कारण अत्यंत नाजुक स्थिति में पहुंच गया था। सुरक्षा बल के जवानों की तत्परता और सूझबूझ से न केवल सभी लोगों को समय रहते पानी से बाहर निकाला गया, बल्कि तत्काल इलाज मुहैया कराकर नवजात की जान भी बचा ली गई।

पद्मा नदी की लहरों के बीच पलटी यात्रियों से भरी नाव

यह बेहद साहसिक घटना मालदा सेक्टर में तैनात BSF की 71वीं बटालियन के इलाके की है। 12 सितंबर की शाम को सीमा चौकी (बॉर्डर आउट पोस्ट) खंडुआ के पास तैनात जवान अपनी रोजाना की ड्यूटी पर मुस्तैद थे। वे दूरबीन की मदद से सीमावर्ती नदी क्षेत्र की संदिग्ध गतिविधियों की बारीकी से निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद जवानों की नजर अचानक सीमा के करीब नदी की उफनती लहरों पर गई। उन्होंने देखा कि बांग्लादेश की ओर से आ रही एक छोटी नाव नदी के तेज बहाव और अशांत लहरों की चपेट में आकर अचानक पलट गई। नाव पलटते ही उसमें सवार सभी यात्री गहरे पानी में गिर गए और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करने लगे।

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तेज बहाव के बीच जवानों ने चलाया त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन

नदी का बहाव इतना तेज था कि पानी में डूबे हुए बच्चे, महिलाएं और पुरुष खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। वे लगातार पानी की लहरों के साथ बहते हुए भारतीय सीमा की तरफ आ रहे थे। इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए सुरक्षा बल के जवानों ने बिना कोई पल गंवाए तुरंत बचाव अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। जवानों ने अपनी स्पीड बोट को तुरंत उफनती नदी में उतारा और उग्र लहरों का सामना करते हुए पीड़ितों की तरफ बढ़ गए। जवानों ने बेहद सूझबूझ और बहादुरी का परिचय देते हुए एक-एक कर सभी 10 लोगों को सुरक्षित रूप से पानी से बाहर निकाला और उन्हें अपनी स्पीड बोट पर बिठाया।

30 दिन के नवजात को दिया गया तत्काल प्राथमिक उपचार

नदी से सुरक्षित निकाले गए लोगों में एक 30 दिन का छोटा बच्चा भी शामिल था, जो पानी में डूबने के कारण बेहोश हो चुका था और उसकी सांसें काफी कमजोर चल रही थीं। सुरक्षा बल के जवानों ने बिना देरी किए बोट पर ही नवजात को प्राथमिक उपचार देना शुरू किया जिससे उसके फेफड़ों में भरा पानी बाहर निकाला जा सके। इसके बाद, सभी लोगों को तुरंत पास के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की त्वरित देखरेख और बेहतरीन चिकित्सा सेवा के बाद अब नवजात बच्चे की स्थिति स्थिर और पूरी तरह से सामान्य बताई जा रही है।

चपाई नवाबगंज से जोहारपुर जा रहे थे सभी नागरिक

बचाए गए लोगों से जब सुरक्षा अधिकारियों ने प्राथमिक पूछताछ की, तो उन्होंने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि वे सभी पड़ोसी देश बांग्लादेश के जोहारपुर गांव के रहने वाले हैं। वे चपाई नवाबगंज से अपने गांव जोहारपुर की ओर लौट रहे थे। इस यात्रा के दौरान जब वे पद्मा नदी को पार कर रहे थे, तभी अचानक उफनती नदी के तेज बहाव के कारण उनकी नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। इसके बाद वे बहते हुए भारतीय जल क्षेत्र की ओर आ गए, जहां मुस्तैद जवानों ने उन्हें एक नया जीवन दिया।

सवाल-जवाब

बीएसएफ ने कितने लोगों को नदी से बचाया?
बीएसएफ के जवानों ने नदी में डूब रहे कुल 10 बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षित बचाया।
यह घटना किस जगह और किस नदी में हुई?
यह घटना पश्चिम बंगाल के मालदा सेक्टर में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास बहने वाली पद्मा नदी में हुई।
बचाए गए लोगों में कौन-कौन शामिल थे?
बचाए गए लोगों में तीन बच्चे, तीन महिलाएं और चार पुरुष शामिल थे, जिसमें 30 दिन का एक नवजात भी था।
नाव पलटने की मुख्य वजह क्या थी?
पद्मा नदी का बहाव बेहद तेज था, जिसके कारण चपाई नवाबगंज से जोहारपुर जा रही नाव अपना संतुलन खो बैठी और पलट गई।
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